खनन निदेशक राजपाल लेघा को राष्ट्रीय सम्मान, कुमाऊँ स्टोन क्रशर एसोसिएशन ने जताई खुशी

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रुद्रपुर,हल्द्वानी। उत्तराखण्ड के खनन निदेशक राजपाल लेघा को खनन क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्यों के लिए इंडियंस ऑनेस्ट इंडिपेंडेंस ऑनर सम्मान मिलने पर कुमाऊँ स्टोन क्रशर एसोसिएशन और सितारगंज स्टोन क्रशर एसोसिएशन ने खुशी जताई है। एसोसिएशन के सदस्यों ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में खनन व्यवस्था में पारदर्शिता और सुधार के प्रयासों को राष्ट्रीय पहचान दिलाने में लेघा की अहम भूमिका रही है। उनके कार्यकाल में ई-गवर्नेंस, डिजिटलीकरण और अवैध खनन पर नियंत्रण से राजस्व में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। एसोसिएशन ने कहा कि इन सुधारों से बंद पड़े कई क्रशर दोबारा चालू हुए और हजारों लोगों को रोजगार मिला है।

हल्द्वानी/रुद्रपुर।उत्तराखण्ड के खनन निदेशक राजपाल लेघा को खनन क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्यों के लिए “इंडियंस ऑनेस्ट इंडिपेंडेंस ऑनर” सम्मान मिलने पर कुमाऊँ और सितारगंज क्षेत्र के स्टोन क्रशर उद्योग से जुड़े व्यवसायियों में खुशी की लहर है। कुमाऊँ स्टोन क्रशर एसोसिएशन तथा सितारगंज स्टोन क्रशर एसोसिएशन ने इस उपलब्धि को उत्तराखण्ड के खनन क्षेत्र के लिए गौरवपूर्ण बताया है।

अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( अध्यक्ष:उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी परिषद उत्तराखंड)



एसोसिएशन के पदाधिकारियों और सदस्यों ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य की खनन व्यवस्था में पारदर्शिता और सुधार के लिए किए जा रहे प्रयासों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने में खनन निदेशक राजपाल लेघा की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उनके नेतृत्व में खनन विभाग ने कई ऐसे कदम उठाए हैं जिनसे प्रदेश की खनन व्यवस्था अधिक सुव्यवस्थित और पारदर्शी बनी है।
उन्होंने बताया कि विभाग में ई-गवर्नेंस और डिजिटलीकरण लागू होने से खनन व्यापार में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है और राजस्व में भी तेजी से वृद्धि दर्ज की गई है। अवैध खनन पर नियंत्रण, प्रक्रियाओं में सुधार और आधुनिक तकनीकों के उपयोग से खनन क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव देखने को मिले हैं। इन सुधारों के कारण पहले बंद हो चुके कई स्टोन क्रशर फिर से संचालित होने लगे हैं, जिससे उद्योग को नई ऊर्जा मिली है।
एसोसिएशन के अनुसार पहले गौला नदी में खनन की क्षमता लगभग 54 लाख घनमीटर होने के बावजूद केवल 25 से 30 लाख घनमीटर ही खनन हो पाता था, जबकि अब यह लक्ष्य लगभग पूरा किया जा रहा है। इसी प्रकार नंधौर और कैलाश नदी की लगभग 20 लाख घनमीटर की क्षमता के मुकाबले पहले केवल 2 से 3 लाख घनमीटर ही खनन होता था, लेकिन अब इसमें भी उल्लेखनीय सुधार आया है।
पिछले डेढ़ वर्ष में खनन से राज्य सरकार को मिलने वाला राजस्व भी चार गुना तक बढ़ गया है। पहले जहां यह लगभग 300 करोड़ रुपये था, वहीं अब बढ़कर करीब 1200 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।
स्टोन क्रशिंग उद्योग को उत्तराखण्ड का सबसे बड़ा उद्योग बताते हुए एसोसिएशन के सदस्यों ने कहा कि इस क्षेत्र से रॉयल्टी, फॉरेस्ट ट्रांजिट, जीएसटी, आयकर और आरटीओ जैसे विभिन्न करों के माध्यम से सरकार को हर वर्ष हजारों करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त होता है। इसके साथ ही इस उद्योग से प्रदेश में 2 से 3 लाख लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार भी मिला हुआ है।
एसोसिएशन के प्रतिनिधियों का कहना है कि खनन व्यवस्था में सुधार के कारण पहले सिकुड़ती जा रही मिनरल मार्केट अब फिर से मजबूत हो रही है, जो प्रदेश के औद्योगिक विकास के लिए एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।
खनन निदेशक राजपाल लेघा को मिले इस सम्मान पर एलएससी इन्फ्राटेक लिमिटेड, विन्ध्यवासिनी स्टोन क्रशर, पाल स्टोन इंडस्ट्रीज, सुभाष स्टोन क्रशर, जगदम्बा स्टोन क्रशर, विनोद स्टोन क्रशर, सागर स्टोन क्रशर, हिमालय स्टोन इंडस्ट्रीज, हल्द्वानी स्टोन कंपनी, श्री बालाजी स्टोन कंपनी, उत्तराखण्ड स्टोन कंपनी, जयश्री राम स्टोन क्रशर, महालक्ष्मी स्टोन कंपनी, शुभम स्टोन कंपनी, कामाख्या स्टोन कंपनी, सितारगंज स्टोन कंपनी, राधे सोल्यूशन, बरेली स्टोन कंपनी, मॉर्डन ग्रिट्स इंडस्ट्रीज, भगवती स्टोन इंडस्ट्रीज और देवभूमि स्टोन इंडस्ट्रीज सहित अन्य क्रशर इकाइयों ने भी प्रसन्नता व्यक्त की है।
एसोसिएशन ने उम्मीद जताई कि राजपाल लेघा भविष्य में भी इसी प्रकार उत्तराखण्ड के खनन क्षेत्र को पारदर्शी, व्यवस्थित और उद्योग के अनुकूल बनाने के लिए कार्य करते रहेंगे।


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