

शिलांग/मेघालय। बहुचर्चित हनीमून मर्डर केस में बड़ा मोड़ सामने आया है, जहां आरोपी सोनम रघुवंशी को अदालत ने जमानत दे दी है। यह फैसला कानूनी प्रक्रिया में हुई गंभीर त्रुटियों के चलते आया है, जिसने पूरे मामले की जांच पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( अध्यक्ष:उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी परिषद उत्तराखंड)
जानकारी के अनुसार, पूर्वी खासी हिल्स जिला अदालत ने पाया कि गिरफ्तारी से जुड़े दस्तावेजों में गंभीर लापरवाही बरती गई। सबसे अहम बात यह रही कि FIR में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 403(1) का उल्लेख किया गया, जबकि इस नई संहिता में ऐसी कोई धारा मौजूद ही नहीं है।
अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट कहा कि आरोपी को सही धाराओं के तहत गिरफ्तारी की जानकारी देना अनिवार्य है, लेकिन सोनम के मामले में ऐसा नहीं किया गया। न तो गिरफ्तारी मेमो, न ही केस डायरी या अन्य दस्तावेजों में यह स्पष्ट किया गया कि उसे BNS की धारा 103(1) के तहत गिरफ्तार किया गया है।
कोर्ट ने यह भी पाया कि गिरफ्तारी से जुड़े चेकलिस्ट फॉर्म अधूरे थे और किसी भी बॉक्स पर टिक नहीं किया गया था, जिससे आरोपों की स्पष्ट जानकारी नहीं मिल सकी। इसके अलावा, रिकॉर्ड में यह भी नहीं पाया गया कि पहली पेशी के दौरान आरोपी के पास कोई वकील मौजूद था।
इन सभी प्रक्रियात्मक खामियों को गंभीर मानते हुए अदालत ने सोनम रघुवंशी को जमानत दे दी। हालांकि, इस फैसले के बाद पुलिस की कार्यप्रणाली और जांच की पारदर्शिता पर कई सवाल खड़े हो गए हैं।
यह मामला अब सिर्फ एक हत्या का नहीं, बल्कि न्यायिक प्रक्रिया में लापरवाही और कानून के पालन पर भी बहस का केंद्र बन गया है।




