

चांद कब दिखेगा और क्यों है इसका महत्व

पूर्णिमा का असली आकर्षण चंद्रमा होता है. 30 अप्रैल की रात से ही पूर्णिमा का चांद नजर आने लगेगा, लेकिन 1 मई की रात को यह अपने पूर्ण रूप में होगा. दिल्ली-एनसीआर में चांद निकलने का संभावित समय शाम लगभग 6:40- 7:10 के बीच होगा. आम तौर पर पूर्णिमा के दिन चांद सूर्यास्त के आसपास ही निकलता है, इसलिए यह टाइम विंडो सबसे करीब माना जाता है. धार्मिक मान्यता है कि इस दिन चंद्रमा की ऊर्जा मानसिक शांति और सकारात्मकता बढ़ाती है. यही कारण है कि लोग चंद्रमा को जल अर्पित करते हैं और ध्यान करते हैं.
अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( अध्यक्ष:उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी परिषद उत्तराखंड)
शुभ समय जो आपके दिन को बना सकते हैं खास
अगर आप इस दिन पूजा या स्नान करना चाहते हैं, तो समय का ध्यान रखना जरूरी है. सुबह ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करना सबसे शुभ माना गया है. दोपहर का अभिजीत मुहूर्त विशेष पूजा के लिए अच्छा समय है, जबकि शाम का अमृत काल ध्यान और प्रार्थना के लिए उपयुक्त होता है. इन समयों का पालन करने से व्यक्ति को मानसिक संतुलन और सकारात्मक ऊर्जा मिलती है.
क्यों खास है यह दिन सिर्फ पूजा से भी ज्यादा?
बुद्ध पूर्णिमा को त्रि-योग दिन भी कहा जाता है, क्योंकि इसी दिन भगवान बुद्ध का जन्म, ज्ञान प्राप्ति और महापरिनिर्वाण हुआ था. हिंदू मान्यताओं में उन्हें भगवान विष्णु का अवतार भी माना जाता है. इसलिए यह दिन सिर्फ धार्मिक नहीं, बल्कि जीवन में संतुलन, करुणा और शांति का संदेश देने वाला भी है.
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग मानसिक तनाव और असंतुलन से जूझ रहे हैं. ऐसे में बुद्ध पूर्णिमा सिर्फ एक त्योहार नहीं, बल्कि ‘पॉज बटन’ की तरह काम कर सकती है. इस दिन कुछ समय ध्यान, शांति और आत्मचिंतन में बिताना मानसिक स्वास्थ्य के लिए बेहद फायदेमंद हो सकता है.
सरल उपाय जो बदल सकते हैं आपका दिन
इस दिन छोटे-छोटे काम भी बड़ा असर डाल सकते हैं.अश्वत्थ वृक्ष की पूजा, चंद्रमा को जल अर्पित करना, सफेद वस्तुओं का दान और सत्यनारायण कथा, ये सब पारंपरिक उपाय हैं जो सकारात्मकता बढ़ाते हैं. इनका मकसद सिर्फ धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि मन को शांत और संतुलित करना है.
भद्रा को लेकर भ्रम दूर करें
1 मई की सुबह कुछ समय के लिए भद्रा का प्रभाव रहेगा, लेकिन ज्योतिषीय गणना के अनुसार इसका पृथ्वी पर विशेष असर नहीं माना जा रहा है. इसलिए बिना किसी डर के आप अपने सभी शुभ कार्य कर सकते हैं.
दिलचस्प बात यह है कि अब कई लोग बुद्ध पूर्णिमा को ‘माइंडफुलनेस डे’ की तरह मनाने लगे हैं, जहां पूजा के साथ-साथ डिजिटल डिटॉक्स और मेडिटेशन पर भी ध्यान दिया जाता है.✧ धार्मिक और अध्यात्मिक




