

रुद्रपुर/टिहरी:टिहरी झील के किनारे आयोजित भव्य लेक फेस्टिवल ने एक बार फिर पर्यटन और उत्सवधर्मिता की चमक बिखेरी, लेकिन इसी चमक के बीच जनपद के जमीनी मुद्दे कहीं दबते हुए नजर आए। जिला कांग्रेस कमेटी टिहरी गढ़वाल के पूर्व अध्यक्ष राकेश राणा ने प्रदेश सरकार और मुख्यमंत्री की चुप्पी को लेकर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उनका कहना है कि टिहरी जैसे संवेदनशील और संघर्षशील जनपद के ज्वलंत मुद्दों पर मुख्यमंत्री का मौन रहना जनता के लिए बेहद निराशाजनक है।

अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( अध्यक्ष:उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी परिषद उत्तराखंड)
कोटी कॉलोनी में आयोजित टिहरी लेक फेस्टिवल में मुख्यमंत्री Pushkar Singh Dhami मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे थे। कार्यक्रम में स्थानीय लोगों और प्रशासन की ओर से उनका गर्मजोशी से स्वागत किया गया। लेकिन समारोह में दिए गए उनके संबोधन में टिहरी जनपद की मूलभूत समस्याओं और लंबे समय से लंबित मांगों का उल्लेख न होना लोगों को खटक गया।
राकेश राणा का कहना है कि टिहरी आज कई गंभीर चुनौतियों से जूझ रहा है। टिहरी मेडिकल कॉलेज की स्थापना का मुद्दा वर्षों से अधर में लटका हुआ है। स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी का आलम यह है कि दूरदराज के ग्रामीण क्षेत्रों में गर्भवती महिलाओं को समय पर चिकित्सा सुविधा नहीं मिल पाती, जिसके कारण कई बार रास्ते में ही उनकी जान चली जाती है। यह स्थिति किसी भी विकसित समाज के लिए चिंता का विषय है।
इसके अलावा पहाड़ी क्षेत्रों में जंगली जानवरों का बढ़ता आतंक ग्रामीणों के लिए बड़ी समस्या बन चुका है। खेतों में खेती करना कठिन होता जा रहा है और कई स्थानों पर लोगों की जान भी खतरे में पड़ रही है। शिक्षा और स्वास्थ्य के बुनियादी ढांचे की कमी के कारण युवाओं को बेहतर अवसर नहीं मिल पा रहे हैं। रोजगार के अभाव में पलायन लगातार बढ़ रहा है, जिससे गांव खाली होते जा रहे हैं और सामाजिक ताना-बाना भी कमजोर पड़ता जा रहा है।
टिहरी बांध परियोजना से प्रभावित और विस्थापित हजारों परिवार आज भी अपने अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं। पुनर्वास, रोजगार, बिजली-पानी जैसी मूलभूत सुविधाओं से जुड़ी कई मांगें आज भी अधूरी हैं। राकेश राणा ने कहा कि Hanumanta Rao Committee की सिफारिशों के अनुसार प्रभावितों को बिजली और पानी रियायती दरों पर उपलब्ध कराने का प्रावधान किया गया था, लेकिन इस दिशा में भी कोई ठोस कदम सामने नहीं आया है।
उन्होंने यह भी याद दिलाया कि पूर्व मंत्री Prakash Pant ने इस संबंध में घोषणा की थी, जिससे लोगों को उम्मीद जगी थी कि विस्थापितों को कुछ राहत मिलेगी। लेकिन आज भी यह मुद्दा अधर में लटका हुआ है और प्रभावित परिवार अपने अधिकारों के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं।
राकेश राणा का कहना है कि केवल उत्सवों और मंचीय कार्यक्रमों से किसी क्षेत्र का वास्तविक विकास नहीं होता। पर्यटन और सांस्कृतिक आयोजनों का अपना महत्व है, लेकिन जब तक जनपद की मूलभूत समस्याओं का समाधान नहीं किया जाएगा, तब तक ऐसे आयोजन जनता के घावों पर मरहम लगाने के बजाय एक औपचारिकता मात्र बनकर रह जाएंगे।
उन्होंने सरकार से मांग की कि टिहरी के विकास और जनसमस्याओं के समाधान के लिए एक स्पष्ट, समयबद्ध और प्रभावी कार्ययोजना बनाई जाए। जनपद के लोगों को अब केवल आश्वासन नहीं बल्कि जमीन पर दिखाई देने वाला विकास चाहिए।
राणा ने कहा कि टिहरी की जनता ने वर्तमान सरकार को भारी बहुमत देकर सत्ता सौंपी थी। ऐसे में जनता की अपेक्षा भी स्वाभाविक रूप से अधिक है। यदि सरकार इन ज्वलंत मुद्दों को गंभीरता से नहीं लेती है तो जनता के भीतर निराशा और असंतोष बढ़ना स्वाभाविक है।
आज टिहरी के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या विकास का मतलब केवल उत्सवों की चकाचौंध तक सीमित रहेगा या फिर पहाड़ के गांवों तक स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार और सुरक्षा की वास्तविक रोशनी भी पहुंचेगी। यही सवाल टिहरी की जनता के मन में गूंज रहा है और आने वाले समय में यही सवाल प्रदेश की राजनीति के लिए भी एक बड़ी कसौटी बन सकता है।




