

मध्य पूर्व एक बार फिर बारूद के ढेर पर बैठा है। ईरान, इज़राइल और अमेरिका के बीच बढ़ता टकराव अब सीमित संघर्ष नहीं रहा, बल्कि यह क्षेत्रीय अस्थिरता का बड़ा संकेत बन चुका है। हालात इतने गंभीर हैं कि पूरी दुनिया की निगाहें इस युद्ध पर टिक गई हैं।
अब तक क्या हुआ?

अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( अध्यक्ष:उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी परिषद उत्तराखंड)
हालिया हमलों में इज़राइल और अमेरिका ने ईरान समर्थित ठिकानों पर जवाबी कार्रवाई की है।
ईरान की ओर से मिसाइल और ड्रोन हमले तेज हुए हैं, जिनका निशाना सैन्य ठिकाने और रणनीतिक संस्थान हैं।
तेल रिफाइनरियों और ऊर्जा ढांचे पर हमलों से वैश्विक बाजार में भी हलचल है।
हजारों लोगों की जान जा चुकी है और लाखों विस्थापित हो चुके हैं।
भारत पर असर: 8 मौतें, 1 लापता, 55 लाख की वापसी
भारत सरकार के अनुसार:
मिडिल ईस्ट में अलग-अलग घटनाओं में अब तक 8 भारतीय नागरिकों की मौत हो चुकी है।
एक भारतीय नागरिक लापता है, जिसकी तलाश जारी है।
28 फरवरी से अब तक लगभग 55 लाख भारतीय वापस लौट चुके हैं।
विदेश मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव (खाड़ी) असीम आर महाजन ने बताया कि कुवैत में एक हमले में एक भारतीय की मौत हुई है और दूतावास परिवार के संपर्क में है।
“संवाद ही समाधान” – भारत की कूटनीतिक लाइन
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने स्पष्ट किया:
भारत लगातार संयम और तनाव कम करने की अपील कर रहा है
समाधान के लिए संवाद और कूटनीति पर जोर दिया जा रहा है
इस बीच नरेंद्र मोदी ने 28 मार्च को मोहम्मद बिन सलमान से बातचीत कर:
ऊर्जा ढांचे की सुरक्षा
समुद्री व्यापार मार्गों की स्वतंत्रता
पर चिंता जताई
युद्ध की असली तस्वीर: सिर्फ तीन देश नहीं, पूरा क्षेत्र शामिल
यह संघर्ष केवल ईरान-इज़राइल तक सीमित नहीं है, बल्कि:
इराक और सीरिया में अमेरिकी ठिकानों पर हमले
हिज़्बुल्लाह (लेबनान) की सक्रियता
हूती विद्रोही द्वारा रेड सी में जहाजों पर हमले
इन सबने युद्ध को मल्टी-फ्रंट (multi-front) बना दिया है।
वैश्विक खतरे
तेल की कीमतों में उछाल
तीसरे विश्व युद्ध का खतरा
वैश्विक सप्लाई चेन पर असर
समुद्री व्यापार (Red Sea route) पर संकट
भारतीयों के लिए क्या इंतजाम?
सभी दूतावास 24×7 अलर्ट मोड पर
हेल्पलाइन और एडवाइजरी जारी
जरूरत पड़ने पर इवैक्यूएशन ऑपरेशन तैयार
मिडिल ईस्ट का यह युद्ध सिर्फ बम और मिसाइलों की लड़ाई नहीं, बल्कि कूटनीति बनाम टकराव की परीक्षा है। एक तरफ सैन्य शक्ति का प्रदर्शन है, तो दूसरी तरफ भारत जैसे देश शांति और संवाद का रास्ता सुझा रहे हैं।
हालात कब काबू में आएंगे, यह कहना मुश्किल है, लेकिन इतना तय है—अगर जल्द कूटनीति सफल नहीं हुई, तो यह संघर्ष पूरी दुनिया को अपनी चपेट में ले सकता है।




