रुद्रपुर उत्तराखंड,नई दिल्ली, 15 जून: ओमान के तट के निकट इंजन फेल होने के बाद समुद्र में संकट में फंसे भारतीय ध्वज वाले जहाज एमएसवी विराट-1 (MSV Virat-1) के सभी 14 चालक दल सदस्यों को सफलतापूर्वक बचा लिया गया है। ओमान स्थित भारतीय दूतावास ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि चालक दल के सभी सदस्य सुरक्षित हैं, उनका स्वास्थ्य पूरी तरह ठीक है और उन्हें एक अन्य जहाज के माध्यम से मुंबई भेजा जा रहा है।
अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( अध्यक्ष:उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी परिषद उत्तराखंड।
भारतीय दूतावास ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर जानकारी साझा करते हुए कहा कि भारतीय झंडे वाले जहाज एमएसवी विराट-1 के लिए चलाया गया बचाव अभियान सफलतापूर्वक पूरा हो गया है। दूतावास के अनुसार सभी 14 चालक दल सदस्य बचा लिए गए हैं और वर्तमान में वे ‘जबल अली-9’ नामक जहाज पर सवार होकर मुंबई की ओर रवाना हो चुके हैं। दूतावास ने यह भी स्पष्ट किया कि सभी नाविक सुरक्षित हैं और किसी को गंभीर चोट नहीं आई है।
इंजन में खराबी के बाद पैदा हुआ संकट
जानकारी के अनुसार यह घटना उस समय हुई जब भारतीय ध्वज वाला मालवाहक जहाज ओमान के तट के निकट समुद्री मार्ग से गुजर रहा था। अचानक जहाज के इंजन में तकनीकी खराबी आ गई, जिसके कारण जहाज नियंत्रण खो बैठा। स्थिति बिगड़ने पर चालक दल को आपातकालीन सुरक्षा उपायों के तहत लाइफ राफ्ट में स्थानांतरित किया गया।
भारतीय दूतावास ने रविवार को बताया था कि जहाज में आई तकनीकी खराबी के बाद चालक दल को सुरक्षित निकालने के प्रयास शुरू कर दिए गए थे। ओमान के समुद्री और तटरक्षक अधिकारियों के सहयोग से बड़े पैमाने पर बचाव अभियान चलाया गया। आसपास मौजूद कई जहाजों को भी सहायता के लिए अलर्ट किया गया था।
समुद्र में मौसम और परिस्थितियों को देखते हुए बचाव अभियान चुनौतीपूर्ण माना जा रहा था, लेकिन विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय के चलते सभी नाविकों को सुरक्षित निकाल लिया गया।
पहले 11, फिर सभी 14 सदस्य बचाए गए
बचाव अभियान के दौरान भारतीय दूतावास ने चरणबद्ध जानकारी साझा की। शुरुआती अपडेट में बताया गया था कि 14 में से 11 चालक दल सदस्यों को सुरक्षित निकालकर ‘जबल अली-9’ जहाज पर पहुंचा दिया गया है। शेष तीन सदस्यों की तलाश और बचाव कार्य जारी था।
कुछ समय बाद दूतावास ने पुष्टि की कि बचाव अभियान पूरी तरह सफल रहा और बाकी तीन सदस्यों को भी सुरक्षित निकाल लिया गया। इसके साथ ही सभी 14 भारतीय नाविक सुरक्षित बचा लिए गए।
दूतावास ने कहा कि समुद्र में चलाए गए इस समन्वित अभियान में कई एजेंसियों और जहाजों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिसके कारण किसी भी प्रकार की जनहानि नहीं हुई।
अमेरिकी नौसेना का दावा, बचाव अभियान में निभाई भूमिका
इस बीच अमेरिका की ओर से भी दावा किया गया है कि मध्य पूर्व क्षेत्र में तैनात अमेरिकी नौसैनिक बलों ने भारतीय नाविकों को बचाने में महत्वपूर्ण सहयोग दिया।
अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार जैसे ही भारतीय जहाज के संकट की सूचना मिली, अमेरिकी नौसेना ने भारतीय नौसेना तथा क्षेत्र से गुजर रहे एक व्यापारी जहाज के साथ मिलकर संयुक्त बचाव अभियान शुरू किया। अधिकारियों ने बताया कि समय रहते चालक दल को लाइफ राफ्ट में सुरक्षित पहुंचा दिया गया और बाद में उन्हें रेस्क्यू कर लिया गया।
अमेरिकी नौसेना ने कहा कि समुद्र में किसी भी आपात स्थिति में अंतरराष्ट्रीय सहयोग महत्वपूर्ण होता है और इस अभियान में विभिन्न पक्षों के बीच बेहतर समन्वय देखने को मिला।
खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच हुई घटना
यह घटना ऐसे समय हुई है जब खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा स्थिति को लेकर चिंता बनी हुई है। समुद्री मार्गों पर बढ़ते तनाव और सैन्य गतिविधियों के कारण अंतरराष्ट्रीय जहाजरानी पर भी असर पड़ रहा है।
पिछले सप्ताह भी ओमान तट के निकट एक गंभीर घटना सामने आई थी, जब क्षेत्र में भारतीय चालक दल के सदस्यों वाले तीन जहाज कथित रूप से अमेरिकी सैन्य कार्रवाई की चपेट में आ गए थे। उस घटना में तीन भारतीय नाविकों की मौत हो गई थी, जबकि कई अन्य प्रभावित हुए थे।
उस घटना ने भारत में व्यापक चिंता पैदा कर दी थी और समुद्री सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए थे। विशेषज्ञों का मानना है कि खाड़ी क्षेत्र में जारी तनाव का सीधा असर वैश्विक समुद्री व्यापार और अंतरराष्ट्रीय नौवहन मार्गों पर पड़ सकता है।
भारत ने जताई थी कड़ी आपत्ति
पिछले सप्ताह हुई घटना के बाद भारत सरकार ने कड़ा रुख अपनाया था। भारत ने नई दिल्ली स्थित अमेरिकी दूतावास के प्रभारी अधिकारी जेसन मीक्स को तलब कर अपना विरोध दर्ज कराया था।
भारतीय पक्ष ने स्पष्ट रूप से कहा था कि ओमान तट के निकट भारतीय चालक दल वाले जहाजों पर अमेरिकी सेना के घातक हमले अस्वीकार्य हैं। भारत ने यह भी कहा कि इस प्रकार की सैन्य कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार की सुरक्षा और स्थिरता को कमजोर करती है।
विदेश मंत्रालय ने जोर देकर कहा था कि समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करना सभी देशों की साझा जिम्मेदारी है और निर्दोष नागरिक नाविकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।
समुद्री सुरक्षा पर फिर उठे सवाल
एमएसवी विराट-1 की घटना ने एक बार फिर समुद्री सुरक्षा और आपातकालीन बचाव व्यवस्थाओं की अहमियत को उजागर कर दिया है। विशेषज्ञों का कहना है कि समुद्री परिवहन क्षेत्र में तकनीकी खराबियों और क्षेत्रीय तनावों के बीच चालक दल की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए मजबूत अंतरराष्ट्रीय समन्वय आवश्यक है।
हालांकि इस मामले में सभी 14 भारतीय नाविकों को सुरक्षित बचा लिया गया, लेकिन हाल के दिनों में खाड़ी क्षेत्र में सामने आई घटनाओं ने यह संकेत दिया है कि समुद्री मार्गों पर जोखिम बढ़ रहे हैं। ऐसे में जहाजों की तकनीकी निगरानी, आपातकालीन तैयारियों और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को और मजबूत करने की आवश्यकता है।
फिलहाल राहत की बात यह है कि एमएसवी विराट-1 के सभी चालक दल सदस्य सुरक्षित हैं और उन्हें भारत वापस लाया जा रहा है। भारतीय दूतावास, ओमान के अधिकारियों और बचाव अभियान में शामिल सभी एजेंसियों की त्वरित कार्रवाई के कारण एक संभावित बड़ी समुद्री दुर्घटना में जनहानि टल गई।
नोट: आपने जो सामग्री दी है, उसमें “अमेरिकी हमले” और “तीन नाविकों की मौत” संबंधी दावे अत्यंत गंभीर हैं। यदि यह खबर प्रकाशन हेतु है, तो इन दावों का स्वतंत्र सत्यापन विश्वसनीय स्रोतों से अवश्य कर लें, क्योंकि ऐसे दावे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संवेदनशील होते हैं।
