ममता बनर्जी ने चुनाव परिणामों को लेकर आरोप लगाया कि मतगणना में बड़े पैमाने पर धांधली हुई और करीब 100 सीटों पर जनादेश को प्रभावित किया गया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि वह इस्तीफा नहीं देंगी, क्योंकि उन्हें जनमत से नहीं, बल्कि साजिश के तहत हराया गया है।

अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( अध्यक्ष:उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी परिषद उत्तराखंड)
‘बन सकता है खतरनाक उदाहरण’
भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा ने प्रतिक्रिया में कहा कि ममता का रुख “हास्यास्पद और चिंताजनक” है। उन्होंने कहा कि भारत की पहचान शांतिपूर्ण सत्ता हस्तांतरण की लोकतांत्रिक परंपरा रही है, लेकिन ममता का कदम इस परंपरा पर हमला है।
पात्रा ने केरल और तमिलनाडु का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां नेताओं ने संवैधानिक प्रक्रिया का पालन करते हुए इस्तीफा दिया। उन्होंने कहा कि ममता का ये रुख खतरनाक उदाहरण बन सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि लोकतंत्र में कोई व्यक्ति अपरिहार्य नहीं होता और जनता की इच्छा सर्वोपरि होती है।
‘क्या संविधान उनसे ऊपर है?’
पात्रा के अनुसार, ममता का रवैया ऐसा प्रतीत होता है मानो संविधान उनसे शुरू होकर उन्हीं पर खत्म होता है। उन्होंने कहा कि केरल में पिनराई विजयन हों या तमिलनाडु में एमके स्टालिन, सभी ने शांति से राजभवन जाकर अपना इस्तीफा सौंप दिया।
भाजपा के एक अन्य प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने भी ममता पर निशाना साधते हुए कहा कि वह संवैधानिक व्यवस्था को कमजोर करने की कोशिश कर रही हैं। उन्होंने इसे गैर-संवैधानिक और अंबेडकरवादी मूल्यों के खिलाफ बताते हुए कहा कि यह सत्ता के शांतिपूर्ण हस्तांतरण की अवधारणा को चुनौती देता है।
पूनावाला ने यह भी कहा कि भले ही ममता इस्तीफा न दें, लेकिन 8 मई को विधानसभा भंग होने के साथ उनकी सदस्यता स्वत: समाप्त हो जाएगी।
इसके साथ ही बंगाल में चुनाव चक्र आधिकारिक रूप से समाप्त हो गया है और नई सरकार बनाने की कानूनी प्रक्रिया शुरू हो गई है. हालांकि, निवर्तमान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अपनी हार को ‘साजिश’ करार देते हुए पद छोड़ने से इनकार कर दिया है. चुनाव आयोग के अधिकारियों के अनुसार, राज्यपाल को अधिसूचना भेज दी गई है. यह एक महत्वपूर्ण संवैधानिक कदम है जो नई सरकार के शपथ ग्रहण का मार्ग प्रशस्त करता है.
चुनाव आयोग का कड़ा रुख: ‘चुनाव निष्पक्ष हुए’
चुनाव आयोग ने ममता बनर्जी के धांधली के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि पूरी चुनावी प्रक्रिया मतदान से लेकर मतगणना तक पूरी तरह स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी रही है. आयोग ने चुनाव के संचालन के दौरान सभी मानदंडों का पालन सुनिश्चित किया. आयोग की अधिसूचना ऐसे समय में आई है जब ममता बनर्जी ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने से इनकार कर दिया है और संवैधानिक पदाधिकारी को कार्रवाई करने की चुनौती दी है.
ममता का पलटवार: ‘जनादेश की लूट हुई’
दूसरी ओर, टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बेहद तीखे तेवर दिखाए. भाजपा द्वारा 207 सीटें जीतकर टीएमसी के 15 साल के शासन को खत्म करने के बाद, ममता ने आरोप लगाया कि करीब 100 सीटों पर नतीजों के साथ छेड़छाड़ की गई है. उन्होंने कहा, “मेरे इस्तीफे का सवाल ही नहीं उठता. यह हार जनता का फैसला नहीं बल्कि एक बड़ी साजिश है. हमारी पार्टी का मनोबल गिराने के लिए जानबूझकर मतगणना की रफ्तार धीमी की गई. मैं राजभवन नहीं जाऊंगी, वे चाहें तो संवैधानिक कार्रवाई कर सकते हैं.”
सड़कों पर संग्राम की तैयारी
71 वर्षीय ममता बनर्जी ने साफ कर दिया है कि वह हार मानकर घर बैठने वाली नहीं हैं. उन्होंने इस “चोरी हुए चुनाव” के खिलाफ सड़कों पर उतरकर आंदोलन करने की कसम खाई है. ममता अब विपक्षी ‘इंडिया’ ब्लॉक को और मजबूत करने पर ध्यान देंगी. बंगाल की 294 सीटों वाली विधानसभा में भाजपा की बड़ी जीत के बाद अब सबकी नजरें राजभवन पर टिकी हैं. क्या अधिसूचना के बाद संवैधानिक पदाधिकारी ममता बनर्जी के खिलाफ कोई कड़ा कदम उठाएंगे? यह देखना दिलचस्प होगा.

