नर्सिंग कॉलेजों में घोटाले का खुलासा: सरकार की नींद टूटी, जिम्मेदार कौन?

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देहरादून। शासन के निर्देश पर प्रदेश के नर्सिंग कॉलेजों में हुए आकस्मिक निरीक्षण ने स्वास्थ्य शिक्षा व्यवस्था की जमीनी हकीकत उजागर कर दी है। चार नर्सिंग कॉलेजों में गंभीर अनियमितताएं सामने आने के बाद अब सवाल केवल इन संस्थानों पर ही नहीं, बल्कि पूरी व्यवस्था और सरकारी निगरानी तंत्र पर खड़े हो गए हैं।

अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( अध्यक्ष:उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी परिषद उत्तराखंड)


निरीक्षण समिति ने 9 और 10 मार्च को देहरादून और हरिद्वार के विभिन्न नर्सिंग कॉलेजों का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान गुरुनानक नर्सिंग कॉलेज, सहसपुर, न्यू अनमोल कॉलेज ऑफ नर्सिंग, ढालीपुर (विकासनगर), मॉडर्न ग्लोबल कॉलेज ऑफ नर्सिंग, हरिद्वार और तक्षशिला नर्सिंग कॉलेज, हरिद्वार में भारी खामियां पाई गईं।
जांच में सामने आया कि कई कॉलेजों में न तो पर्याप्त योग्य फैकल्टी मौजूद है, न ही छात्रों की वास्तविक उपस्थिति रजिस्टर से मेल खाती है। इससे साफ संकेत मिलता है कि कागजों में चल रही शिक्षा और जमीन पर हकीकत अलग है।
सबसे गंभीर मामला संबद्ध अस्पतालों का रहा। कई कॉलेजों से जुड़े अस्पताल या तो अस्तित्व में ही नहीं मिले या फिर वे निर्धारित मानकों पर खरे नहीं उतरे। नर्सिंग जैसे व्यावहारिक प्रशिक्षण आधारित पाठ्यक्रम में यदि अस्पताल ही ठीक से संचालित नहीं हो रहे, तो यह सीधे तौर पर छात्रों के भविष्य और मरीजों की सुरक्षा से खिलवाड़ है। इसके अलावा प्रयोगशालाओं, उपकरणों और प्रशिक्षण सुविधाओं में भी भारी कमी पाई गई।
अब बड़ा सवाल यह है कि जब ये अनियमितताएं इतनी स्पष्ट हैं, तो अब तक सरकार और जिम्मेदार विभाग क्या कर रहे थे?
क्या ये कॉलेज बिना नियमित निरीक्षण के वर्षों से चल रहे थे?
क्या मान्यता देने वाली एजेंसियों ने केवल कागजी औपचारिकताएं पूरी कर दीं?
और सबसे अहम—क्या इस पूरे खेल में विभागीय स्तर पर मिलीभगत से इनकार किया जा सकता है?
स्वास्थ्य सचिव सचिन कुर्वे ने रिपोर्ट मिलने की पुष्टि करते हुए कहा है कि इसका परीक्षण किया जा रहा है और रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की जाएगी। लेकिन यह बयान भी कई सवाल छोड़ जाता है—
क्या केवल नोटिस जारी कर देना पर्याप्त होगा?
या फिर उन अधिकारियों की जवाबदेही तय होगी, जिनकी निगरानी में ये संस्थान फलते-फूलते रहे?
प्रदेश में पहले भी फर्जी डिग्री, मान्यता घोटाले और शिक्षा माफिया के आरोप लगते रहे हैं। ऐसे में यह मामला केवल चार कॉलेजों तक सीमित नहीं दिखता, बल्कि पूरे सिस्टम में गहराई तक फैली लापरवाही और भ्रष्टाचार की ओर इशारा करता है।
अब जरूरत है कि—
दोषी कॉलेजों की मान्यता रद्द करने के साथ-साथ
जिम्मेदार अधिकारियों पर भी सख्त कार्रवाई हो
और नर्सिंग शिक्षा की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए पारदर्शी और नियमित निरीक्षण प्रणाली लागू की जाए
क्योंकि यह मामला सिर्फ शिक्षा का नहीं, बल्कि प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था और आम जनता की जान से जुड़ा हुआ है।


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