वर्तमान अंतरराष्ट्रीय स्थितियों को देखते हुए दुनिया पर परमाणु युद्ध का खतरा मंडरा रहा है और यह स्थिति पिछले कई दशकों में सबसे गंभीर बताई जा रही है। 2026 की शुरुआत तक, परमाणु तनाव नई ऊंचाइयों पर है, जिसके मुख्य कारण रूस-यूक्रेन संघर्ष, चीन का परमाणु विस्तार और परमाणु हथियार नियंत्रण संधियों का खत्म होना हैं।

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28 फरवरी 2026 से इजरायल और अमेरिका द्वारा ईरान के परमाणु और सैन्य ठिकानों पर किए गए हमलों ने स्थिति को काफी संवेदनशील बना दिया है। हालांकि, परमाणु युद्ध का खतरा फिलहाल “सीधा” नहीं, बल्कि “रणनीतिक” संभावनाओं पर आधारित है। वर्तमान में इजरायल को एक परमाणु शक्ति संपन्न देश माना जाता है (हालांकि वह इसे सार्वजनिक रूप से स्वीकार नहीं करता), जबकि ईरान के पास अभी तक सक्रिय परमाणु हथियार नहीं हैं।

अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( अध्यक्ष:उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी परिषद उत्तराखंड)

ईरान का परमाणु कार्यक्रम: विशेषज्ञों का मानना है कि इन हमलों के बाद ईरान अपनी सुरक्षा के लिए “परमाणु हथियार” बनाने की प्रक्रिया तेज कर सकता है। अगर ईरान परमाणु परीक्षण करता है, तो समीकरण पूरी तरह बदल जाएंगे।

न्यू स्टार्ट (New START) संधि का अंत: अमेरिका और रूस के बीच परमाणु हथियारों को सीमित करने वाली आखिरी प्रमुख संधि ‘न्यू स्टार्ट’ 5 फरवरी 2026 को समाप्त हो गई है। इसके बाद से, दोनों देशों के परमाणु हथियारों के भंडार पर अब कोई कानूनी सीमा नहीं है, जिससे परमाणु हथियारों की असीमित होड़ की संभावना बढ़ गई है।

रूस-यूक्रेन युद्ध और परमाणु धमकियां: यूक्रेन युद्ध के संदर्भ में रूस द्वारा परमाणु हथियारों के उपयोग की धमकियां परमाणु युद्ध के जोखिम को बढ़ा रही हैं। रूस ने हाल ही में परमाणु मिसाइलों (ICBM और क्रूज़) का बड़ा युद्धाभ्यास किया है, जो सीधे तौर पर नाटो (NATO) और विरोधियों को एक संदेश माना जा रहा है।

चीन का परमाणु विस्तार: चीन तेज़ी से अपने परमाणु हथियारों के भंडार को बढ़ा रहा है, जिससे क्षेत्रीय और वैश्विक संतुलन बिगड़ रहा है।

मिडिल ईस्ट में तनाव: इजराइल और ईरान के बीच संघर्ष ने भी परमाणु हथियारों के इस्तेमाल की चिंताओं को बढ़ा दिया है।

डूम्सडे क्लॉक (Doomsday Clock) की स्थिति: परमाणु वैज्ञानिकों के बुलेटिन ने 2026 की शुरुआत में डूम्सडे क्लॉक को ’85 सेकंड टू मिडनाइट’ (विनाश के 85 सेकंड पहले) पर सेट किया है, जो परमाणु युद्ध के उच्चतम स्तर पर होने का संकेत देता है।

तीसरे पक्ष की भूमिका: यदि रूस या उत्तर कोरिया जैसे देश ईरान के समर्थन में आते हैं, तो यह संघर्ष वैश्विक परमाणु अस्थिरता का रूप ले सकता है।

परमाणु ठिकानों की सुरक्षा: हालांकि IAEA (अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी) की हालिया रिपोर्टों के अनुसार, हमलों के बावजूद ईरान के मुख्य परमाणु संयंत्र फिलहाल सुरक्षित बताए गए हैं।
Edited By : Naveen R Rangiyal


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