

औद्योगिक नगरी रुद्रपुर का सिडकुल क्षेत्र उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है। देश-विदेश की सैकड़ों कंपनियां यहां हजारों युवाओं को रोजगार दे रही हैं। लेकिन समय-समय पर यह भी देखने में आया है कि कुछ संगठित समूह और संदिग्ध नेटवर्क औद्योगिक क्षेत्रों में अपनी पैठ बनाकर मजदूरों के बीच असंतोष फैलाने का प्रयास करते हैं। ऐसे मामलों में कंपनियों को विशेष सतर्कता बरतने की जरूरत है।
इतिहास बताता है कि चीन के वामपंथी नेता Mao Zedong ने क्रांतिकारी आंदोलन खड़ा कर साम्यवादी विचारधारा को संगठित रूप दिया। बाद में दुनिया के कई हिस्सों में इसी विचारधारा से प्रेरित आंदोलन उभरे। भारत में भी वामपंथी उग्रवाद के रूप में इसे जाना गया, जिसकी एक कड़ी Naxalite–Maoist Insurgency के रूप में सामने आई। इसी विचारधारा से जुड़े लोग कई बार अपने प्रभाव वाले इलाकों को “रेड कॉरिडोर” कहकर संबोधित करते हैं और “लाल सलाम” जैसे नारों का इस्तेमाल करते हैं।
रुद्रपुर के औद्योगिक क्षेत्र में भी समय-समय पर यह चर्चा सामने आती रही है कि कुछ निजी सुरक्षा एजेंसियों के माध्यम से ऐसे विचारों से जुड़े लोगों को काम या संरक्षण मिलने की कोशिश होती है। स्थानीय स्तर पर यह भी आरोप लगाए जाते रहे हैं कि कुछ सिक्योरिटी एजेंसियां बिना पर्याप्त लाइसेंस या सत्यापन के श्रमिकों को विभिन्न कंपनियों में तैनात करती रही हैं। यह भी कहा जाता है कि कुछ मजदूर भय या दबाव के कारण अपनी नौकरी तक छोड़ने को मजबूर हुए।
यदि इन आरोपों में जरा भी सच्चाई है तो यह केवल किसी एक कंपनी या एजेंसी का मामला नहीं, बल्कि पूरे औद्योगिक क्षेत्र की सुरक्षा और स्थिरता से जुड़ा प्रश्न बन जाता है। औद्योगिक प्रतिष्ठानों में यदि किसी प्रकार की वैचारिक उग्रता या बाहरी प्रभाव प्रवेश कर जाए तो उसका सीधा असर उत्पादन, निवेश और श्रमिक-प्रबंधन संबंधों पर पड़ता है।
इसीलिए आवश्यक है कि सिडकुल क्षेत्र की सभी कंपनियां सुरक्षा एजेंसियों के चयन में पूरी सावधानी बरतें। किसी भी सिक्योरिटी सर्विस को नियुक्त करने से पहले उसके लाइसेंस, पंजीकरण, कर्मचारियों के पुलिस सत्यापन और पृष्ठभूमि की जांच करना बेहद जरूरी है। साथ ही औद्योगिक संगठनों और प्रशासन को भी यह सुनिश्चित करना चाहिए कि किसी भी प्रकार की संदिग्ध गतिविधि या अवैध सुरक्षा एजेंसी को काम करने की अनुमति न मिले।
यह भी जरूरी है कि श्रमिकों के बीच संवाद और विश्वास का माहौल बने, ताकि कोई भी बाहरी समूह उनकी समस्याओं का फायदा उठाकर उन्हें भड़काने की कोशिश न कर सके। श्रमिकों की वास्तविक समस्याओं का समाधान ही किसी भी प्रकार की कट्टर विचारधारा को रोकने का सबसे प्रभावी तरीका है।
औद्योगिक विकास उत्तराखंड के भविष्य की कुंजी है। इसलिए यह सभी कंपनियों, प्रशासन और समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है कि सिडकुल जैसे औद्योगिक क्षेत्रों को किसी भी प्रकार के वैचारिक उग्रवाद या संदिग्ध नेटवर्क से सुरक्षित रखा जाए। समय रहते सतर्कता ही भविष्य में बड़े संकटों को रोक सकती है।
रुद्रपुर एवं उत्तराखंड के सिडकुल क्षेत्र में काम कर रही कुछ सिक्योरिटी एजेंसियों पर ‘लाल सलाम’ विचारधारा से जुड़े लोगों के संपर्क में होने के आरोप सामने आ रहे हैं। किन एजेंसियों की भूमिका संदिग्ध है और कैसे कंपनियों में उनकी एंट्री हो रही है—इसका विस्तृत खुलासा अगले लेख में किया जाएगा।





