

गदरपुर की कुंज विहार कॉलोनी से मानवता, संवेदना और समाज सेवा का एक प्रेरणादायक उदाहरण सामने आया है। स्वर्गीय श्रीमती ऊषा अनेजा के निधन के बाद उनके परिवार ने दुख की इस घड़ी को समाज के लिए प्रेरणा में बदलते हुए नेत्रदान का निर्णय लिया। उनके पुत्र अंकुश अनेजा द्वारा दी गई सहमति के बाद अब स्वर्गीय ऊषा अनेजा की आंखें दो जरूरतमंद लोगों के जीवन में उजाला करेंगी।

अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( अध्यक्ष:उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी परिषद उत्तराखंड)
रमेश लाल अनेजा की धर्मपत्नी स्वर्गीय ऊषा अनेजा के देहावसान के पश्चात महाराजा अग्रसेन ग्लोबल चैरिटेबल ट्रस्ट के चेयरमैन एस.के. मित्तल की उपस्थिति में सी.आर. मित्तल नेत्रदान केंद्र की टीम ने पूरी प्रक्रिया को सफलतापूर्वक सम्पन्न कराया। मेडिकल डायरेक्टर डॉ. एल.एम. उप्रेती के निर्देशन में आई टेक्नीशियन मनीष रावत ने आवश्यक कागजी औपचारिकताएं पूर्ण कर नेत्रदान की प्रक्रिया संपन्न की।
इस नेक कार्य को सफल बनाने में सोचो डिफरेंट संस्था के संदीप चावला और विकास भुसरी की विशेष भूमिका रही, जिनके प्रयासों से परिवार को नेत्रदान के प्रति प्रेरित किया गया। समाज सेवा के क्षेत्र में लगातार सक्रिय एस.के. मित्तल की इस पहल की क्षेत्रभर में सराहना हो रही है। लोगों का कहना है कि मित्तल लंबे समय से जनसेवा और मानव कल्याण के कार्यों में अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं और उनके प्रयासों से कई परिवारों को नई उम्मीद मिली है।
इस दौरान आशीष अनेजा, रॉबिन फुटेला, नवीन खेड़ा, कपिल गेंदा, पंकज सेतिया, राहुल अनेजा, राजकुमार अनेजा और सचिन चावला सहित कई गणमान्य लोग मौजूद रहे।
महाराजा अग्रसेन ग्लोबल चैरिटेबल ट्रस्ट के ट्रस्टियों ने अनेजा परिवार के इस फैसले को समाज के लिए प्रेरणादायक बताते हुए कहा कि नेत्रदान वास्तव में महादान है, क्योंकि यह मृत्यु के बाद भी किसी के जीवन में प्रकाश भरने का माध्यम बनता है। साथ ही भारत विकास परिषद, सोचो डिफरेंट संस्था और अन्य स्वयंसेवी संगठनों के योगदान की भी सराहना की गई।
यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि इंसान अपने अच्छे कर्मों से हमेशा जीवित रहता है। स्वर्गीय ऊषा अनेजा भले ही इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनकी आंखों से अब दो नई जिंदगियां रोशनी देख सकेंगी।




