नई दिल्ली/रुद्रपुर। देशभर में चर्चा का विषय बने नीट-यूजी 2026 पेपर लीक मामले ने छात्रों और अभिभावकों की चिंता बढ़ा दी है। इस बीच राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) के महानिदेशक ने स्पष्ट किया है कि पूरे मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंप दी गई है। उन्होंने कहा कि पेपर लीक में शामिल सभी आरोपियों को चिन्हित कर गिरफ्तार किया जाएगा तथा उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
उन्होंने कहा कि सरकार और एजेंसी की प्राथमिकता छात्रों के भविष्य की सुरक्षा और परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता बनाए रखना है। इसी उद्देश्य से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जा रही है। अभिषेक सिंह ने यह भी घोषणा की कि प्रभावित अभ्यर्थियों के लिए दोबारा परीक्षा पूरी निष्पक्षता और पारदर्शिता के साथ आयोजित की जाएगी तथा इसके लिए छात्रों से किसी प्रकार का अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जाएगा।
उधर, उत्तराखंड के रुद्रपुर में इस मुद्दे को लेकर राजनीतिक और सामाजिक चर्चाएं भी तेज हो गई हैं। शहर के सिटी क्लब में आयोजित प्रेस वार्ता में व्यापारी नेता एवं समाजसेवी ने प्रशासनिक कार्यशैली और परीक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए एक अधिकारी पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि संबंधित अधिकारी के कार्यों से आम जनता और व्यापारियों में भारी नाराजगी व्याप्त है।
शिक्षा विशेषज्ञ प्रमुख समाजसेवी सुशील गावा ने आरोप लगाया कि अधिकारी द्वारा अपने पद का दुरुपयोग किया जा रहा है तथा कई मामलों में पारदर्शिता नहीं बरती गई। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि मामले की निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। प्रेस वार्ता के दौरान उन्होंने कुछ दस्तावेज और तथ्यों का हवाला देते हुए प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग भी की।

प्रेस वार्ता में सचिन मुंजल, जगदीश तनेजा नीट परीक्षा रद्द होने के बाद रुद्रपुर सिटी क्लब में आयोजित प्रेस वार्ता में जगदीश तनेजा और सचिन मुंजल ने केंद्र सरकार और एनटीए की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि देश के लाखों छात्रों के भविष्य के साथ लगातार खिलवाड़ हो रहा है और परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता संकट में है। दोनों ने पेपर लीक मामले की निष्पक्ष जांच, जिम्मेदार अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई और पारदर्शी परीक्षा व्यवस्था लागू करने की मांग की।
इस दौरान मौजूद लोगों ने भी मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग उठाई। हालांकि, संबंधित अधिकारी की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
23 लाख छात्रों की मेहनत, अभिभावकों की उम्मीदें और देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा—सब एक बार फिर अव्यवस्था की भेंट चढ़ गए। परीक्षा 3 मई को हुई, गड़बड़ी के संकेत 7 मई को मिले और कार्रवाई तब हुई जब विवाद सियासी तूफान बन चुका था। शिक्षा मंत्री के सवालों पर चुप्पी और एनटीए की सफाई, दोनों ही भरोसे का संकट बढ़ा रहे हैं। अब सीबीआई जांच करेगी, लेकिन असली सवाल यही है—हर साल परीक्षा होगी या प्रयोग?
देशभर में नीट पेपर लीक मामले को लेकर छात्रों और अभिभावकों में चिंता बनी हुई है, वहीं जांच CBI को सौंपे जाने के बाद दोषियों पर सख्त कार्रवाई की उम्मीद भी बढ़ गई है।

