रुद्रपुर। सिडकुल ढाल के पास कूड़े के ढेर में लगी आग ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया कि क्या आबादी के बीच औद्योगिक कचरे का ढेर किसी “टाइम बम” से कम है? ट्रांजिट कैंप, जगतपुरा, मुखर्जी नगर, अटरिया मंदिर मोड़ और आवास विकास जैसे घनी आबादी वाले क्षेत्रों में आंखों में जलन, सांस लेने में तकलीफ, दम घुटना और उल्टी जैसी शिकायतें सामने आना इस खतरे की गंभीरता को दर्शाता है।

✍️ अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी
ऐसे समय में विधायक शिव अरोड़ा की तत्परता सराहनीय रही। सूचना मिलते ही वे स्वयं मौके पर पहुंचे, हालात का जायजा लिया और बिना किसी देरी के प्रशासन को सक्रिय किया। एसडीएम, सिडकुल प्रबंधन और फायर ब्रिगेड को मौके पर बुलाकर अपने सामने आग बुझवाना केवल एक औपचारिकता नहीं, बल्कि जनहित के प्रति जिम्मेदार नेतृत्व का उदाहरण है। यह हस्तक्षेप न होता तो हजारों परिवारों के लिए यह घटना एक बड़े स्वास्थ्य और जान-माल के संकट में बदल सकती थी।
विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे कूड़े के ढेरों में आग लगने पर कार्बन मोनोऑक्साइड, सल्फर डाइऑक्साइड, नाइट्रोजन ऑक्साइड और यदि औद्योगिक या प्लास्टिक कचरा हो तो डायऑक्सिन व फ्यूरान जैसी जहरीली गैसें निकल सकती हैं। इनसे आंखों और श्वसन तंत्र में जलन, अस्थमा के दौरे, फेफड़ों को नुकसान, गर्भवती महिलाओं और बच्चों पर गंभीर प्रभाव तथा लंबे समय में कैंसर तक का खतरा हो सकता है।
विधायक शिव अरोड़ा द्वारा कूड़े के स्थायी और योजनाबद्ध समाधान की मांग बिल्कुल उचित है। सिडकुल जैसी औद्योगिक इकाइयों के आसपास कचरे का वैज्ञानिक निस्तारण अब टाला नहीं जा सकता। यह घटना चेतावनी है कि प्रशासन, उद्योग और नगर व्यवस्था को मिलकर ठोस नीति बनानी होगी।
इस पूरे घटनाक्रम में मौके पर मौजूद पार्षद प्रतिनिधि राधेश शर्मा, बलवीर, दीवान जायसवाल, दिनेश, राकेश, विनोद कुमार सहित सभी स्थानीय नागरिकों की सक्रियता भी प्रशंसनीय रही। संकट की इस घड़ी में जनप्रतिनिधि और जनता का यह समन्वय ही रुद्रपुर की असली ताकत है।

