

सलीम डोला को डी-कंपनी (D-Company) के ड्रग सिंडिकेट का सरगना माना जाता है।

इस्तांबुल के पॉश इलाके में आधी रात को छापा
अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( अध्यक्ष:उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी परिषद उत्तराखंड)
सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, सलीम डोला लंबे समय से अपनी पहचान बदलकर तुर्की में छिपा हुआ था। वह संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के फर्जी पासपोर्ट का इस्तेमाल कर रहा था। तुर्की की नेशनल इंटेलिजेंस ऑर्गनाइजेशन (MIT) ने तकनीकी निगरानी के जरिए उसके ठिकाने का सटीक पता लगाया। इस्तांबुल के बेलिकडूजू इलाके में एक फ्लैट पर बेहद गोपनीय तरीके से छापेमारी की गई। स्थानीय सुरक्षा एजेंसियों ने पहले पूरे इलाके की घेराबंदी की और फिर अचानक धावा बोलकर डोला को पकड़ लिया।
दाऊद इब्राहिम का ‘ड्रग मैनेजर’
बता दें कि सलीम डोला का ड्रग नेटवर्क भारत सहित कई देशों में फैला हुआ है। वह दाऊद इब्राहिम गैंग के लिए वैश्विक सप्लाई चेन को मैनेज करने में अहम भूमिका निभा रहा था। वह मेफेड्रोन (MD) जैसी खतरनाक सिंथेटिक ड्रग्स की तस्करी का मास्टरमाइंड माना जाता है। उसका नेटवर्क न केवल भारत और खाड़ी देशों में, बल्कि तुर्की और यूरोप तक फैला हुआ था। भारत में नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) ने उस पर 1 लाख रुपये का इनाम रखा था और इंटरपोल ने उसके खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया था।
भारत लाने की तैयारी और बड़े खुलासे की उम्मीद
सलीम डोला की गिरफ्तारी भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक बड़ी जीत है। उसके पास से बरामद फर्जी दस्तावेजों और यूएई पासपोर्ट की भी जांच की जा रही है। भारतीय एजेंसियां अब तुर्की के अधिकारियों के साथ निरंतर संपर्क में हैं ताकि उसके प्रत्यर्पण (Extradition) की कानूनी प्रक्रिया को तेज किया जा सके। विशेषज्ञों का मानना है कि डोला से पूछताछ के बाद अंडरवर्ल्ड के अंतरराष्ट्रीय ड्रग सिंडिकेट और नार्को-टेररिज्म से जुड़े कई चौंकाने वाले खुलासे हो सकते हैं।




