न्याय की लौ: कैंडल मार्च के माध्यम से इंसाफ की बुलंद आवाज

Spread the love


अंकिता भंडारी हत्याकांड : उत्तराखंड की राजनीति, प्रशासन और न्याय व्यवस्था की अग्निपरीक्षा
अंकिता भंडारी हत्याकांड आज केवल एक आपराधिक मामला नहीं रह गया है, बल्कि यह उत्तराखंड की राजनीति, प्रशासनिक इच्छाशक्ति और न्याय व्यवस्था की गंभीर परीक्षा बन चुका है। सीबीआई जांच की मांग को लेकर प्रदेशभर में उबाल है और मुख्यमंत्री आवास के घेराव तक पहुँचा जनाक्रोश इस बात का स्पष्ट संकेत है कि जनता अब आधे-अधूरे जवाबों से संतुष्ट नहीं है।

✍️ अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर, ( उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी उत्तराखंड)

कैंडल मार्च में मातृशक्ति की सुधा पटवाल, मोहिनी बिष्ट,नीलम कांडपाल,दीपा मटेला,हंसी मिश्रा, स्नेहा पाण्डे, नैना चौहान, प्रथा टंगरिया, पूनम त्यागी, निगा, अनीता यादव, पूनम चौहान, बबली गौर, प्रियंक वर्मा, मुन्नी कांडपाल, कुमारी मनीषा पाण्डे, कल्पना पाण्डे, रेनू, सरिता उपाध्याय, गंगा रावत, मंजू दनाई, हंसी फलकोटी, अनिला उप्रेती, चंपा ,गीता भट्ट,रेखा जोशी,तनुजा बुधौरी,विनीता पांडे,सुधा पटवाल, 
जानकी त्रिपाठी,पुष्पा जोशी,कमला पाठक,सुधा जोशी,हंसी मिश्रा,नीलम पांडे,लीला दनाई,भावना मेहरा,दीपा जोशी,मंजू दनाई,सुनीता पांडे,तारा जोशी,शोभा मिश्रा,प्रभा मेहरा,सरिता उपाध्याय,हेमा पंत,कुमकुम उपाध्याय,रेखा
पूजा,भारती जोशी आदि


इसी क्रम में रुद्रपुर में शैल सांस्कृतिक समिति एवं शैल परिषद के संयुक्त तत्वावधान में गंगापुर रोड स्थित दक्ष चौराहे से गोलजू मंदिर, मोदी मैदान के सामने तक कैंडल मार्च निकाला गया। यह आयोजन अंकिता भंडारी हत्याकांड से जुड़े पूर्व घटनाक्रम और सोशल मीडिया पर चल रही चर्चाओं का संज्ञान लेते हुए किया गया। कैंडल यात्रा में हजारों की संख्या में लोगों ने भाग लिया और वीआईपी को संरक्षण देने के आरोपों को लेकर गहरा आक्रोश व्यक्त किया।

अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर, ( उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी उत्तराखंड)


कैंडल मार्च में शैल परिषद , शैल सांस्कृतिक समिति के पदाधिकारियों व सदस्यों की उल्लेखनीय उपस्थिति रही। प्रमुख रूप से अध्यक्ष गोपाल सिंह पटवाल,, संरक्षक भारत लाल शाह, हरीश,दनाई, हरीश मिश्रा, किशन मिश्रा, धीरज पांडे, संजीव बुधौरी, हरीश दनाई,भुवन जोशी, भुवन बिष्ट, उपाध्यक्ष सतीश ध्यानी एवं मोहन उपाध्याय, कोषाध्यक्ष दया किशन दनाई,  पीसी शर्मा, राजेंद्र बोहरा, दिनेश बम, हरीश पनेरु,भास्कर जोशी, जगदीश बिष्ट, दिनेश भट्ट, दान सिंह मेहरा, मुकुल उप्रेती, पूर्व महानिदेशक चिकित्सा विभाग डॉ. एल.एम. उप्रेती, सतीश लोहनी, हेम पंत पूरन चंद्र जोशी, नीलांबर जोशी ,नरेंद्र रावत, सी.बी. घिंडियाल, ललित बिष्ट,एल.डी. जोशी, राजेंद्र बलौदी, प्रकाश जोशी, महेश कांडपाल, गगन कांडपाल, डी.एस. मेहरा, त्रिभुवन जोशी, के.के. मिश्रा, दयाकिसन बुढ़लाकोटी, शेखर अधिकारी ,शिशुपाल ,संजय सिंह, अशोक चोपड़ा ,रूपाली चौहान, श्वेता गंगवार, कंचन हरबोला,कल्पना पांडे, दीपक कुमार ,आशीष,कैलाश भंडारी, अवधेश महाराज, नागेंद्र तिवारी, अवतार सिंह बिष्ट सहित अनेक सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित रहे।


कैंडल मार्च में राजनीतिक व सामाजिक जीवन से जुड़े प्रमुख लोग भी शामिल हुए। पूर्व स्वास्थ्य मंत्री किच्छा विधायक तिलक राज बहेड़, पूर्व विधायक राजकुमार ठुकराल, उद्योग व्यापार मंडल अध्यक्ष संजय जुनेजा और कांग्रेस नेता मोहन खेड़ा, हरीश  पनेरू, यूकेडी नेता भुवन बिष्ट, हरीश पाठक की उपस्थिति ने इस आंदोलन को और मजबूती दी।
प्रदर्शनकारियों का स्पष्ट कहना था कि अंकिता भंडारी हत्याकांड में प्रभावशाली और वीआईपी लोगों को बचाने का प्रयास हुआ है, जो लोकतंत्र और कानून के राज पर सीधा हमला है। जनता यह जानना चाहती है कि आखिर कब तक रसूखदारों को संरक्षण मिलता रहेगा और कब पीड़िता को वास्तविक न्याय मिलेगा।
आज मुख्यमंत्री आवास का घेराव इस बात का प्रतीक बन गया है कि उत्तराखंड की जनता अब चुप नहीं बैठेगी। अंकिता भंडारी हत्याकांड ने सरकार, प्रशासन और न्याय व्यवस्था के सामने आईना रख दिया है। अब यह देखना होगा कि यह परीक्षा केवल आश्वासनों में सिमटती है या वास्तव में निष्पक्ष जांच और न्याय के रूप में किसी निर्णायक परिणाम तक पहुँचती

हरीश मिश्रा वरिष्ठ समाजसेवी शैल परिषद के आजीवन सदस्य कैंडल मार्च में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले(निवासी: कौशल्या एनक्लेव) का बयान,अंकित भंडारी हत्याकांड ने पूरे समाज को झकझोर कर रख दिया है। यह केवल एक परिवार का नहीं, बल्कि न्याय और मानवता का सवाल है। मैंने कॉलोनी में जाकर लोगों से संपर्क किया ताकि हम सभी एकजुट होकर शांतिपूर्ण तरीके से अपनी आवाज उठा सकें। कैंडल मार्च के माध्यम से हमने स्पष्ट संदेश दिया है कि जब तक इस मामले में निष्पक्ष जांच नहीं होती, वीआईपी चेहरे बेनकाब नहीं होते और अंकित भंडारी को पूरा न्याय नहीं मिलता, तब तक हमारा संघर्ष जारी रहेगा। समाज अब चुप नहीं बैठेगा।

कैंडल मार्च के उपरांत गोलू महाराज के मंदिर मे शैल परिषद के पदाधिकारियों द्वारा चालीसा संग्रह बुक  गुलज्यू महाराज को अर्पित की गई। इस अवसर पर परिषद के पदाधिकारियों ने श्रद्धा के साथ न्याय की कामना की। शैल परिषद ने स्पष्ट किया कि जब तक अंकिता भंडारी हत्याकांड में शामिल वीआईपी के नामों का खुलासा नहीं हो जाता और पीड़िता को पूर्ण न्याय नहीं मिलता, तब तक उनका संघर्ष निरंतर जारी रहेगा। परिषद ने कहा कि यह लड़ाई केवल अंकिता के लिए नहीं, बल्कि समाज में न्याय, नैतिकता और महिला सुरक्षा की रक्षा के लिए है। परिषद ने जनसमर्थन के साथ आंदोलन को और तेज करने का संकल्प लिया।

कैंडल मार्च के दौरान शैल परिषद के अध्यक्ष गोपाल सिंह पटवाल ने कहा कि अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने के लिए समाज की एकजुटता जरूरी है। उन्होंने शांतिपूर्ण कैंडल मार्च में शामिल सभी नागरिकों, सामाजिक संगठनों, युवाओं, मातृशक्ति एवं पत्रकार बंधुओं का हृदय से आभार व्यक्त


Spread the love