शिवपुर से संकल्प तक: विकास, आस्था और हिंदू हृदय सम्राट की भूमिका

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ग्राम शिवपुर में मंदिर प्रांगण के समक्ष इंटरलॉकिंग टाइल्स फर्श का शुभारंभ केवल एक निर्माण कार्य नहीं, बल्कि विकास और आस्था के समन्वय का जीवंत उदाहरण है। 60 लाख रुपये की लागत से आरंभ हुआ यह कार्य उस निरंतर सोच को दर्शाता है, जिसमें सुविधा, सौंदर्य और सुरक्षा—तीनों का संतुलन निहित है। पूर्व विधायक राजकुमार ठुकराल ने पूजा-अर्चना के साथ जिस संकल्प के साथ फीता काटा, वह संकल्प वर्षों से उनकी कार्यशैली की पहचान रहा है।
राजकुमार ठुकराल का राजनीतिक सफर केवल घोषणाओं तक सीमित नहीं रहा।

✍️ अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर, ( उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी उत्तराखंड)

मंदिरों, धार्मिक स्थलों, श्मशान घाटों, सड़कों, नालियों और जनसुविधाओं के विकास में उनकी सक्रिय भूमिका ने उन्हें जन-जन के बीच भरोसे का प्रतीक बनाया। संकट की घड़ी हो—कानूनी अराजकता, सामाजिक तनाव या दुर्घटनाएं—ठुकराल ने हमेशा मौके पर पहुंचकर संवाद, संयम और समाधान का रास्ता चुना। यही कारण है कि वे केवल नेता नहीं, बल्कि समाज के अभिभावक के रूप में देखे जाते हैं।
हिंदू आस्था के संरक्षण और सार्वजनिक जीवन में सांस्कृतिक मूल्यों की दृढ़ उपस्थिति के कारण ही उन्हें लोग स्नेह से “हिंदू हृदय सम्राट” कहते हैं। यह उपाधि किसी मंच से नहीं, जनता के अनुभव से उपजी है। शिवपुर का यह विकास कार्य उसी परंपरा का विस्तार है—जहां मंदिर प्रांगण की गरिमा बढ़ेगी, श्रद्धालुओं को सुविधा मिलेगी और गांव की पहचान सुदृढ़ होगी।

धार्मिक विकास कार्यक्रम मेंकुसुम बख्शी, अंजलि, पूनम, सीमा मलिक, सदानंद मल्कि, रवि विश्वास, मंगल, रजाऊ राय, राजू तपाली, नरेश तपाली, विजय शिकारी, गोविंद, कवि बख्शी, शुभद्रा हाल्दार सहित ग्राम शिवपुर के अनेक स्थानीय नागरिक, श्रद्धालु एवं गणमान्य लोग कार्यक्रम में उपस्थित रहे।शिवपुर का यह कार्य जमीन पर उतरे संकल्प की गवाही देता है। यह बताता है कि जनसेवा जब आस्था और उत्तरदायित्व से जुड़ती है, तब विकास स्थायी बनता है—और नेतृत्व, जनमानस का हृदय जीत लेता है।


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