अमेरिका और इजरायल के साथ जारी युद्ध के बीच ईरान ने अपने यहां कथित जासूसी नेटवर्क और सूचना लीक करने वालों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है. ईरान के पुलिस प्रमुख अहमदरेजा रादान ने रविवार को कहा कि अब तक सूचनाएं लीक करने वाले 500 लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जिन पर दुश्मनों के साथ जानकारी साझा करने का आरोप है.

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रादान के मुताबिक इन मामलों में करीब 250 गंभीर श्रेणी के हैं, जिनमें ऐसे लोग शामिल हैं जिन्होंने हमलों के लिए लक्ष्य संबंधी जानकारी दी या फिर हमले वाली जगहों की तस्वीरें और वीडियो बनाकर आगे भेजे.

अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( अध्यक्ष:उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी परिषद उत्तराखंड)

ईरानी मीडिया के मुताबिक ये गिरफ्तारियां अलग-अलग प्रांतों में की गई हैं. उत्तर-पश्चिमी ईरान में प्रांतीय अभियोजक कार्यालय के हवाले से तस्नीम एजेंसी ने बताया कि 20 लोगों को इस आरोप में पकड़ा गया कि उन्होंने ईरान की सैन्य और सुरक्षा संपत्तियों की लोकेशन इजरायल को भेजी. वहीं उत्तर-पूर्वी ईरान में 10 लोगों की गिरफ्तारी की खबर आई, जिनमें कुछ पर संवेदनशील ठिकानों और आर्थिक ढांचे से जुड़ी जानकारी जुटाने का आरोप है. पश्चिमी प्रांत लोरेस्तान में भी 3 लोगों को हिरासत में लेने की बात सामने आई, जिन पर जनमत भड़काने और शोक-प्रतीकों को जलाने की कोशिश का आरोप लगाया गया.

गद्दारों की पहचान कर रहा इजरायल

ईरानी सुरक्षा प्रतिष्ठान इस पूरे घटनाक्रम को सिर्फ जासूसी तक सीमित मामला नहीं बता रहा, बल्कि उसे भीतर से अस्थिरता फैलाने की बड़ी रणनीति का हिस्सा मान रहा है. रिवोल्यूशनरी गार्ड्स की एक प्रांतीय खुफिया इकाई के हवाले से तस्नीम ने कहा कि यहूदी दुश्मन इजरायल और अमेरिका, ईरान पर सैन्य दबाव के साथ-साथ भाड़े के एजेंटों और जासूसों को भी सक्रिय कर रहे हैं ताकि अगले चरण में दंगे और अशांति फैलायी जा सके. यह बयान ऐसे समय आया है जब इजरायल और अमेरिकी लड़ाकू विमान ईरान के भीतर नए ठिकानों पर हमले जारी रखे हुए हैं.

  1. रॉयटर्स ने इसी हफ्ते अपनी एक रिपोर्ट में कहा था कि इजरायल ने अब ईरान के भीतर स्थानीय मुखबिरों से मिली सूचनाओं के आधार पर सुरक्षा चौकियों को भी निशाना बनाना शुरू कर दिया है.
  2. रिपोर्ट के मुताबिक यह इजरायली अभियान का नया चरण है, जिसमें जमीन पर मौजूद स्रोतों की जानकारी से चेकपॉइंट्स और सुरक्षा तंत्र पर हमले किए जा रहे हैं.
  3. इससे साफ है कि तेहरान अब केवल बाहरी हवाई हमलों से नहीं, बल्कि आंतरिक सूचना-लीक और घुसपैठ के खतरे से भी जूझ रहा है.

2000 लोगों को पहले भी पकड़ चुका है ईरान

इस ताजा कार्रवाई की अहमियत इसलिए भी बढ़ जाती है क्योंकि पिछली बार 12 दिन के युद्ध के बाद भी ईरान ने जासूसी नेटवर्क पर बड़ा शिकंजा कसा था. दिसंबर 2025 में ईरान इंटरनेशनल ने एक वरिष्ठ सशस्त्र बल अधिकारी अबोलफज्ल शेकारची के हवाले से रिपोर्ट किया था कि जून 2025 के 12 दिन के युद्ध के दौरान और उसके बाद करीब 2000 लोगों को दुश्मन खुफिया नेटवर्क से कथित संबंधों के आरोप में हिरासत में लिया गया था. इससे पहले अगस्त, 2025 में रॉयटर्स ने भी बताया था कि ईरान ने युद्ध के दौरान इजरायल की मोसाद एजेंसी को सूचना देने के आरोप में कई संदिग्धों को पकड़ा था.

इजरायली खुफिया एजेंसी मोसाद वैसे ही दुश्मन के घर में घुसकर सूचनाएं निकाल लेती है. ऐसे में मौजूदा युद्ध में ईरान के सामने दोहरी चुनौती है- एक ओर अमेरिका और इजरायल के हवाई हमले, दूसरी ओर देश के भीतर कथित जासूसी, सूचना लीक और असंतोष को सुरक्षा खतरे के रूप में देखता उसका तंत्र. 500 नई गिरफ्तारियां बताती हैं कि तेहरान अब अंदरूनी मोर्चे को भी उतनी ही गंभीरता से ले रहा है जितनी बाहरी हमलों को.


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