

हल्द्वानी,आगामी 2027 विधानसभा चुनाव से पहले भीमताल सीट पर कांग्रेस की राजनीति अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचती दिख रही है। सोमवार को कांग्रेस से जुड़े 13 नेताओं ने संयुक्त प्रेस वार्ता कर टिकट के लिए दावेदारी पेश करते हुए साफ संदेश दिया कि इस बार “पैराशूट” या “दलबदलू” उम्मीदवार को किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा।

अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( अध्यक्ष:उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी परिषद उत्तराखंड)
प्रेस वार्ता में राज्य आंदोलनकारी हरीश पनेरु, डॉ. केदार पलड़िया, राकेश बृजवासी, खीमराज सिंह बिष्ट, नवीन चंद्र पलड़िया, राम सिंह चिलवाल, स्वपनिल जोशी, करन बोरा, प्रताप बर्गली, भावेश नेगी, पप्पू बिष्ट, राजू रुवाली सहित अन्य नेता मौजूद रहे। सभी ने एक स्वर में कहा कि यदि मंच पर मौजूद किसी भी एक नेता को टिकट मिलता है तो सभी एकजुट होकर उसे जिताने का काम करेंगे।
“पैराशूट बनाम स्थानीय” की जंग तेज
भीमताल सीट पर इस बार सबसे बड़ा मुद्दा स्थानीय बनाम बाहरी उम्मीदवार बनता जा रहा है। नेताओं ने साफ कहा कि वर्षों से संगठन को खून-पसीने से सींचने वाले कार्यकर्ताओं की अनदेखी अब बर्दाश्त नहीं होगी।
सूत्रों की मानें तो कांग्रेस हाईकमान भी इस सीट पर “पैराशूट उम्मीदवार उतारने” की रणनीति पर विचार कर रहा है, लेकिन जमीनी स्तर पर बढ़ती नाराजगी के चलते यह फैसला पार्टी के लिए भारी पड़ सकता है। ऐसे हालात में अगर आपसी टकराव बढ़ा तो पार्टी किसी पुराने दिग्गज को भी मैदान में उतार सकती है।
भाजपा विधायक पर सीधा हमला
वर्तमान विधायक राम सिंह कैड़ा के नौ साल के कार्यकाल पर सवाल उठाते हुए कांग्रेस नेताओं ने कहा कि क्षेत्र में अपेक्षित विकास नहीं हुआ। उन्होंने आरोप लगाया कि जनता अब बदलाव के मूड में है और भाजपा के “अहंकार” को तोड़ने के लिए मजबूत स्थानीय चेहरा जरूरी है।
बृजवासी का बड़ा ऐलान
पूर्व जिला पंचायत सदस्य राकेश बृजवासी ने बड़ा ऐलान करते हुए कहा कि यदि पार्टी उन्हें या मंच पर मौजूद किसी भी साथी को टिकट देती है तो वह एक करोड़ रुपये तक का आर्थिक सहयोग देकर कांग्रेस प्रत्याशी को जिताने में पूरी ताकत लगा देंगे।
संपादकीय विश्लेषण
भीमताल की सियासत इन दिनों बड़ी दिलचस्प हो चली है। जैसे ही साफ हुआ कि हरीश पनेरू ने वर्षों के संघर्ष से कांग्रेस की जमीन तैयार कर दी है, वैसे ही दावेदारों की फसल लहलहाने लगी। अब हाल ये है कि पूर्व प्रधान, वर्तमान प्रधान, बीडीसी मेंबर, क्षेत्र पंचायत सदस्य और पूर्व सदस्य — सबके अंदर का “विधायक” अचानक जाग उठा है।
जिन्होंने बरसों तक सियासत को दूर से नमस्कार किया, वे भी अब टिकट की कतार में हैं। उधर पनेरू पसीना बहाकर मैदान सींचते रहे, इधर बाकी लोग फसल कटने के समय हंसिया लेकर पहुंच गए। राजनीति में मेहनत कम, मौके की पहचान ज्यादा जरूरी है — भीमताल इसका ताजा उदाहरण बन गया है।
13 दावेदारों में क्यों सबसे आगे दिख रहे हैं हरीश पनेरू?
भीमताल की सियासत में भले ही 13 दावेदार सामने आए हों, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि हरीश पनेरू इस पूरी दौड़ में सबसे दमदार और प्रभावशाली चेहरे के रूप में उभरकर सामने आए हैं।
संघर्ष की राजनीति, सिर्फ दावेदारी
हरीश पनेरू उन नेताओं में नहीं हैं जो चुनाव के समय अचानक सक्रिय होते हैं। पिछले कई वर्षों से उन्होंने भीमताल की सड़क, पानी, स्वास्थ्य और युवाओं के मुद्दों को लेकर लगातार संघर्ष किया है।
उनकी सक्रियता सिर्फ भीमताल तक सीमित नहीं रही, बल्कि उसका प्रभाव पूरे कुमाऊं क्षेत्र में देखने को मिला है।
संगठन को मजबूत करने में अहम भूमिका
कांग्रेस के कमजोर दौर में भी पनेरू ने संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने का काम किया। कार्यकर्ताओं को जोड़ना, आंदोलनों को धार देना और जनता के मुद्दों को उठाना — इन सबमें उनकी भूमिका निर्णायक रही है।
राजनीतिक जानकार मानते हैं कि कुमाऊं में कांग्रेस की जो मजबूती फिर से दिख रही है, उसमें हरीश पनेरू का योगदान नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
जनता के बीच स्वीकार्यता — “नंबर वन”
आज भीमताल की जनता के बीच यदि किसी नेता की सबसे ज्यादा स्वीकार्यता है, तो वह हरीश पनेरू हैं।
उनकी छवि एक आक्रामक, जुझारू और जनता के लिए लड़ने वाले नेता की बन चुकी है।
सोशल मीडिया पर उनकी सक्रियता और मुद्दों पर उनकी बेबाकी उन्हें युवा वर्ग के बीच खासा लोकप्रिय बनाती है।
“विकल्प नहीं, पहली पसंद”
पार्टी के भीतर कई चेहरे जरूर हैं, लेकिन पनेरू को सिर्फ एक विकल्प नहीं बल्कि पहली पसंद के तौर पर देखा जा रहा है।
यदि कांग्रेस इस बार भी स्थानीय और लोकप्रिय चेहरे की अनदेखी करती है, तो इसका सीधा नुकसान पार्टी को उठाना पड़ सकता है।
अनदेखी हुई तो खतरे में सीट
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर हरीश पनेरू को नजरअंदाज किया गया, तो भीमताल सीट कांग्रेस के हाथ से फिसल सकती है।
क्योंकि जनता अब “थोपे गए उम्मीदवार” के बजाय अपने बीच के नेता को चुनने के मूड में है।
13 दावेदारों की भीड़ में जहां कई चेहरे अपनी किस्मत आजमा रहे हैं, वहीं हकीकत यह है कि
हरीश पनेरू सबसे आगे, सबसे मजबूत और सबसे स्वीकार्य उम्मीदवार के रूप में उभर चुके हैं।
अब देखना दिलचस्प होगा कि कांग्रेस हाईकमान जमीनी हकीकत को प्राथमिकता देता है या फिर एक बार फिर “पैराशूट प्रयोग” करता है — क्योंकि इस फैसले पर ही भीमताल की सियासत का भविष्य टिका है।




