शिक्षा व्यवस्था, पेपर लीक और जवाबदेही का संकटः क्या इस्तीफा अब राजनीतिक संस्कृति से गायब हो चुका है?

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देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट-यूजी 2026 का पेपर लीक होना केवल एक परीक्षा घोटाला नहीं, बल्कि भारत की शिक्षा व्यवस्था पर लगा गंभीर दाग है।

अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( अध्यक्ष:उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी परिषद उत्तराखंड)

लाखों छात्रों की मेहनत, अभिभावकों के सपने और युवाओं का भविष्य एक बार फिर भ्रष्ट तंत्र की भेंट चढ़ गया। परीक्षा रद्द होने से लगभग 23 लाख छात्र प्रभावित हुए हैं। यह स्थिति बताती है कि देश की परीक्षा प्रणाली कितनी असुरक्षित और अविश्वसनीय होती जा रही है।
लोकसभा में विपक्ष के नेता Rahul Gandhi ने प्रधानमंत्री Narendra Modi और केंद्रीय शिक्षा मंत्री Dharmendra Pradhan से सवाल पूछा है कि आखिर बार-बार पेपर लीक क्यों हो रहे हैं और जिम्मेदारों पर कार्रवाई क्यों नहीं होती। यह सवाल केवल विपक्ष का नहीं, बल्कि देश के करोड़ों युवाओं का है।
2024 में भी नीट परीक्षा विवादों में रही थी और अब 2026 में पूरी परीक्षा रद्द करनी पड़ी। इससे स्पष्ट है कि समस्या केवल तकनीकी नहीं, बल्कि व्यवस्थागत है। जांच समितियां और सीबीआई जांच अपनी जगह महत्वपूर्ण हैं, लेकिन जनता अब ठोस जवाबदेही चाहती है। लोकतंत्र में मंत्री केवल उपलब्धियों का श्रेय लेने के लिए नहीं होते, बल्कि विफलता की जिम्मेदारी लेने के लिए भी होते हैं।
भारतीय राजनीति में कभी नैतिक जिम्मेदारी की परंपरा हुआ करती थी। किसी बड़ी प्रशासनिक चूक पर मंत्री इस्तीफा देकर जनता के प्रति जवाबदेही दिखाते थे। लेकिन आज राजनीति में इस्तीफा संस्कृति लगभग समाप्त होती दिखाई दे रही है। चाहे भर्ती घोटाले हों, पेपर लीक हो या भ्रष्टाचार के आरोप — सत्ता पक्ष अक्सर जांच के सहारे समय निकालने की कोशिश करता है।
उत्तराखंड भी इससे अछूता नहीं रहा। राज्य गठन के बाद शिक्षा विभाग समय-समय पर भर्ती विवादों, नकल माफिया और परीक्षा घोटालों को लेकर सवालों में रहा है। विपक्ष लगातार आरोप लगाता रहा है कि शिक्षा विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार पर सरकारें कठोर कार्रवाई करने में विफल रही हैं। युवाओं के मन में यह धारणा बनना बेहद खतरनाक है कि मेहनत से अधिक सिस्टम में पहुंच रखने वालों को फायदा मिलता है।
सबसे चिंाजनक पहलू छात्रों का टूटता मनोबल है। वर्षों की मेहनत के बाद जब परीक्षा रद्द होती है, तो केवल परीक्षा नहीं टूटती बल्कि युवाओं का आत्मविश्वास भी टूट जाता है। कई छात्र मानसिक तनाव में चले जाते हैं और कुछ दुखद कदम तक उठा लेते हैं। यह स्थिति किसी भी सभ्य समाज के लिए गंभीर चेतावनी है।
सरकार को अब केवल बयानबाजी से आगे बढ़ना होगा। परीक्षा प्रणाली को पूरी तरह पारदर्शी और सुरक्षित बनाना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। पेपर लीक में शामिल लोगों के खिलाफ त्वरित और कठोर कार्रवाई होनी चाहिए। साथ ही राजनीतिक और प्रशासनिक जवाबदेही भी तय होनी चाहिए, ताकि युवाओं का विश्वास दोबारा कायम हो सके।
देश का युवा अब भाषण नहीं, भरोसा चाहता है। क्योंकि अगर शिक्षा व्यवस्था पर से विश्वास उठ गया, तो यह केवल छात्रों की हार नहीं होगी, बल्कि देश के भविष्य की हार होगी।


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