उत्तरकाशी, 10 जून। उत्तराखण्ड राज्य आन्दोलनकारी संयुक्त संगठन, गंगा घाटी उत्तरकाशी ने राज्य आन्दोलनकारियों के सम्मान, अधिकारों और सुविधाओं से जुड़ी विभिन्न मांगों को लेकर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नाम एक विस्तृत मांगपत्र प्रेषित किया है।
अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( अध्यक्ष:उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी परिषद उत्तराखंड
संगठन के जिलाध्यक्ष विजयपाल सिंह राणा (सुनील) के नेतृत्व में भेजे गए इस ज्ञापन में राज्य आन्दोलनकारियों को राज्य निर्माण में उनके योगदान के अनुरूप सम्मान और सुविधाएं प्रदान करने की मांग की गई है।
संगठन का कहना है कि उत्तराखण्ड राज्य निर्माण आन्दोलन में हजारों लोगों ने अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया था। अनेक आन्दोलनकारियों ने संघर्ष, त्याग और बलिदान के माध्यम से पृथक उत्तराखण्ड राज्य की स्थापना का मार्ग प्रशस्त किया। राज्य गठन के वर्षों बाद भी अनेक आन्दोलनकारी अपनी मूलभूत मांगों और अधिकारों के लिए संघर्ष करने को मजबूर हैं। इसी क्रम में संगठन ने मुख्यमंत्री के समक्ष सात प्रमुख मांगें रखी हैं।
राज्य आन्दोलनकारियों ने उठाई सम्मान और अधिकारों की मांग, मुख्यमंत्री को भेजा ज्ञापन
‘राज्य निर्माण सैनानी’ का दर्जा देने समेत सात सूत्रीय मांगपत्र सरकार को सौंपा
उत्तराखण्ड आन्दोलनकारियों की हुंकार: समान पेंशन, आरक्षण और सुविधाओं की मांग तेज
ज्ञापन में सबसे प्रमुख मांग उत्तराखण्ड राज्य आन्दोलनकारियों को “राज्य निर्माण सैनानी” का दर्जा दिए जाने की है। संगठन का कहना है कि जिस प्रकार स्वतंत्रता सेनानियों को राष्ट्र निर्माण में योगदान के लिए सम्मानित किया गया, उसी प्रकार उत्तराखण्ड राज्य के निर्माण में भूमिका निभाने वाले आन्दोलनकारियों को भी राज्य निर्माण सैनानी के रूप में मान्यता दी जानी चाहिए। इससे उनके संघर्ष और योगदान को उचित सम्मान मिल सकेगा।
दूसरी मांग में सभी चिन्हित राज्य आन्दोलनकारियों को समान रूप से 20 हजार रुपये मासिक पेंशन प्रदान करने की बात कही गई है। संगठन का तर्क है कि वर्तमान व्यवस्था में विभिन्न श्रेणियों के आधार पर मिलने वाली सुविधाओं में असमानता है, जबकि आन्दोलन में योगदान देने वाले सभी लोगों को समान सम्मान मिलना चाहिए। इसलिए एक समान पेंशन व्यवस्था लागू की जानी चाहिए।
संगठन ने तीसरी मांग के रूप में चिन्हित आन्दोलनकारियों को शीघ्र परिचय पत्र जारी करने की मांग उठाई है। ज्ञापन में कहा गया है कि कई आन्दोलनकारियों का चिन्हीकरण होने के बावजूद उन्हें अभी तक परिचय पत्र उपलब्ध नहीं कराए गए हैं, जिससे उन्हें विभिन्न योजनाओं और सुविधाओं का लाभ लेने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
इसके अलावा आन्दोलनकारियों के आश्रितों को मिलने वाली पेंशन में हो रही देरी पर भी चिंता व्यक्त की गई है। संगठन ने सरकार से मांग की है कि आश्रित पेंशन से जुड़े मामलों का त्वरित निस्तारण कर लाभार्थियों को समय पर सुविधा उपलब्ध कराई जाए। उनका कहना है कि कई परिवार लंबे समय से पेंशन स्वीकृति की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
यात्रा सुविधा से जुड़ी मांग में संगठन ने राज्य आन्दोलनकारियों को सरकारी बसों में एक सहयात्री के साथ यात्रा करने की अनुमति देने का आग्रह किया है। संगठन का मानना है कि अधिकांश आन्दोलनकारी अब वरिष्ठ नागरिक की श्रेणी में आते हैं और उन्हें यात्रा के दौरान सहयोग की आवश्यकता होती है। इसलिए उनके साथ एक सहवर्ती को भी यात्रा की सुविधा प्रदान की जानी चाहिए।
ज्ञापन में पंचायत स्तर पर 20 प्रतिशत आरक्षण की मांग भी प्रमुखता से उठाई गई है। संगठन का कहना है कि राज्य आन्दोलनकारियों को पंचायत संस्थाओं में पर्याप्त प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए ताकि वे ग्रामीण विकास और स्थानीय प्रशासन में अपनी भूमिका निभा सकें। इसके लिए पंचायत चुनावों में 20 प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था की जानी चाहिए।
संगठन ने उत्तरकाशी मुख्यालय में राज्य आन्दोलनकारियों के लिए एक स्थायी बैठक कक्ष उपलब्ध कराने की मांग भी रखी है। उनका कहना है कि आन्दोलनकारियों के पास बैठकों, विचार-विमर्श और संगठनात्मक गतिविधियों के संचालन के लिए कोई स्थायी स्थान नहीं है। यदि मुख्यालय में एक बैठक कक्ष उपलब्ध कराया जाता है तो इससे संगठनात्मक कार्यों को सुचारु रूप से संचालित करने में सहायता मिलेगी।
जिलाध्यक्ष विजयपाल सिंह राणा ने कहा कि उत्तराखण्ड राज्य आन्दोलन केवल एक राजनीतिक संघर्ष नहीं था, बल्कि यह पहाड़ की जनता की आकांक्षाओं, पहचान और अधिकारों की लड़ाई थी। राज्य निर्माण में योगदान देने वाले आन्दोलनकारियों को सम्मानित करना सरकार और समाज दोनों का दायित्व है। उन्होंने उम्मीद जताई कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी राज्य आन्दोलनकारियों की भावनाओं को समझते हुए उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय लेंगे।
संगठन के पदाधिकारियों ने कहा कि यदि मांगों पर शीघ्र कार्रवाई की जाती है तो इससे राज्य आन्दोलनकारियों में सम्मान और विश्वास की भावना मजबूत होगी। उन्होंने सरकार से मांगपत्र में उल्लिखित सभी बिंदुओं पर गंभीरता से विचार कर आवश्यक कार्रवाई करने का आग्रह किया है।
ज्ञापन में संगठन के संरक्षक, वरिष्ठ उपाध्यक्ष, महासचिव, सह सचिव, कोषाध्यक्ष तथा अन्य पदाधिकारियों ने भी समर्थन जताते हुए कहा कि उत्तराखण्ड राज्य आन्दोलनकारियों का सम्मान राज्य की अस्मिता और गौरव से जुड़ा विषय है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सरकार आन्दोलनकारियों की लंबे समय से लंबित मांगों का समाधान कर उन्हें न्याय दिलाने का कार्य करेगी।
