ईरान और अमेरिका के बीच मचे घमासान के बीच जिस बात का डर डोनाल्ड ट्रंप को बरसों से था, वही होने वाला है. ईरान ने ‘परमाणु कांड’ की पूरी बिसात बिछा दी है. तेहरान ने दुनिया को सन्न करते हुए साफ चेतावनी दी है कि वो परमाणु हथियार बनाने के लिए तैयार है.

Spread the love

ईरान ने अमेरिका को आखिरी वॉर्निंग देते हुए वो कह दिया है, जो मिडिल ईस्ट में छिड़े युद्ध की जड़ है. ईरान की इस वॉर्निंग से जाहिर है कि वो जंग खत्म करने कोई जल्दबाजी में नहीं है.

अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( अध्यक्ष:उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी परिषद उत्तराखंड)

ट्रंप को ईरान की न्यूक्लियर वाली धमकी

ईरान ने ट्रंप को चेतावनी देते हुए साफ कह दिया है कि अगर उस पर अब एक भी हमला हुआ तो वो यूरेनियम को सीधा 90 परसेंट तक शुद्ध कर देगा. इसका सीधा मतलब है, परमाणु बम! अब जंग सिर्फ बयानों तक सीमित नहीं रही है, बल्कि दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण समुद्री पट्टी ‘होर्मुज’ पर भी महायुद्ध का तांडव शुरू होने के संकेत मिल रहे हैं. ईरान के इस ऐलान ने वॉशिंगटन से लेकर यरूशलम तक खलबली मचा दी है. 90 प्रतिशत शुद्धता वो आंकड़ा है जिसे ‘वेपन्स ग्रेड’ कहा जाता है.

क्या है ईरान के न्यूक्लियर इनरिचमेंट का गणित?

वैज्ञानिकों का कहना है कि यूरेनियम को 20% से 60% तक ले जाना ही सबसे कठिन होता है. एक बार जब आप 60% तक पहुंच जाते हैं, तो 90% तक पहुंचने में बस कुछ ही दिन लगते हैं. ईरान के संसदीय आयोग के प्रवक्ता इब्राहिम रजाई ने सोशल मीडिया पर बम फोड़ते हुए कहा है कि अगर हमला हुआ, तो संसद तुरंत 90% इनरिचमेंट को मंजूरी दे देगी.

ईरान के पास इस वक्त 11,000 किलोग्राम संवर्धित यूरेनियम है. इसमें से लगभग 440 किलोग्राम तो पहले ही 60% के खतरनाक लेवल पर है. सबसे बड़ी चिंता ‘इस्फहान न्यूक्लियर कॉम्प्लेक्स’ को लेकर है, जहां IAEA को शक है कि ईरान ने अपना असली खजाना छिपा रखा है. पिछले साल हुई बमबारी के बाद भी वहां की सीलें सुरक्षित हैं या नहीं, ये अब भी एक रहस्य बना हुआ है.

ट्रंप की ‘न्यूक्लियर डस्ट’ और उड़ा देने की धमकी

डोनाल्ड ट्रंप ईरान के इस खजाने को ‘न्यूक्लियर डस्ट’ कहते हैं और वो इसे मिट्टी में मिलाने की कसम खा चुके हैं. ट्रंप ने ईरान के उस प्रस्ताव को भी ठुकरा दिया है जिसमें यूरेनियम को किसी तीसरे देश भेजने की बात कही गई थी.
ट्रंप ने साफ लहजे में पत्रकारों से कहा है कि वे ईरान के ठिकानों पर पल-पल नजर रख रहे हैं और अगर किसी ने हद पार की तो वे उन ठिकानों को ‘उड़ा’ देंगे. फिलहाल सीजफायर ‘लाइफ सपोर्ट’ पर है, यानी किसी भी वक्त टूट सकता है.

बर्बादी की कगार पर खड़ा मिडिल ईस्ट

ईरान अब झुकने के मूड में नहीं दिख रहा है. पूर्व राष्ट्रपति हसन रूहानी ने भी पहले कहा था कि अगर जरूरत पड़ी तो हम 90% तक जाएंगे. अब जब ट्रंप दोबारा सत्ता में हैं और तेहरान के खिलाफ कड़ा रुख अपना रहे हैं तो ये ‘न्यूक्लियर कांड’ पूरी दुनिया को एक ऐसी जंग में झोंक सकता है जिसे रोकना किसी के बस में नहीं होगा.


Spread the love