“2017 की 68,754 से 2022 के 26,988 तक: अब कांग्रेस के 40 हजार जुड़ते ही 2027 में ठुकराल का जीत समीकरण तैयार?”रुद्रपुर में बदला सियासी समीकरण: ठुकराल की कांग्रेस में एंट्री से 2027 की जंग हुई दिलचस्प, भाजपा के लिए बढ़ी चुनौती

Spread the love


रुद्रपुर। आगामी 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर रुद्रपुर की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। पूर्व विधायक राजकुमार ठुकराल के कांग्रेस में शामिल होने के बाद यहां का चुनावी गणित पूरी तरह बदलता नजर आ रहा है। पिछले चुनावों के आंकड़ों और वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों को देखें तो यह मुकाबला अब और ज्यादा रोचक और कड़ा होने की संभावना है।

अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( अध्यक्ष:उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी परिषद उत्तराखंड)


2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ते हुए ठुकराल ने 68,754 वोट हासिल कर कांग्रेस के तिलक राज बहेड़ को करीब 24 हजार मतों से हराया था। उस समय भाजपा और ठुकराल का गठजोड़ बेहद मजबूत माना जा रहा था। लेकिन 2022 में ठुकराल ने भाजपा से अलग होकर निर्दलीय चुनाव लड़ा और लगभग 27 हजार वोट प्राप्त किए। वहीं भाजपा के शिव अरोड़ा ने करीब 60 हजार वोट लेकर जीत दर्ज की और कांग्रेस की मीना शर्मा को लगभग 40 हजार वोट मिले।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि 2022 में त्रिकोणीय मुकाबले का सीधा फायदा भाजपा को मिला। लेकिन अब परिस्थितियां बदल चुकी हैं। ठुकराल के कांग्रेस में आने से पार्टी को एक मजबूत स्थानीय चेहरा मिल गया है, जो अपने व्यक्तिगत जनाधार के साथ मैदान में उतरेगा।
यदि पिछले चुनाव के आंकड़ों को आधार माना जाए तो कांग्रेस के करीब 40 हजार वोट और ठुकराल के लगभग 27 हजार व्यक्तिगत वोट को जोड़ने पर यह आंकड़ा 65 से 70 हजार के बीच पहुंचता है। यह वही स्तर है जिस पर 2017 में ठुकराल ने जीत दर्ज की थी। ऐसे में 2027 में वह एक बार फिर मजबूत दावेदार के रूप में उभर सकते हैं।
इस बीच, कांग्रेस की पूर्व उम्मीदवार मीना शर्मा का भाजपा में जाना भी समीकरणों को प्रभावित कर रहा है। इससे कांग्रेस में नेतृत्व को लेकर स्थिति साफ हुई है और ठुकराल के सामने एक बड़ा स्थानीय प्रतिद्वंद्वी कम होता दिखाई दे रहा है। वहीं भाजपा के लिए यह स्थिति चुनौतीपूर्ण बनती जा रही है, क्योंकि अब मुकाबला त्रिकोणीय न होकर सीधा होने की संभावना है।
स्थानीय स्तर पर यह भी माना जा रहा है कि रुद्रपुर में व्यक्तिगत छवि और जनसंपर्क का प्रभाव काफी ज्यादा रहता है। ठुकराल की सक्रियता और क्षेत्र में लगातार उपस्थिति उन्हें अन्य नेताओं से अलग बनाती है। यही वजह है कि निर्दलीय चुनाव लड़ने के बावजूद उनका वोट बैंक पूरी तरह खत्म नहीं हुआ।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यदि कांग्रेस अपना पारंपरिक वोट बैंक बनाए रखने में सफल रहती है और ठुकराल का व्यक्तिगत वोट पूरी तरह ट्रांसफर होता है, तो 2027 में मुकाबला बेहद कड़ा हो सकता है। वहीं भाजपा को अपनी रणनीति और स्थानीय नेतृत्व पर विशेष ध्यान देना होगा, ताकि संभावित नुकसान से बचा जा सके।
फिलहाल, रुद्रपुर की राजनीति एक नए मोड़ पर खड़ी है, जहां आने वाले समय में राजनीतिक दलों की रणनीति और गठजोड़ ही तय करेंगे कि 2027 में किसके सिर जीत का ताज सजेगा।


Spread the love