शनिवार 21 मार्च को नवरात्रि का तीसरा दिन है और इस दिन माता चंद्रघंटा की पूजा की जाएगी। इसके साथ ही गणगौर व्रत और मत्स्य जयंती का पावन पर्व भी इस दिन मनाया जाएगा। कहते हैं कि मत्स्य जयंती के दिन व्रत करने से व्यक्ति को जल-जंतुओं या जलतत्व से होने वाली हर तरह की परेशानी से छुटकारा मिलता है।

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साथ ही इस व्रत को करने से सुख-सौभाग्य, आरोग्य, प्रेम और ऐश्वर्य की भी प्राप्ति होती है। लिहाजा आज नवरात्र के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा के साथ ही भगवान विष्णु के मत्स्य अवतार और भगवान शिव और माता पार्वती के निमित्त कुछ खास उपाय करके कैसे आप शुभ फलों की प्राप्ति कर सकते हैं। आइए विस्तार से जानते हैं इन उपायों के बारे में।

अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( अध्यक्ष:उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी परिषद उत्तराखंड)

शनिवार 21 मार्च को करें ये उपाय, होगा लाभ

  • आपके परिवार पर कभी किसी प्रकार की परेशानी न आये, इसके लिये पांच गुलाब के खिले हुए फूलों को गायत्री मंत्र पढ़ते हुए डेढ़ मीटर सफेद कपड़े में बांध दीजिये और इसे बहते जल में प्रवाहित कर दीजिए। ऐसा करने से आपके परिवार में कभी किसी प्रकार की परेशानी नहीं आयेगी।
  • अगर आप जीवन में आरोग्य पाना चाहते हैं, अपने जीवन को खुशहाल देखना चाहते हैं, तो आपको भगवान विष्णु के मत्स्य स्वरूप के दर्शन करने चाहिए। साथ ही दो मछलियों के जोड़े की तस्वीर लगानी चाहिए। ऐसा करने से आपको उत्तम स्वस्थ की प्राप्ति होगी।
  • अगर आप कर्ज से मुक्ति पाना चाहते हैं, तो 5 सफेद कौड़ियां लेकर, उन्हें लाल कपड़े में बांधकर देवी माँ के मंदिर में चढ़ाएं और देवी मां की विधि-पूर्वक पूजा करें। पूजा के बाद उस लाल कपड़े को उठाकर अपने साथ घर वापस ले आयें और अपनी तिजोरी में रख लें। ऐसा करने से आपको कर्ज से मुक्ति मिलेगी।
  • अगर आप अपनी धन-सम्पदा में बढ़ोतरी करना चाहते हैं, अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाना चाहते हैं, तो पीली कौड़ी और हर सिंगार की जड़ को रोली, अक्षत, पुष्प, धूप, दीप से पूजन करके धारण करें, या अपने पास रखें इससे आपकी धन-सम्पदा में बढ़ोतरी होगी। ऐसा करने से आपके धन सम्पदा में वृद्धि होगी।
  • जीवन में सुख, समृद्धि पाने के लिये आज कमल की पंखुड़ियों पर माता को मक्खन मिसरी का भोग लगाकर 48 लौंग और 6 कपूर की आहूति दीजिए। ऐसा करने से आपको जीवन में अपार सुख-समृद्धि मिलेगा।
  • अगर आप अपना तेज कायम रखना चाहते हैं या समाज में अपना दबदबा बनाये रखना चाहते हैं, तो केले के पेड़ की जड़ में रोली, चावल, फूल और जल अर्पित करें और नवमी वाले दिन केले के पेड़ की थोड़ी सी जड़ घर में रखें। ऐसा करने से आपका तेज कायम रहेगा। साथ ही समाज में आपका दबदबा भी बनेगा।
  • अगर आप अपनी बिजनेस संबंधी यात्राओं की सफलता सुनिश्चित करना चाहते हैं, तो आपको स्नान आदि के बाद साफ कपड़े पहनकर माँ दुर्गा की विधि पूर्वक धूप-दीप आदि से पूजा करनी चाहिए और पूजा के समय एक एकाक्षी नारियल लेकर, उस पर सात बार मौली लपेटकर देवी माँ को चढ़ाना चाहिए। ऐसा करने से आपके बिजनेस सम्बन्धी यात्राएं सफल होंगी।
  • अगर आप जीवन के हर क्षेत्र में, बिजनेस में, घर में, स्पोर्ट्स में, राजनीति में या किसी मुकदमे में अपनी जीत सुनिश्चित करना चाहते हैं, तो आज कच्चे आटें की लोई में गुड़ भरकर पानी में बहायें। ऐसा करने से आपको जीवन के हर क्षेत्र में सफलता मिलेगी।
  • अगर आप अपने दाम्पत्य जीवन में खुशहाली पाना चाहते हैं, अपने सुख में बढ़ोतरी करना चाहते हैं, तो कमल गट्टे को पीस कर देशी घी की सफेद बर्फी मिला कर 21 आहूति दें। इससे आपका दाम्पत्य जीवन बड़ा ही सुखी रहेगा। ऐसा करने से आपके दाम्पत्य जीवन में खुशहाली आयेगी।
  • अगर आप अपने जीवन में धन की प्राप्ति करना चाहते हैं, तो आज देवी दुर्गा के इस मंत्र का जप करें। मंत्र इस प्रकार है- सर्वा बाधा विनिर्मुक्तो धन धान्य सुतान्वित:। मनुष्यो मत्प्रसादेन भविष्यति न संशय:।। इस मन्त्र का जप करने से आपको अथाह धन की प्राप्ति होगी।
  • अगर आप बेहतर स्वास्थ्य पाना चाहते हैं, तो माँ दुर्गा को एक कपूर और 6 लौंग अर्पित करें। साथ ही दुर्गा जी के मंत्र का 11 बार जप करें। मंत्र है- देहि सौभाग्यं आरोग्यं देहि में परमं सुखम्‌। रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषोजहि।। ऐसा करने से आपका स्वास्थ्य बेहतर होगा।
  • अगर आप स्टूडेंट हैं और अपने करियर में आगे बढ़ने के लिये कड़ी मेहनत कर रहें हैं, लेकिन आपको अपनी मेहनत के अकोर्डिंग रिजल्ट नहीं मिल रहे हैं तो दुर्गा मां को पुष्पांजलि देने के बाद इस मंत्र का 11 बार जप करें। मन्त्र है- या देवी सर्व भूतेषु विद्या रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै, नमस्तस्यै, नमस्तस्यै नमो नमः।। साथ ही 2 कपूर की टिकिया और 12 लौंग देवी मां को चढ़ाएं। ऐसा करने से आपको जल्दी ही करियर में शुभ परिणाम देखने को मिलेंगे।

इस साल ये खास दिन 21 मार्च, शनिवार के दिन है। इस पूजा के लिए महिलाएं बालू और मिट्टी से शिव-पार्वती (ईसर-गौरा) की प्रतिमा का निर्माण करके उनका सम्पूर्ण श्रृंगार करती हैं। भगवान शिव और माता पार्वती की पूरी विधि-विधान के साथ पूजा की जाती है। गणगौर की पूजा में कई तरह के सामान की जरूरत भी पड़ती है। यहां से आप पूजा के सभी सामान की लिस्ट नोट कर सकते हैं। देखें गणगौर की पूजा में क्या- क्या सामान लगता है।

गणगौर पूजा सामग्री लिस्ट-

तांबे का कलश
काली मिट्टी या होली की राख
गणगौर माता की प्रतिमा
दो मिट्टी के बर्तन
मिट्टी के दीये
कुमकुम
चावल
हल्दी
मेहंदी
गुलाल
अबीर
काजल
लकड़ी की चौकी/बाजोट/पाटा
लाल या पीले रंग का कपड़ा
घी
पूजा थाली
फूल
घास
दो मिट्टी के कुंडे/गमले
आम के पत्ते
पानी से भरा बर्तन
पान के पत्ते
बेताल और अशोक के पत्ते
गणगौर के कपड़े
गेहूं
लकड़ी की टोकरी
नारियल
मिठाई
चावल
मूंग
माता की चुनरी

गणगौर उद्यापन सामग्री-

  • हलवा
  • साड़ी
  • सुहाग या सोलह श्रंगार का समान
  • पुरी
  • गेहूं
  • आटा गुण
  • हरी घास

गणगौर पूजा में गुने क्या होते हैं?

गणगौर पूजा के दिन महिलाएं मैदा, बेसन और आटे में हल्दी मिलाकर माता पार्वती के लिए गहने बनाती हैं। इन गहनों को गुने के नाम से जाना जाता है। कहते हैं गणगौर के दिन स्त्रियां जितने गुने माता पार्वती को अर्पित करती हैं उतना ही अधिक उनके परिवार का धन और वैभव बढ़ता है। पूजन की समाप्ति के बाद महिलायें ये गुने अपनी सास, ननद, देवरानी या फिर जेठानी को दे देती हैं।

गणगौर पूजा का महत्व-

गणगौर का पर्व पूरे 18 दिनों तक चलता है। लेकिन इस पर्व का आखिरी दिन सबसे महत्वरपूर्ण होता है। इस पर्व को कई जगहों पर गौरी तीज या सौभाग्य तीज के नाम से भी जाना जाता है। ये व्रत माता पार्वती को समर्पित होता है। मान्यता अनुसार मां पार्वती इस व्रत को करने वाली महिलाओं को सदा सुहागन रहने का वरदान दिया था। इसलिए ही इस व्रत का इतना महत्व माना जाता है।

गणगौर पूजा विधि-

गणगौर व्रत रखने वाली महिलाएं सुबह जल्दी उठकर स्नानादि करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद देवी गौरी और शिव जी का ध्यान करके व्रत का संकल्प लें। मिट्टी से ईसर यानी शिवजी और पार्वती स्वरूप गौर की प्रतिमा बनाएं और उसकी विधि विधान स्थापना करें। गणगौर को सुंदर वस्त्र पहनाएं। फिर रोली, मोली, मेहंदी, हल्दी, काजल आदि चीजों से विधि विधान पूजा करें और गणगौर के गीत भी गाएं। फिर घर की दीवार पर या किसी पेपर पर सोलह-सोलह बिंदियां रोली, मेहंदी और काजल से लगाएं। इसके बाद एक थाली में जल, दूध, दही, हल्दी, कुमकुम घोलकर सुहाग जल तैयार कर लें। फिर दोनों हाथ में दूब लेकर सुहागजल पहले गणगौर पर छिड़कें। फिर अपने ऊपर भी इसका छिड़काव करें। फिर गणगौर को मीठे गुने या चूरमे का भोग लगाना है। पूजा के समय गणगौर की कथा भी जरूर सुनें। फिर शाम को शुभ मुहूर्त में गणगौर को पानी पिलाने की परंपरा निभाई जाती है। इसके बाद किसी पवित्र सरोवर या कुंड में गणगौर की प्रतिमा का विसर्जन कर दिया जाता है।


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