नववर्ष पर आस्था का महासंगम: बेरी पड़ाव के श्री महालक्ष्मी मंदिर में उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब

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नववर्ष पर आस्था का महासंगम: बेरी पड़ाव की अष्टादश भुजा श्री महालक्ष्मी
नैनीताल जनपद के हल्द्वानी स्थित बेरी पड़ाव में विराजमान अष्टादश भुजा श्री महालक्ष्मी मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि कुमाऊँ की आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक चेतना का जीवंत केंद्र है। नववर्ष के पावन अवसर पर श्री महालक्ष्मी मंदिर सेवा ट्रस्ट, यतिधाम बेरी पड़ाव के सान्निध्य में यहाँ आस्था का ऐसा महासंगम देखने को मिलता है, जो इतिहास रचता प्रतीत होता है।
हर वर्ष नववर्ष के आगमन पर स्थानीय ही नहीं, बल्कि दूर-दराज़ से लाखों श्रद्धालु माता महालक्ष्मी के दर्शन हेतु यहाँ पहुँचते हैं। मंदिर परिसर और आसपास कई किलोमीटर तक भक्तों की लंबी-लंबी कतारें लग जाती हैं। यह दृश्य केवल भीड़ का नहीं, बल्कि सामूहिक विश्वास, संयम और श्रद्धा का प्रतीक बन जाता है।

नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ नए दशक के दस वर्षों की मंगलकामनाएं। यह समय आत्मचिंतन, साधना और सेवा का है। ईश्वर हमें सत्य, करुणा और धर्म के मार्ग पर अडिग रखे। नया साल और नया दशक समाज, राष्ट्र व मानवता के लिए शांति, समृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति लेकर आए।

✍️ अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर, ( उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी उत्तराखंड)


आध्यात्मिक दृष्टि से यह मंदिर समृद्धि, शक्ति और संतुलन का संदेश देता है। सांस्कृतिक रूप से यह स्थल लोकआस्थाओं, परंपराओं और सामूहिक आयोजनों को सहेजने का कार्य करता है। वहीं सामाजिक स्तर पर यह आयोजन आपसी सौहार्द, अनुशासन और सेवा-भाव को मजबूती प्रदान करता है, जहाँ स्वयंसेवक, ट्रस्ट और स्थानीय लोग मिलकर व्यवस्था संभालते हैं।
नववर्ष पर श्री महालक्ष्मी के चरणों में उमड़ती यह ऐतिहासिक भीड़ यह प्रमाणित करती है कि आधुनिकता के बीच भी हमारी आस्था, संस्कृति और सामाजिक एकता आज भी जीवंत है। बेरी पड़ाव का यह मंदिर देवभूमि उत्तराखंड की उस आत्मा का प्रतीक है, जहाँ नववर्ष केवल कैलेंडर का बदलाव नहीं, बल्कि आत्मिक जागरण का पर्व बन जाता है।


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