रुद्रपुर में 6 मौतों से पसरा मातम, पोस्टमार्टम हाउस में गूंजे चीत्कारउपशीर्षक:समाजसेवी सुशील गाबा ने परिजनों को बंधाया ढांढस, कई मौतों पर उठे सवाल

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रुद्रपुर।,शहर में एक ही दिन में हुई छह मौतों ने माहौल को गमगीन कर दिया। पोस्टमार्टम हाउस में दिवंगतों के परिजनों के चीत्कार और विलाप से हर आंख नम नजर आई।

अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( अध्यक्ष:उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी परिषद उत्तराखंड)

दुर्घटनाओं और संदिग्ध परिस्थितियों में हुई इन मौतों ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
हर सुख-दुख में साथ खड़े रहने वाले समाजसेवी सुशील गाबा पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे और सभी मृतकों के परिजनों को ढांढस बंधाया। उन्होंने इस दुखद घड़ी में परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की।
जानकारी के अनुसार, सचिन राठौर पुत्र रामानंद बीती रात वेंडिंग जोन से अपने घर शिवनगर वार्ड-7 लौट रहे थे। इसी दौरान सब्जी मंडी के पास उनका वाहन अचानक असंतुलित होकर गिर गया, जिससे उनकी गर्दन गंभीर रूप से कट गई और मौके पर ही उनकी मौत हो गई। हालांकि परिजनों ने इस घटना पर संदेह जताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है।
वहीं, आकाश तिवारी पुत्र सत्येंद्र कुमार का शव सिडकुल ढाल पर संदिग्ध हालत में मिला। शरीर पर चोट के निशान पाए जाने के कारण परिजन हत्या की आशंका जता रहे हैं और मामले के खुलासे की मांग कर रहे हैं।
अन्य घटनाओं में ग्राम छतरपुर निवासी परमानंद, तहसील मिलक निवासी फैजान (जो एक होटल में कार्यरत थे और छत से गिर गए), जगतपुरा निवासी मोहन सिंह तथा एक अज्ञात व्यक्ति की भी अलग-अलग हादसों में मृत्यु हो गई।
समाजसेवी सुशील गाबा ने कहा कि एक साथ इतनी बड़ी संख्या में युवाओं की मौत बेहद चिंताजनक है। उन्होंने कहा कि एक युवक की असामयिक मृत्यु पूरे परिवार को मानसिक और आर्थिक रूप से तोड़ देती है। ऐसे मामलों में जहां एक ओर युवाओं को अपनी संगति और जीवनशैली पर ध्यान देना होगा, वहीं प्रशासन को भी दुर्घटनाओं और अपराधों पर सख्ती से अंकुश लगाना होगा।
संपादकीय ,लगातार हो रही ऐसी घटनाएं केवल हादसे नहीं, बल्कि सामाजिक और प्रशासनिक विफलताओं का संकेत भी हैं। जरूरत है कि हर संदिग्ध मौत की निष्पक्ष जांच हो, ताकि सच सामने आए और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।


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