

रुद्रपुर। शहर में ईएसआई सुविधाओं को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है। मेडिसिटी अस्पताल के पक्ष में विभिन्न औद्योगिक संस्थाओं और संगठनों द्वारा दिए गए समर्थन पत्रों पर अब सवाल उठने लगे हैं। इन पत्रों को लेकर मिलीभगत के आरोप सामने आए हैं, जिससे पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग तेज हो गई है।
प्राप्त दस्तावेजों के अनुसार, स्वास्तिक एंटरप्राइजेज, सिडकुल एंटरप्रेन्योर वेलफेयर सोसाइटी (SEWS) और सिंगला फोर्जिंग आदि जैसी कंपनियों ने ईएसआईसी से मेडिसिटी अस्पताल को पुनः पैनल में शामिल करने का अनुरोध किया है। इन पत्रों में अस्पताल की सुविधाओं और सेवाओं की सराहना करते हुए कर्मचारियों के हित में इसे जरूरी बताया गया है।
हालांकि, अब इन पत्रों की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए जा रहे हैं। आरोप है कि कुछ कंपनियों ने अपने व्यावसायिक हितों के चलते मेडिसिटी अस्पताल के पक्ष में पत्र जारी करवाए हैं। यह भी कहा जा रहा है कि अस्पताल और कुछ औद्योगिक इकाइयों के बीच कथित सांठगांठ के कारण इस तरह का दबाव बनाया जा रहा है।
सूत्रों का दावा है कि कुछ कंपनियों की दवा आपूर्ति और अन्य मेडिकल सुविधाएं सीधे तौर पर मेडिसिटी अस्पताल से जुड़ी हो सकती हैं, जिसके चलते पक्ष में माहौल बनाने की कोशिश की गई। हालांकि इन आरोपों की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
विरोध करने वाले पक्ष का कहना है कि यदि वास्तव में कर्मचारियों के हितों की बात है, तो पूरे मामले की पारदर्शी जांच होनी चाहिए। साथ ही यह भी जांच की जानी चाहिए कि कहीं कंपनियों और अस्पताल के बीच कोई आर्थिक या व्यावसायिक संबंध तो नहीं हैं।
अब यह मामला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के लिए चुनौती बनता जा रहा है। आम लोगों और कर्मचारियों की मांग है कि मेडिसिटी अस्पताल को लेकर लिए जाने वाले किसी भी निर्णय से पहले सभी तथ्यों की निष्पक्ष जांच कर सच्चाई सामने लाई जाए, ताकि ईएसआई लाभार्थियों के हितों की सही तरीके से रक्षा हो सके।

ईएसआई मरीजों ने उठाई आवाज, मेडिसिटी अस्पताल पर गंभीर लापरवाही के आरोप
रुद्रपुर। क्षेत्र के ईएसआई कार्डधारक मरीजों ने मेडिसिटी अस्पताल के खिलाफ गंभीर शिकायत दर्ज कराते हुए उपचार में लापरवाही, अव्यवस्था और मरीजों के शोषण के आरोप लगाए हैं। शिकायत में कहा गया है कि अस्पताल प्रबंधन द्वारा ईएसआई मरीजों को समय पर और समुचित इलाज नहीं दिया जा रहा, जिससे उनकी स्थिति लगातार बिगड़ रही है।
शिकायत मेडिसिटी
मरीजों का आरोप है कि मेडिसिटी अस्पताल में डॉक्टरों की उपलब्धता अनियमित रहती है और जांच व दवाइयों के नाम पर मरीजों को अनावश्यक रूप से परेशान किया जाता है। कई बार गंभीर मरीजों को भी घंटों इंतजार करना पड़ता है, जिससे स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव पड़ रहा है।
शिकायत में यह भी उजागर किया गया है कि अस्पताल में पारदर्शिता की कमी है और ईएसआई सुविधा का लाभ देने के बजाय मरीजों को निजी खर्च के लिए मजबूर किया जा रहा है। इससे गरीब और मजदूर वर्ग के मरीजों में भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है।
पीड़ितों ने प्रशासन से मांग की है कि मेडिसिटी अस्पताल की कार्यप्रणाली की उच्चस्तरीय जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में ईएसआई मरीजों को बेहतर और सम्मानजनक चिकित्सा सुविधा मिल सके।
यह मामला सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं। अब सभी की निगाहें प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हैं कि आखिर कब तक मरीजों को इस तरह की परेशानियों से निजात मिल पाएगी।
मेडिसिटी अस्पताल के पक्ष में दिए गए सभी पत्रों की भाषा और शब्दावली लगभग एक जैसी प्रतीत होती है, जिससे संदेह गहराता है कि ये पत्र एक ही स्थान या प्रभाव में तैयार किए गए हैं। इससे मिलीभगत और प्रायोजित समर्थन की आशंका को लेकर निष्पक्ष जांच की मांग उठ रही है।




