हिंदू खतरे में) आस्था पर हमला या कानून की अवहेलना?चन्द्रदेव मंदिर प्रकरण में महिला और पुजारी की पिटाई का वीडियो वायरल, रुद्रपुर में मचा हड़कंप

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रुद्रपुर (उधम सिंह नगर)।
किच्छा रोड स्थित चन्द्रदेव मंदिर प्रकरण एक बार फिर सुर्खियों में है। इस बार विवाद का कारण कोई बयान या आरोप नहीं, बल्कि एक वीडियो है, जिसमें के.पी. गंगवार की पत्नी काजल गंगवार और मंदिर के पुजारी के साथ सार्वजनिक रूप से मारपीट होती दिखाई दे रही है। यह वीडियो सामने आते ही रुद्रपुर में सनसनी फैल गई है और सवाल उठने लगे हैं—क्या यह मामला वास्तव में “हिंदू आस्था पर हमला” है या फिर कानून-व्यवस्था की खुली अवहेलना?

✍️ अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी


वीडियो में साफ तौर पर देखा जा सकता है कि दिनदहाड़े, सार्वजनिक स्थान पर एक महिला और मंदिर के पुजारी को कथित तौर पर दबंगों द्वारा घेरा जाता है, धक्का-मुक्की की जाती है और हाथापाई होती है। आसपास मौजूद लोग तमाशबीन बने रहते हैं, जबकि किसी प्रभावी हस्तक्षेप के संकेत वीडियो में नजर नहीं आते।
न्यायालय के आदेशों की पृष्ठभूमि में नया विवाद
गौरतलब है कि चन्द्रदेव मंदिर से जुड़ा विवाद पहले से ही न्यायालय में विचाराधीन है। इस प्रकरण में स्थायी निषेधाज्ञा और यथास्थिति बनाए रखने के आदेश की चर्चा पहले भी सामने आ चुकी है। ऐसे में इस तरह की मारपीट का वीडियो सामने आना न केवल धार्मिक भावनाओं को आहत करता है, बल्कि न्यायालय के आदेशों की अवहेलना का भी गंभीर संकेत देता है।
धर्म की आड़ में दबंगई?
स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि यदि यह मारपीट धर्म और मंदिर की आस्था के नाम पर की गई है, तो यह आस्था का नहीं बल्कि दबंगई और राजनीतिक संरक्षण का प्रदर्शन है। वीडियो में दिखाई दे रहे घटनाक्रम ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या कुछ लोग धर्म को ढाल बनाकर कानून को हाथ में लेने का साहस कर रहे हैं।
महिला के साथ मारपीट पर आक्रोश
वीडियो में एक महिला के साथ मारपीट के दृश्य सामने आने के बाद महिला संगठनों और नागरिक समाज में भी रोष है। उनका कहना है कि चाहे विवाद कोई भी हो, किसी महिला और पुजारी के साथ इस तरह की हिंसा अस्वीकार्य है और दोषियों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
पुलिस की भूमिका पर उठे सवाल
इस पूरे मामले में पुलिस की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। वीडियो वायरल होने के बावजूद अब तक ठोस कार्रवाई न होने से लोगों में नाराजगी है। यह सवाल बार-बार उठ रहा है कि क्या प्रभावशाली लोगों के सामने कानून कमजोर पड़ रहा है?
आस्था बनाम कानून
चन्द्रदेव मंदिर प्रकरण अब केवल जमीन या पूजा अधिकार का विवाद नहीं रह गया है। यह मामला आस्था, कानून और लोकतांत्रिक व्यवस्था के टकराव का प्रतीक बनता जा रहा है। एक ओर “हिंदू खतरे में” जैसे नारे हैं, तो दूसरी ओर कानून को ताक पर रखकर की जा रही कथित हिंसा।
अब देखने वाली बात यह होगी कि प्रशासन और पुलिस इस वायरल वीडियो के आधार पर क्या कार्रवाई करते हैं। क्या दोषियों पर कानून का शिकंजा कसेगा, या यह मामला भी राजनीतिक और धार्मिक शोर में दबकर रह जाएगा? रुद्रपुर की जनता जवाब चाहती है—आस्था के नाम पर अराजकता कब तक?


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