

उत्तराखंड में विकास की बात जब भी होती है, सड़कों का नाम सबसे पहले लिया जाता है। पहाड़ हो या तराई—सड़क को विकास की रीढ़ बताया जाता है। लेकिन जब वही सड़क भ्रष्टाचार की प्रयोगशाला बन जाए, तो सवाल केवल गड्ढों का नहीं रह जाता, सवाल व्यवस्था की नीयत पर खड़े हो जाते हैं।

✍️ अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी
रुद्रपुर–काशीपुर रोड, जिसे आधिकारिक तौर पर राष्ट्रीय राजमार्ग-734 (NH-734) कहा जाता है और जिसे स्थानीय लोग व्यंग्य में “ऑल वेदर रोड” कहते हैं, आज इसी सड़ांध का प्रतीक बन चुकी है।
यह सड़क अब सिर्फ दो शहरों को जोड़ने वाला मार्ग नहीं रही, बल्कि यह उस पूरे तंत्र को उजागर करती है जहाँ इंजीनियरिंग मानक, सरकारी नियम, ठेकेदारी व्यवस्था और राजनीतिक संरक्षण—सब मिलकर जनता के पैसों पर डामर की तरह काली परत चढ़ा देते हैं।
सीमेंट सड़क के ऊपर डामर: विकास या विनाश?
सबसे पहला और बुनियादी सवाल यही है कि—
क्या सीमेंट कंक्रीट (CC) रोड बनने के बाद उसके ऊपर डामर (Bitumen) बिछाना सही है?
तकनीकी दृष्टि से इसका जवाब साफ है—नहीं।
सीमेंट कंक्रीट रोड बनाने का उद्देश्य होता है:
25 से 30 साल तक टिकाऊ सड़क
भारी ट्रैफिक को झेलने की क्षमता
कम मेंटेनेंस
बेहतर जल निकासी
जब इसके ऊपर डामर की परत बिछाई जाती है, तो यह पूरी अवधारणा ही नष्ट हो जाती है। यह ऐसा ही है जैसे पक्के मकान पर कच्ची छत डाल दी जाए।
तो फिर डामर क्यों डाला गया?
यहीं से कहानी इंजीनियरिंग से निकलकर भ्रष्टाचार में प्रवेश करती है।
भ्रष्टाचार का गणित: डामर क्यों फायदेमंद है?
डामर की सड़कें:
जल्दी खराब होती हैं
हर साल पैचवर्क मांगती हैं
बार-बार टेंडर निकालने का मौका देती हैं
सीमेंट सड़क:
लंबे समय तक चलती है
मेंटेनेंस कम मांगती है
“कमाई” के मौके सीमित कर देती है
यही कारण है कि सीमेंट कंक्रीट रोड बनने के बावजूद उसके ऊपर डामर की परत डाल दी जाती है—ताकि सड़क को स्थायी समाधान न बनाकर स्थायी कमाई का स्रोत बनाए रखा जा सके।
तकनीकी नियमों की खुली अवहेलना
भारतीय सड़क कांग्रेस (IRC) और MoRTH (Ministry of Road Transport & Highways) के मानकों के अनुसार—
CC रोड पर Bituminous Overlay तभी संभव है जब:
विशेष डिजाइन स्वीकृत हो
बॉन्डिंग लेयर (Tack Coat, Stress Absorbing Membrane) सही तरीके से डाली जाए
ट्रैफिक और थर्मल मूवमेंट का वैज्ञानिक आकलन हो
NH-734 पर:
न तो स्पष्ट डिजाइन सार्वजनिक है
न गुणवत्ता रिपोर्ट
न कोर-कटिंग टेस्ट की जानकारी
यानी न नियम, न पारदर्शिता—सिर्फ डामर।
बरसात आते ही उखड़ती सड़क, उधड़ता सच
“ऑल वेदर रोड” नाम जितना आकर्षक है, हकीकत उतनी ही डरावनी। बरसात आते ही—
डामर उखड़ जाता है
गड्ढे बन जाते हैं
पानी भर जाता है
हादसे बढ़ जाते हैं
हर बारिश इस सड़क की पोल खोल देती है। और हर पोल-खुलासे के साथ सवाल उठता है—
क्या यह अक्षमता है या सुनियोजित लूट?
ठेकेदार–इंजीनियर–अधिकारी गठजोड़
यह मान लेना भोलेपन होगा कि यह सब “गलती से” हुआ।
यह एक पूरा सिस्टम है:
ठेकेदार घटिया काम करता है
इंजीनियर आंख मूंद लेता है
अधिकारी फाइल पर हस्ताक्षर कर देता है
नेता उद्घाटन कर फीता काट देता है
और जब सड़क टूटती है, तो दोष—
मौसम पर डाल दिया जाता है
ट्रैफिक पर डाल दिया जाता है
“पहाड़ की मिट्टी” पर डाल दिया जाता है
लेकिन कभी भ्रष्टाचार पर नहीं।
राष्ट्रीय राजमार्ग या राष्ट्रीय शर्म?
NH-734 राष्ट्रीय राजमार्ग है। इसका मतलब:
केंद्रीय फंड
उच्च मानक
कड़ी निगरानी
फिर सवाल उठता है—
अगर राष्ट्रीय राजमार्ग की यह हालत है, तो राज्य की सड़कों का क्या हाल होगा?
यह सड़क उत्तराखंड के विकास मॉडल पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न है।
जनता की चुप्पी और सिस्टम की निर्भीकता
भ्रष्टाचार केवल अधिकारियों से नहीं पनपता,
वह जनता की चुप्पी से ताकतवर बनता है।
गड्ढों में गिरकर लोग मरते हैं
गाड़ियाँ टूटती हैं
टैक्स वही रहता है
लेकिन जवाबदेही शून्य।
जांच क्यों नहीं होती?
जब भी सवाल उठते हैं—
“कमेटी बना दी जाती है”
रिपोर्ट दबा दी जाती है
मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है
कोई CAG ऑडिट सार्वजनिक नहीं
कोई स्वतंत्र तकनीकी जांच नहीं
क्यों?
क्योंकि अगर ईमानदार जांच हुई— तो सिर्फ सड़क नहीं, पूरा सिस्टम उधड़ जाएगा।
यह सिर्फ सड़क नहीं, सोच का संकट है
NH-734 की समस्या केवल इंजीनियरिंग नहीं है।
यह नीतिगत भ्रष्टाचार है।
यह उस सोच का परिणाम है जहाँ:
काम टिकाऊ नहीं, खर्चीला होना चाहिए
समाधान स्थायी नहीं, अस्थायी होना चाहिए
जनता ग्राहक नहीं, शिकार होती है
समाधान क्या है?
यदि सरकार वाकई गंभीर है, तो उसे चाहिए—
स्वतंत्र तकनीकी ऑडिट
CC रोड पर डामर डालने की अनुमति देने वाले आदेश सार्वजनिक हों
दोषी इंजीनियरों और ठेकेदारों पर आपराधिक कार्रवाई
CAG रिपोर्ट जनता के सामने
भविष्य में CC रोड पर Bituminous Overlay पर पूर्ण प्रतिबंध
निष्कर्ष: डामर के नीचे दबा सच
रुद्रपुर–काशीपुर रोड आज एक आईना है—
जिसमें उत्तराखंड का विकास मॉडल साफ दिखता है।
जब तक सड़कों को कमाई का साधन माना जाता रहेगा,
जब तक इंजीनियरिंग को राजनीति का गुलाम बनाया जाएगा,
तब तक “ऑल वेदर रोड” सिर्फ एक कड़वा मज़ाक बनी रहेगी।
यह सड़क नहीं टूट रही—
जनता का भरोसा टूट रहा है।
और जब भरोसा टूटता है,
तो फिर सिर्फ गड्ढे नहीं बनते—
इतिहास में सवाल बनते हैं।
जिस सड़क को “ऑल वेदर रोड” कहा गया, वह आज उत्तराखंड के विकास मॉडल पर सबसे तीखा व्यंग्य बन चुकी है। यह सड़क हर मौसम में चलने के लिए नहीं, बल्कि हर मौसम में टूटने के लिए जानी जाती है। बरसात में गड्ढे, गर्मी में उखड़ा डामर और सर्दी में धूल—यही इसकी स्थायी पहचान है। सीमेंट कंक्रीट सड़क के ऊपर डामर बिछाना तकनीकी भूल नहीं, बल्कि सुनियोजित भ्रष्टाचार का उदाहरण है। “ऑल वेदर रोड” दरअसल जनता को यह बताती है कि यहाँ मौसम नहीं बदलता—सिर्फ लूट का तरीका बदलता है।
क्रमशः




