उत्तराखंड में पाकिस्तानी जासूसों की गतिविधियां सुरक्षा एजेंसियों के लिए चिंता का विषय रही हैं। कुछ वर्षों में उत्तराखंड पुलिस व केंद्रीय एजेसियों ने ऐसे मामलों का खुलासा किया है, जोकि राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बन सकते थे।

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इन मामलों में जासूसी के विभिन्न तरीके सामने आए हैं। इनमें नकली पहचान, हनी ट्रैप, इंटरनेट मीडिया के माध्यम से संवेदनशील जानकारी एकत्र करना शामिल हैं।

24 मई 2018 को उत्तराखंड के पिथौरागढ़ में आइएसआइ एजेंट रमेश सिंह को जासूसी के आरोप में यूपी एसटीएफ ने गिरफ्तार किया था।

रमेश पर पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आइएसआइ के लिए जासूसी करने का आरोप है। रमेश ने बड़ी संख्या में गोपनीय सूचनाएं पाकिस्तान को उपलब्ध कराई थी।

इसी तरह 25 जनवरी 2019 को हरिद्वार के गंगनहर क्षेत्र में पाकिस्तानी नागरिक अबिद अली को गिरफ्तार किया गया था। उसके पास से मेरठ, देहरादून और रुड़की स्थित सैन्य संस्थानें के नक्शे, पेन ड्राइव, सिम कार्ड व अन्य गोपनीय दस्तावेज बरामद हुए थे।

इसी तरह 22 मई 2022 को हरिद्वार के रुड़की के कृष्णा नगर निवासी प्रदीप कुमार को सीआइडी इंटेलिजेंस जयपुर ने जोधपुर से गिरफ्तार किया।

आरोप है कि प्रदीप कुमार पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आइएसआइ को खुफिया जानकारी दे रहा था। भारतीय सेना की अति संवेदनशील रेजिमेंट जोधपुर में कार्यरत प्रदीप कुमार सोशल मीडिया के जरिए पाकिस्तानी महिला एजेंट से निरंतर संपर्क में आया।

प्रदीप कुमार 2019 में भारतीय सेना में भर्ती हुआ था। ट्रेनिंग के बाद प्रदीप की पहली तैनाती गनर के पद पर हुई थी।

बताया जा रहा है कि प्रदीप के मोबाइल पर पाकिस्तानी एजेंट का फोन आया। फोन करने वाली महिला ने अपना नाम रिया बताया और खुद को ग्वालियर मध्य प्रदेश की रहने वाली बताते हुए वर्तमान में बेंगलुरु में मिलिट्री नर्सिंग सर्विसेज में पदस्थापित होना बताया।

आतंकी संगठनों के सदस्यों ने ली देहरादून में पनाह

वर्ष 2022 में कश्मीर में सुरक्षा बलों के हाथों मारे गए आतंकवादी इदरीश अहमद का कनेक्शन देहरादून से रहा। इदरीश ने 2017 से 2021 तक देहरादून के सेलाकुई स्थित एक कालेज से होटल मैनेजमेंट की बैचलर डिग्री ली थी।

उसके बैच में 60 छात्र थे, लेकिन इनमें कुछ ऐसे थे, जिनके आतंकवादी इदरीश अहमद से करीबी संबंध थे। वर्ष 2021 में उसने सेलाकुई स्थित एक शिक्षण संस्थान से होटल मैनेजमेंट में स्नातक किया था। इसके बाद वह कश्मीर चला गया।

नाभा जेल ब्रेक का आरोपित भी देहरादून में छिपा रहा

साल 2014 में पंजाब की नाभा जेल से आतंकियों को फरार कराने वाला मुख्य आरोपित परमिंदर उर्फ पम्मा का ठिकाना भी देहरादून था।

उसने देहरादून के रायपुर थाना क्षेत्र में भवन किराये पर लिया था, जहां पर कई लोग रहे थे। पंजाब पुलिस की इनपुट पर देहरादून पुलिस ने उसे देहरादून से गिरफ्तार किया था।

इससे पहले 2012 में यूपी पुलिस से बचने के लिए कुख्यात अमित उर्फ भूरा ने उत्तराखंड में शरण ली थी। उत्तराखंड पुलिस को जैसे ही अमित के बारे में पता चला और उसके नेटवर्क को तोड़ने की प्रयास किया तो अमित ने पंजाब (पटियाला) में शरण ले ली।

वर्ष 2024 में गिरफ्तार हुआ था आइएस एजेंट

मार्च 2024 को आतंकी संगठन आइएस (इस्लामिक स्टेट) के इंडिया चीफ देहरादून निवासी हारिस फारुकी को केंद्रीय जांच एजेंसी (एनआइए) की टीम ने पुणे महाराष्ट्र से गिरफ्तार किया था।

देहरादून के शहर कोतवाली क्षेत्र स्थित लक्खीबाग निवासी हारिस फारुकी (मूल निवासी-प्रतापनगर, उत्तर प्रदेश) लंबे समय से आतंकी गतिविधियों में संलिप्त था। वह स्कूली शिक्षा के बाद अलीगढ़ चला गया और वहीं उच्च शिक्षा प्राप्त कर ट्यूशन देने लगा।


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