अमेरिका और ईरान के बीच शनिवार को इस्लामाबाद में 21 घंटे तक आमने-सामने चली वार्ता बेनतीजा खत्म हो गई। इससे दो सप्ताह के नाजुक संघर्षविराम पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं, जिसकी अवधि 22 अप्रैल को समाप्त हो रही है।

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अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, वार्ता इसलिए विफल हुई क्योंकि ईरान परमाणु हथियारों की दिशा में आगे न बढ़ने की स्पष्ट प्रतिबद्धता देने को तैयार नहीं हुआ। वहीं ईरान ने वार्ता टूटने के लिए अमेरिका की बेवजह की मांगों को जिम्मेदार ठहराया। वार्ता विफल होने से खिन्न अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने नौसेना को होर्मुज जलडमरूमध्य में नाकेबंदी शुरू करने का आदेश दिया है।

ट्रंप ने दुनियाभर के देशों को दी धमकी

ट्रंप ने दुनिया भर के देशों को चेतावनी दी है कि जो भी देश होर्मुज स्ट्रेट पार करने के लिए ईरान को टोल देगा उसके जहाज को आगे नहीं जाने दिया जाएगा। उधर, वार्ता की विफलता को लेकर दोनों पक्षों ने एक दूसरे को जिम्मेदार ठहराया। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा कि अमेरिका को यह सुनिश्चित करना है कि ईरान न तो परमाणु हथियार बनाए और न ही ऐसी क्षमता विकसित करे।

बातचीत असफल होने पर क्या बोला पाकिस्तान?

दूसरी ओर, ईरान के संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकर गलीबाफ ने कहा कि अब अमेरिका को यह तय करना होगा कि वह ईरान का विश्वास जीत सकता है या नहीं। बातचीत में मध्यस्थ बने पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने कहा कि उनका देश दोनों पक्षों के बीच नई वार्ता कराने की कोशिश करेगा और संघर्षविराम बनाए रखना जरूरी है।

क्या था बातचीत का प्रस्ताव?

वार्ता में दोनों पक्ष अलग-अलग प्रस्तावों के साथ पहुंचे थे। ईरान ने 10-सूत्रीय प्रस्ताव में युद्ध समाप्त करने और होर्मुज पर नियंत्रण की मांग की थी, जबकि अमेरिका के 15-सूत्रीय प्रस्ताव में ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर निगरानी और उसे सीमित करने के प्रविधान शामिल थे।

बता दें कि अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच लगभग 40 दिनों के भीषण सैन्य संघर्ष के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने सात अप्रैल को दो सप्ताह के युद्धविराम की घोषणा की थी। इसके बाद पाकिस्तान की मध्यस्थता में शनिवार से दोनों पक्षों के बीच शांति समझौते के लिए इस्लामाबाद के सेरेना होटल में बातचीत शुरू हुई थी।

नहीं हो सका अंतिम समझौता

21 घंटे तक तीन दौर की वार्ता स्थानीय समय अनुसार सुबह छह बजे तक चली। हालांकि, किसी ठोस नतीजे पर न पहुंचने के चलते बातचीत बंद कर दी गई। रायटर के अनुसार, बातचीत में अमेरिकी पक्ष का नेतृत्व कर रहे उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने वार्ता के बाद मीडिया से बातचीत में कहा कि दोनों पक्षों के बीच कुछ मुद्दों पर सहमति बनी, लेकिन अंतिम समझौता नहीं हो सका।

क्या चाहता था अमेरिका?

वेंस ने कहा कि यह स्थिति ईरान के लिए ज्यादा खराब है और अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल बिना समझौते के लौट रहा है। उन्होंने बताया कि अमेरिका ने अपनी रेड लाइन स्पष्ट कर दी थीं और जिन मुद्दों पर लचीलापन संभव था, वह भी दिखाया गया, लेकिन ईरान ने अमेरिकी शर्तों को स्वीकार नहीं किया।

उन्होंने दोहराया कि हम चाहते थे कि तेहरान परमाणु हथियार न बनाने और उससे जुड़ी क्षमताएं विकसित न करने की ठोस प्रतिबद्धता दे। वेंस के अनुसार, अमेरिका ने “अंतिम और सर्वोत्तम प्रस्ताव” दिया है, अब देखना है कि ईरान उसे स्वीकार करता है या नहीं।

ईरान ने अमेरिका को ठहराया जिम्मेदार

रायटर के अनुसार, ईरान के मुख्य वार्ताकार और संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकर गलीबाफ ने वार्ता की विफलता के लिए अमेरिका को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने कहा कि 21 घंटे की बातचीत के दौरान ईरान ने दूरदर्शी प्रस्ताव पेश किए, लेकिन अमेरिका भरोसा जीतने में असफल रहा। उन्होंने विस्तृत जानकारी नहीं दी, लेकिन ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार, परमाणु कार्यक्रम और होर्मुज जलडमरूमध्य पर अधिकार की गारंटी असहमति के मुख्य मुद्दे थे।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने बताया कि कुछ मुद्दों पर समझ बनी, लेकिन दो-तीन अहम विषयों पर मतभेद कायम रहे। उन्होंने कहा कि 40 दिन के युद्ध के बाद अविश्वास के माहौल में तुरंत समझौते की उम्मीद नहीं थी। ईरानी सूत्रों के अनुसार, अब गेंद अमेरिका के पाले में है और ईरान किसी जल्दबाजी में नहीं है।

ट्रंप बोले, ईरान से हुई अच्छी बातचीत

न्यूयार्क टाइम्स के अनुसार, ट्रंप ने बताया कि इस्लामाबाद में हुई ईरान से वार्ता के बारे में उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने उन्हें सारी जानकारी दे दी है। उन्होंने कहा कि बातचीत काफी अच्छी रही, ज्यादातर मुद्दों पर सहमति बनी, लेकिन केवल एक ही मुद्दा, जो कि परमाणु कार्यक्रम से जुड़ा था, उस पर बात नहीं बन सकी है।

अमेरिकी राष्ट्रपति ने ये भी कहा कि ईरानी नेतृत्व के साथ जिन बिंदुओं पर सहमति बनी, वे सैन्य अभियानों को अंत तक जारी रखने से बेहतर थे। ट्रंप ने कहा कि परमाणु ऊर्जा को ऐसे अस्थिर, कठिन और अप्रत्याशित लोगों के हाथों में सौंपने की तुलना में ये सभी बातें कोई मायने नहीं रखतीं।

उन्होंने कहा कि ईरान को कभी भी परमाणु हथियार की अनुमति नहीं दी जाएगी। हम ईरान से निपटने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं। उन्होंने दावा किया कि अमेरिकी सेना ईरान में बचाखुचा काम तेजी से निपटा सकती है। अमेरिका उचित समय पर कार्रवाई के लिए तैयार है।

इसके साथ ही ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी नौसेना होर्मुज जलमार्ग से ईरान को टोल देकर गुजरनेवाले जहाजों को आगे बढ़ने की अनुमति नहीं देगी। इस काम में कई और देश भी हमारी मदद करेंगे।

क्या चाहता है ईरान?

बता दें कि अमेरिका के साथ समझौते की शर्तों में ईरान होर्मुज जलमार्ग पर न केवल अपने अधिकार की गारंटी चाहता है, बल्कि वहां से गुजरनेवाले व्यापारिक जहाजों पर शुल्क लगाने की भी बात कह रहा है।

ट्रंप ने कहा कि नौसेना को निर्देश दिया गया है कि अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में उन सभी जहाजों को रोका जाए, जो ईरान को “अवैध टोल” देकर गुजरते हैं। जो भी जहाज जो ऐसा करेगा उसे सुरक्षित रास्ता नहीं मिलेगा। ट्रंप ने कहा कि ईरान ने होर्मुज जलमार्ग को खोलने का वादा किया था, लेकिन उसे पूरा नहीं किया।

रातभर ऐसे चली तीन दौर की वार्ता

पीटीआई के अनुसार, इससे पहले इस्लामाबाद में दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडल ने पीएम शहबाज शरीफ से मुलाकात की थी। पहले पाकिस्तानी पक्ष ने दोनों दलों के साथ अलग-अलग बैठक की और एक दूसरे के संदेश का आदान प्रदान किया।

बातचीत के हर स्तर पर पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल भी शामिल रहा। इसमें विदेश मंत्री इशाक डार, सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर और गृह मंत्री मोहसिन रजा नकवी शामिल थे।

संदेशों के आदान-प्रदान के बाद दोनों पक्षों के बीच पहले दौर की आमने-सामने की वार्ता शुरू हुई, जो करीब ढाई घंटे चली। अगले चरण में, एक घंटे का विराम लिया गया और दोनों पक्षों द्वारा प्रस्तुत मांगों के तकनीकी पहलुओं पर विशेषज्ञ स्तर पर चर्चा की गई। तकनीकी पहलुओं पर संदेशों का आदान-प्रदान देर रात तक जारी रहा।

हालांकि, रविवार सुबह तक यह स्पष्ट हो गया कि मतभेदों को दूर नहीं किया जा सकता, जिसके चलते अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वैंस ने एक संक्षिप्त प्रेस कान्फ्रेंस में घोषणा की कि वार्ता बिना किसी समझौते के समाप्त हो गई।

सूत्रों ने बताया कि पाकिस्तान को वार्ता के और दौरों की उम्मीद बनी हुई है, हालांकि अब तक कोई तारीख या स्थान तय नहीं किया गया है। पाकिस्तानी सरकार ने पहले कहा था कि वह मध्यस्थ की भूमिका निभाती रहेगी और आशा व्यक्त की थी कि वार्ता विवाद को सुलझाने की दिशा में एक कदम साबित होगी।

लेबनान पर हमले, छह की मौत लेबनान में हालात और बिगड़ते दिख रहे हैं। संघर्षविराम के बावजूद इजरायल ने हिजबुल्ला के ठिकानों पर हमले जारी रखे हैं। लेबनान की सरकारी एजेंसी के अनुसार, रविवार को दक्षिणी शहर टायर के पास एक हमले में छह लोगों की मौत हो गई।


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