सूत्रों के मुताबिक, यश यादव की पहचान विकास बिवाल से थी।

प्रश्नपत्र की हार्डकॉपी को स्कैन कर बनाई थी PDF फाइल
अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( अध्यक्ष:उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी परिषद उत्तराखंड)
जांच में यह भी पता चला है कि विकास बिवाल के पिता दिनेश बिवाल ने प्रश्नपत्र की हार्डकॉपी को स्कैन कर उसकी पीडीएफ फाइल तैयार की थी। आरोप है कि इसके बाद यह प्रश्नपत्र सीकर के कोचिंग संस्थानों में पढ़ने वाले कई छात्रों तक पहुंचाया गया।
छात्रों से पेपर के बदले मांगे 2-5 लाख रुपये
सूत्रों के अनुसार, छात्रों ने पूछताछ में बताया है कि पेपर हासिल करने के लिए उनसे 2 लाख से 5 लाख रुपये तक लिए गए थे। हालांकि, मामले में सामने आए शुभम ने खुद को इस पूरे नेटवर्क का मास्टरमाइंड मानने से इनकार किया है।
लीक में शामिल यश खुद नहीं पास कर पाया परीक्षा
बता दें कि जांच एजेंसी अब इस बात की तह तक जाने की कोशिश कर रही है कि आखिर प्रश्नपत्र लीक होने का असली सोर्स क्या था और यह किन-किन लोगों के जरिए छात्रों तक पहुंचा। बताया जा रहा है कि यश, खुद परीक्षा पास नहीं कर पाया। वह बैचलर ऑफ आयुर्वेदिक मेडिकल साइंसेज (BAMS) का छात्र है।
जांच में मनी ट्रेल पर किया जा रहा फोकस
CBI ने इस मामले में कोचिंग संस्थानों के स्टाफ और मालिकों से भी पूछताछ की है। साथ ही छात्रों और गिरफ्तार आरोपियों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं। अब जांच का फोकस मनी ट्रेल पर है। एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि पैसे किसके जरिए और किन खातों तक पहुंचे।

