

नई दिल्ली/पौड़ी गढ़वाल। उत्तराखण्ड के मूल सरोकारों—रोजगार, पलायन, स्वास्थ्य और स्थानीय अधिकार—को केंद्र में रखकर हिमालय क्रांति पार्टी ने अपने जनसम्पर्क और संगठन सुदृढ़ीकरण अभियान को तेज कर दिया है। दिल्ली के बुराड़ी में आयोजित “जाण पछ्याण कार्यक्रम” से लेकर पौड़ी गढ़वाल की लैंसडाउन विधानसभा के दूरस्थ गाँवों तक पार्टी नेतृत्व और कार्यकर्ता सक्रिय रूप से जनता के बीच पहुँच रहे हैं।

अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( अध्यक्ष:उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी परिषद उत्तराखंड)
बुराड़ी में “जाण पछ्याण कार्यक्रम” से 2027 का संदेश
बुराड़ी क्षेत्र में नैनीडांडा वेलफेयर संघ द्वारा आयोजित “जाण पछ्याण कार्यक्रम” में पार्टी के शीर्ष नेतृत्व की गरिमामयी उपस्थिति रही। कार्यक्रम में केंद्रीय अध्यक्ष अजय बिष्ट, महासचिव शंकर दत्त सती, दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष बृजेश शर्मा, वरिष्ठ साथी डॉ. प्रवीन कुमार तथा नैनीताल जिला अध्यक्ष भूपेन्द्र पांडे मंच पर मौजूद रहे।
पदाधिकारियों का पारंपरिक सम्मान किया गया और केंद्रीय अध्यक्ष को अपने विचार रखने का अवसर मिला। अपने संबोधन में अजय बिष्ट ने कहा कि उत्तराखण्ड राज्य गठन के वर्षों बाद भी पहाड़ की मूल समस्याएँ जस की तस हैं। उन्होंने वर्ष 2027 को लक्ष्य वर्ष बताते हुए संगठनात्मक मजबूती, वैचारिक स्पष्टता और जमीनी सक्रियता पर बल दिया।
उन्होंने स्पष्ट किया कि पार्टी का फोकस “एक परिवार – एक रोजगार” जैसे ठोस संकल्प पर है, जिससे प्रदेश में बढ़ते पलायन को रोका जा सके। उनके अनुसार, “राजनीतिक परिवर्तन केवल भाषणों से नहीं, बल्कि संगठित जनशक्ति और निरंतर संवाद से आता है।”
संगठन को आर्थिक सहयोग, कार्यकर्ताओं में उत्साह
कार्यक्रम के दौरान नैनीडांडा ब्लॉक एवं आसपास के क्षेत्रों से जुड़े कार्यकर्ताओं ने सक्रिय भागीदारी की। इसी क्रम में पार्टी के संस्थापक सदस्यों में शामिल धनपाल नेगी ने संगठन को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए ₹10,000 का सहयोग प्रदान किया। पार्टी नेतृत्व ने उनके योगदान को सराहनीय बताते हुए कहा कि संगठन की मजबूती सामूहिक सहयोग से ही संभव है।
नेताओं ने दोहराया कि “बड़े उद्देश्य छोटे-छोटे प्रयासों से ही पूरे होते हैं।” हर समर्थक और कार्यकर्ता यदि अपनी जिम्मेदारी समझे, तो परिवर्तन का मार्ग प्रशस्त होगा।
लैंसडाउन विधानसभा में घर-घर जनसम्पर्क अभियान
दिल्ली में हुए कार्यक्रम के समानांतर उत्तराखण्ड के पर्वतीय क्षेत्रों में भी पार्टी का जनसम्पर्क अभियान जारी है। पौड़ी गढ़वाल जनपद की लैंसडाउन विधानसभा के अंतर्गत नैनीडांडा क्षेत्र के ग्राम डौलियाखाल और अदोडा पल्ला में कार्यकर्ताओं ने घर-घर जाकर जनता से संवाद स्थापित किया।
इस अभियान का नेतृत्व क्रांतिवीर साथी लाल सिंह बिष्ट ने किया। उनके साथ स्थानीय कार्यकर्ताओं की टीम ने प्रत्येक घर तक पहुँचकर ग्रामीणों की समस्याएँ सुनीं और पार्टी की नीतियों से अवगत कराया।
ग्रामीणों ने खुलकर अपनी चिंताएँ सामने रखीं। प्रमुख समस्याओं में जंगली जानवरों का बढ़ता आतंक, स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी, युवाओं में बेरोजगारी और निरंतर पलायन शामिल रहे। कई ग्रामीणों ने बताया कि राज्य गठन से पहले भी ये समस्याएँ थीं, किंतु आज स्थिति और गंभीर हो गई है।
मूल निवासी अधिकार और रोजगार नीति पर जोर
जनसम्पर्क अभियान के दौरान पार्टी ने अपने प्रमुख संकल्पों को दोहराया। इनमें मूल निवासी का स्पष्ट वर्गीकरण और “एक परिवार – एक रोजगार” नीति प्रमुख हैं। पार्टी का तर्क है कि यदि स्थानीय युवाओं को प्रदेश में ही सम्मानजनक रोजगार उपलब्ध कराया जाए, तो न केवल पलायन रुकेगा, बल्कि रिवर्स पलायन की संभावना भी बढ़ेगी।
पार्टी नेताओं का कहना है कि गाँवों में शिक्षा और स्वास्थ्य की बुनियादी सुविधाएँ सुनिश्चित कर, स्थानीय संसाधनों पर स्थानीय लोगों का अधिकार स्थापित कर, और रोजगार सृजन की ठोस नीति लागू कर ही उत्तराखण्ड को सशक्त बनाया जा सकता है।
जनता का समर्थन और भविष्य की रणनीति
लैंसडाउन क्षेत्र में हुए संवाद कार्यक्रमों के दौरान ग्रामीणों ने रोजगार नीति और मूल निवासी अधिकार के मुद्दे पर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी। कई युवाओं ने कहा कि यदि उन्हें अपने ही प्रदेश में अवसर मिले, तो वे बाहर जाने के बजाय अपने गाँव में रहकर काम करना चाहेंगे।
पार्टी नेतृत्व का मानना है कि 2027 तक संगठनात्मक ढाँचे को बूथ स्तर तक मजबूत किया जाएगा और जनसम्पर्क अभियान को निरंतर जारी रखा जाएगा। दिल्ली जैसे महानगरों में बसे उत्तराखण्ड मूल के लोगों को भी राज्य के विकास के एजेंडे से जोड़ने की रणनीति पर काम हो रहा है।
संपादकीय,बुराड़ी के “जाण पछ्याण कार्यक्रम” से लेकर पौड़ी गढ़वाल के दूरस्थ गाँवों तक हिमालय क्रांति पार्टी ने स्पष्ट संकेत दिया है कि वह 2027 को लक्ष्य बनाकर जमीनी स्तर पर सक्रिय है। संगठन विस्तार, आर्थिक सहयोग, जनसंवाद और रोजगार आधारित नीति के माध्यम से पार्टी स्वयं को एक वैकल्पिक राजनीतिक शक्ति के रूप में स्थापित करने का प्रयास कर रही है।
अब देखना यह होगा कि पार्टी का “एक परिवार – एक रोजगार” और मूल निवासी अधिकार का संकल्प आने वाले वर्षों में किस प्रकार ठोस जनसमर्थन में परिवर्तित होता है। फिलहाल, जनसम्पर्क अभियान और संगठन सुदृढ़ीकरण की प्रक्रिया निरंतर जारी है, और पार्टी नेतृत्व इसे परिवर्तन की दिशा में निर्णायक कदम मान रहा है।




