उत्तराखंड प्रदेश में वर्दीधारी सेवाओं की भर्ती प्रक्रिया को अधिक प्रभावी और व्यावहारिक बनाने के लिए सरकार सेवा नियमावली में बदलाव किया जा रहा है। कुछ समय पूर्व जारी की गई एकीकृत सेवा नियमावली में विभिन्न विभागों द्वारा कई विसंगतियां चिह्नित की गईं थीं, जिसके बाद अब आयु सीमा और शारीरिक दक्षता से जुड़े मानकों में संशोधन का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है।

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कैबिनेट ने कुछ समय पूर्व सभी वर्दीधारी सेवाओं के लिए एकीकृत सेवा नियमावली जारी की थी। इनमें पुलिस, परिवहन, वन, आबकारी, राज्य कर विभाग शामिल थे। इसमें भर्ती परीक्षा, आयु सीमा और शारीरिक परीक्षा के लिए अलग-अलग मानक निर्धारित किए गए थे।

अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( अध्यक्ष:उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी परिषद उत्तराखंड)

इसमें विभागों में भर्ती की आयु सीमा को लेकर काफी अंतर था। कहीं अधिकतम आयु सीमा 23 वर्ष तो कहीं 40 वर्ष तक रखी गई। इस पर विभागों से प्राप्त प्रस्तावों के आधार पर कुछ विभागों में भर्ती की आयु को बढ़ाने की तैयारी है। इससे विशेष रूप से दूरस्थ और पर्वतीय क्षेत्रों के युवाओं को लाभ मिलने की उम्मीद है।

इसके साथ ही, शारीरिक परीक्षा के मानकों में भी व्यावहारिक संशोधन प्रस्तावित हैं। विभागों का मानना है कि वर्तमान मानक कुछ मामलों में अत्यधिक कठोर या असंगत हैं, जिससे चयन प्रक्रिया प्रभावित होती है। नए संशोधन में संतुलित और कार्य-उपयुक्त मानकों को शामिल किया जाएगा, ताकि दक्षता और चयन के बीच बेहतर तालमेल स्थापित हो सके।

इनमें दौड़ का समय, बाल थ्रो की दूरी, लंबी कूद आदि परीक्षाएं शामिल हैं। सूत्रों की मानें तो कार्मिक विभाग ने इसे अंतिम रूप दे दिया है। अब इन संशोधनों को मंजूरी के लिए मंत्रिमंडल के समक्ष रखा जाएगा। स्वीकृति मिलने के बाद संशोधित नियमावली लागू की जाएगी।


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