आदमखोर गुलदार पर कार्रवाई में देरी पर भड़के पूर्व BSF अधिकारी, मानवाधिकार आयोग जाने की चेतावनी

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पौड़ी गढ़वाल में गुलदार का आतंक बरकरार, जल संकट से जूझ रहे ग्रामीण; प्रशासनिक लापरवाही के गंभीर आरोप
पौड़ी गढ़वाल।

अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( अध्यक्ष:उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी परिषद उत्तराखंड)
जनपद पौड़ी गढ़वाल के विकासखंड कोट क्षेत्र में सक्रिय आदमखोर गुलदार के खिलाफ समय पर कार्रवाई न होने को लेकर प्रशासन पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। ग्राम बालमना निवासी एवं सेवानिवृत्त बीएसएफ असिस्टेंट कमांडेंट रवींद्र प्रसाद जुयाल ने मुख्यमंत्री को प्रेषित शिकायत पत्र में वन विभाग, जिला प्रशासन और संबंधित अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर तीखी नाराजगी जताई है।
शिकायत के अनुसार, प्रमुख वन संरक्षक (वन्यजीव) द्वारा 10 मार्च 2026 को जारी आदेश में आदमखोर गुलदार को 15 दिनों के भीतर पकड़ने या अत्यावश्यक स्थिति में मार गिराने के निर्देश दिए गए थे। यह आदेश 9 मार्च 2026 को ग्राम चिवालु थोक (पट्टी बनगढ़स्यूं) में हुई दर्दनाक घटना के बाद जारी हुआ था, जिसमें प्रकाश लाल को गुलदार ने हमला कर मौत के घाट उतार दिया था।
आदेश के बावजूद कार्रवाई नहीं, ग्रामीणों में भय का माहौल
शिकायत में कहा गया है कि निर्धारित 15 दिनों की अवधि बीत जाने के बाद भी न तो गुलदार को पकड़ा गया और न ही उसे मार गिराया गया। इससे क्षेत्र में दहशत का माहौल बना हुआ है और ग्रामीणों का सामान्य जीवन प्रभावित हो रहा है।
रवींद्र जुयाल ने आरोप लगाया कि अभियान में लगे कार्मिक लापरवाही बरत रहे हैं और कुछ के बारे में यह भी जानकारी मिली है कि वे ड्यूटी के दौरान नशे की हालत में रहते हैं, जो गंभीर अनुशासनहीनता का मामला है।
प्रशासनिक उदासीनता पर उठे सवाल
शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि जिला मजिस्ट्रेट और गढ़वाल आयुक्त ने अब तक घटना स्थल का दौरा नहीं किया और न ही पीड़ित परिवार से मुलाकात की। इससे प्रशासन की संवेदनहीनता उजागर होती है।
घटना स्थल एक सार्वजनिक मार्ग पर स्थित है, जिससे ग्रामीणों में लगातार भय बना हुआ है। स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि क्षेत्र में अंधविश्वास भी फैलने लगा है।
जल संकट ने बढ़ाई परेशानी, मानवाधिकार का मुद्दा बना मामला
ग्राम बालमना में जल संकट ने हालात और भी गंभीर बना दिए हैं। हालिया बारिश के चलते जल स्रोत, पाइपलाइन और टैंक मलबे से भर गए हैं, जिससे जलापूर्ति पूरी तरह ठप हो चुकी है।
गुलदार के भय के कारण ग्रामीण जल स्रोतों की सफाई करने में असमर्थ हैं। इसे जीवन के अधिकार और मानव गरिमा के उल्लंघन के रूप में उठाया गया है।
सरकार से की गई प्रमुख मांगें
शिकायतकर्ता ने मुख्यमंत्री से तत्काल प्रभाव से निम्नलिखित कार्रवाई की मांग की है—
आदमखोर गुलदार के खिलाफ जारी आदेश को तब तक प्रभावी रखा जाए जब तक कार्रवाई पूरी न हो
अधिकृत शूटरों की तत्काल तैनाती
लापरवाह अधिकारियों पर विभागीय एवं दंडात्मक कार्रवाई
संयुक्त अभियान (वन विभाग + पुलिस + विशेषज्ञ टीम) शुरू किया जाए
जिला प्रशासन को मौके पर जाकर निरीक्षण के निर्देश
जल संकट के समाधान हेतु सुरक्षा के बीच जल स्रोतों की सफाई
टैंकरों के माध्यम से वैकल्पिक जलापूर्ति
ग्रामीणों में जागरूकता अभियान चलाया जाए
15 दिन में कार्रवाई नहीं तो मानवाधिकार आयोग का दरवाजा खटखटाने की चेतावनी
रवींद्र जुयाल ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि अगले 15 दिनों में ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो वह मामले को मानवाधिकार आयोग एवं अन्य न्यायिक मंचों पर ले जाएंगे। उन्होंने कहा कि भविष्य में होने वाली किसी भी जनहानि या संकट के लिए राज्य सरकार और प्रशासन जिम्मेदार होंगे।

पौड़ी गढ़वाल में आदमखोर गुलदार का आतंक और जल संकट मिलकर एक गंभीर मानवीय संकट का रूप ले चुके हैं। अब देखना होगा कि शासन-प्रशासन इस चेतावनी के बाद कितनी तेजी और गंभीरता से कार्रवाई करता है।


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