रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की हालिया नई दिल्ली यात्रा के तुरंत बाद अमेरिका की कूटनीतिक सक्रियता तेज हो गई है। रणनीतिक और आर्थिक मोर्चे पर नई दिशा तलाशने के लिए अमेरिका की राजनीतिक मामलों की उपविदेशमंत्री एलिसन हूकर इस सप्ताह भारत पहुंची हैं।

Spread the love

उनका यह पांच दिवसीय दौरा ऐसे समय हो रहा है जब दोनों देशों के बीच एक बड़े व्यापार समझौते (Trade Deal) पर वार्ताएं निर्णायक चरण में हैं।

✍️ अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी

अमेरिकी दूतावास के अनुसार, हूकर नई दिल्ली और बेंगलुरु में वरिष्ठ भारतीय अधिकारियों, विशेषकर विदेश सचिव विक्रम मिस्री से मुलाकात करेंगी। बातचीत में रणनीतिक साझेदारी, उभरती प्रौद्योगिकियों में सहयोग, एआई, स्पेस एक्सप्लोरेशन, और अमेरिकी निर्यात को बढ़ावा अहम एजेंडा रहेगा।

इसी सप्ताह अमेरिकी उप-व्यापार प्रतिनिधि रिक स्वित्ज़र और उनकी टीम भी भारत में रहेंगे, जो इंगित करता है कि वाशिंगटन इस दौरे को केवल कूटनीतिक औपचारिकता नहीं बल्कि व्यापार समझौते की अंतिम बातचीत के रूप में देख रहा है। सूत्रों के अनुसार, भारत आशा कर रहा है कि इस बातचीत से अमेरिका द्वारा लगाए गए उन 50% टैरिफ पर राहत मिल सकती है, जो भारत द्वारा रूसी तेल की खरीद के जवाब में लगाए गए थे।

क्यों बढ़ी अमेरिका की बेचैनी?

अमेरिका में डोनाल्ड ट्रम्प प्रशासन की वापसी के बाद वाशिंगटन की प्राथमिकता सूची में भारत फिर तेजी से ऊपर आया है। पुतिन के साथ भारत की ऊर्जा साझेदारी और सामरिक निकटता से अमेरिका चिंतित है। यही वजह है कि व्हाइट हाउस चाहता है कि भारत अपने व्यापार और तकनीकी सहयोग में वाशिंगटन को अधिक महत्व दे।

हूकर, जिन्हें 2025 में अमेरिका की उपविदेशमंत्री बनाया गया, एशिया नीति, कोरियाई प्रायद्वीप, जापान और चीन मामलों की विशेषज्ञ मानी जाती हैं। उनका यह दौरा इस बात का संकेत है कि अमेरिका उच्च-स्तरीय चेहरों को भारत भेजकर रिश्ते सुधारने और ट्रेड डील को जल्द अंतिम रूप देने में जुट गया है।

क्या जल्द होगी ऐतिहासिक ट्रेड डील?

कूटनीतिक सूत्र बताते हैं कि दोनों देशों के बीच एक फ्रेमवर्क एग्रीमेंट लगभग तैयार है और हूकर-स्वित्ज़र की यह संयुक्त सक्रियता उसी को अंतिम रूप देने की कोशिश है। भारत चाहता है कि रणनीतिक साझेदारी का लाभ आर्थिक क्षेत्र में भी दिखे, जबकि अमेरिका अपने निर्यात और तकनीकी कंपनियों के लिए भारतीय बाजार को और खुला देखना चाहता है।

मौजूदा वैश्विक तनाव, रूस-चीन गठजोड़ और ऊर्जा-प्रौद्योगिकी प्रतिस्पर्धा ने अमेरिका को भारत की जरूरत और बढ़ा दी है। यही वजह है कि वाशिंगटन इस दौरे को “उच्च प्राथमिकता मिशन” मानकर देख रहा है।


Spread the love