प्रदूषण कम करने और सड़कों पर सुरक्षित वाहन बनाए रखने के लिए अब फिटनेस टेस्ट और स्क्रैप पॉलिसी को गंभीरता से लागू किया जा रहा है. कई लोग सालों पुरानी कार सिर्फ इसलिए चलाते रहते हैं क्योंकि वह अभी भी स्टार्ट हो जाती है, लेकिन नए नियमों के मुताबिक सिर्फ चलना ही काफी नहीं है.
अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( अध्यक्ष:उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी परिषद उत्तराखंड)
अगर वाहन तय फिटनेस मानकों पर खरा नहीं उतरता तो उसे सड़क पर चलाने की अनुमति नहीं मिलेगी. इतना ही नहीं, नियम तोड़ने पर भारी जुर्माना भी भरना पड़ सकता है. ऐसे में पुराने वाहन मालिकों के लिए समय रहते सही फैसला लेना बेहद जरूरी हो गया है.
कब कार को स्क्रैप कराने की जरूरत पड़ती है?
सरकारी नियमों के मुताबिक 15 साल पुरानी पेट्रोल कार और 10 साल पुरानी डीजल कार को आगे चलाने के लिए फिटनेस टेस्ट पास करना जरूरी होता है. अगर वाहन टेस्ट में फेल हो जाता है तो उसे अनफिट घोषित किया जा सकता है. इसके बाद उस कार को सड़क पर चलाना गैरकानूनी माना जाएगा. कई राज्यों में ऐसे वाहनों पर सीधा चालान भी किया जा रहा है.
इतना ही नहीं, दोबारा रजिस्ट्रेशन और फिटनेस टेस्ट का खर्च भी काफी बढ़ चुका है. ऐसे में कई बार पुरानी कार को संभालने से बेहतर उसे स्क्रैप कराना ज्यादा समझदारी वाला विकल्प बन जाता है. सरकार की व्हीकल स्क्रैप पॉलिसी के तहत पुराने वाहन को अधिकृत स्क्रैप सेंटर पर जमा कर नया वाहन खरीदने पर कुछ फायदे भी मिल सकते हैं. इससे प्रदूषण कम करने में भी मदद मिलती है.
स्क्रैप कराने से क्या फायदे मिल सकते हैं?
अगर आपकी पुरानी कार बार-बार खराब हो रही है, माइलेज कम दे रही है या फिटनेस टेस्ट पास करना मुश्किल लग रहा है तो स्क्रैप कराना फायदेमंद साबित हो सकता है. आधिकारिक स्क्रैप सेंटर से मिलने वाला स्क्रैप सर्टिफिकेट नई कार खरीदते समय डिस्काउंट और टैक्स बेनिफिट दिला सकता है. इसके अलावा पुरानी कार की मेंटेनेंस लागत से भी छुटकारा मिल जाता है.
आजकल नई कारों में बेहतर सेफ्टी फीचर्स, कम प्रदूषण और ज्यादा माइलेज मिलता है, जिससे लंबे समय में खर्च कम हो सकता है. सरकार का मकसद भी यही है कि सड़क पर पुराने और ज्यादा प्रदूषण फैलाने वाले वाहन कम हों. इसलिए अगर आपकी कार तय उम्र पूरी कर चुकी है तो नियमों को नजरअंदाज करने की बजाय समय रहते सही कदम उठाना बेहतर रहेगा.
