

रुद्रपुर शहर वर्षों से जिस यातायात संकट से जूझ रहा है, उसकी जड़ में अव्यवस्थित शहरी विस्तार और बंद पड़े वैकल्पिक मार्ग रहे हैं। डीडी चौक पर लगने वाला भीषण जाम केवल ट्रैफिक समस्या नहीं, बल्कि प्रशासनिक उदासीनता और दीर्घकालिक शहरी योजना के अभाव का प्रतीक रहा है। ऐसे में नगर को नया ‘मिनी बाईपास’ मिलने की पहल सिर्फ एक सड़क परियोजना नहीं, बल्कि शहर को जाम के दलदल से निकालने की एक ठोस कोशिश के रूप में देखी जानी चाहिए।

✍️ अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी
नैनीताल हाईवे से उद्यान विभाग होते हुए आदर्श कॉलोनी (घास मंडी) तक दशकों से बंद पड़े मार्ग को खोलने की कवायद इस बात का संकेत है कि अब फाइलों में दबी योजनाओं को जमीन पर उतारने का समय आ चुका है। महापौर विकास शर्मा द्वारा राजस्व विभाग और नगर निगम की संयुक्त टीम के साथ स्वयं मौके पर जाकर सर्वे करना, इस योजना की गंभीरता को दर्शाता है। यह वही मार्ग है, जो कभी शहर की धड़कन हुआ करता था, लेकिन समय, सुरक्षा कारणों और प्रशासनिक निष्क्रियता के चलते कागजों तक सिमट कर रह गया।
इस मार्ग के पुनः खुलने से आदर्श कॉलोनी, इंदिरा कॉलोनी, बंगाली कॉलोनी, भूरारानी, सिंह कॉलोनी, मलिक कॉलोनी और शांति विहार जैसे घनी आबादी वाले क्षेत्रों को सीधा लाभ मिलेगा। आज इन इलाकों के हजारों लोग मजबूरी में डीडी चौक का चक्कर काटते हैं, जिससे न केवल समय और ईंधन की बर्बादी होती है, बल्कि शहर का ट्रैफिक तंत्र भी चरमरा जाता है। ‘मिनी बाईपास’ का खुलना डीडी चौक के दबाव को कम करने में मील का पत्थर साबित हो सकता है।
यह भी महत्वपूर्ण है कि राजस्व अभिलेखों में यह मार्ग आज भी सार्वजनिक रास्ते के रूप में दर्ज है। तहसीलदार दिनेश कुटौला द्वारा खसरा नंबर 77 के अंतर्गत भूमि की स्थिति और नाले के साथ सड़क निर्माण की संभावना बताना, इस परियोजना को तकनीकी और कानूनी रूप से मजबूत आधार देता है। यदि नियोजित ढंग से इस मार्ग का विकास किया गया, तो यह केवल एक शॉर्टकट नहीं, बल्कि भविष्य का प्रभावी ट्रैफिक कॉरिडोर बन सकता है।
महापौर द्वारा इस योजना को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के शहरी विकास विजन से जोड़ना भी राजनीतिक बयान भर नहीं है। रुद्रपुर को आधुनिक और सुव्यवस्थित शहर बनाने के लिए ऐसे वैकल्पिक मार्गों का खुलना अनिवार्य है। प्रस्तावित अटरिया मोड़ पर नया चौक, आगे चलकर जगतपुरा रोड, सिडकुल, फुलसुंगा, दक्ष चौक और बिगवाड़ा होते हुए किच्छा हाईवे से जुड़ाव—ये सभी संकेत देते हैं कि यह मार्ग आने वाले समय में दो राष्ट्रीय राजमार्गों को जोड़ने वाली अहम लाइफलाइन बन सकता है।
हालांकि, किसी भी विकास परियोजना की असली परीक्षा उसके क्रियान्वयन में होती है। अतिक्रमण, स्थानीय विरोध और प्रशासनिक ढिलाई ऐसे अवरोध हैं, जो अच्छी योजनाओं को भी पटरी से उतार देते हैं। नगर निगम द्वारा अतिक्रमण के खिलाफ सख्ती का संकेत स्वागतयोग्य है, लेकिन यह सख्ती केवल चेतावनी तक सीमित न रहे, यही जनअपेक्षा है।
अंततः, रुद्रपुर का यह प्रस्तावित ‘मिनी बाईपास’ शहर को जाम से राहत देने के साथ-साथ यह संदेश भी देता है कि विकास का रास्ता बंद फाइलों से नहीं, खुले और साहसिक निर्णयों से निकलता है। यदि यह योजना समयबद्ध और पारदर्शी तरीके से पूरी होती है, तो यह न केवल वर्तमान समस्या का समाधान बनेगी, बल्कि भविष्य के रुद्रपुर की नींव भी मजबूत करेगी।




