केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने भारतीय सेना के एक मौजूदा कर्नल को 50 लाख रुपये के कथित रिश्वत मामले में गिरफ्तार किया है। आरोपी सैन्य अधिकारी की पहचान कर्नल हिमांशु बाली के तौर पर हुई है, जो कोलकाता में ईस्टर्न कमांड के तहत आर्मी ऑर्डनेंस कॉर्प्स में तैनात हैं।

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कर्नल पर आरोप है कि उन्होंने सेना के टेंडर दिलाने के नाम पर कानपुर की एक कंपनी को फायदा पहुंचाया है।

अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( अध्यक्ष:उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी परिषद उत्तराखंड

कानपुर की कंपनी पर मेहरबान थे कर्नल

सीबीआई द्वारा दर्ज एफआईआर के मुताबिक, कर्नल बाली पर कानपुर स्थित फर्म ‘ईस्टर्न ग्लोबल लिमिटेड’ के निदेशकों से सेना का टेंडर दिलाने के एवज में घूस लेने का आरोप है। जांच एजेंसी का दावा है कि इसी साल की शुरुआत में रिश्वत के बदले इस कंपनी को एक बड़ा टेंडर दे दिया गया था। एक अधिकारी ने कहा, “उनकी गिरफ्तारी तब हुई जब उनके और चार अन्य लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, इस समूह ने अवैध लाभ के बदले टेंडर हासिल करने और बढ़ा-चढ़ाकर पेश किए गए बिलों को पास कराने के लिए आपस में साठगांठ की थी।”

FIR के अनुसार- विश्वसनीय सूत्रों से मिली जानकारी से पता चलता है कि कर्नल बाली, एक प्राइवेट कॉन्ट्रैक्टर और अन्य लोगों के साथ मिलकर, भ्रष्टाचार में लिप्त रहे हैं। इसमें कॉन्ट्रैक्टर और उसकी कंपनी को गलत और गैर-कानूनी फायदे पहुंचाने के बदले गैर-कानूनी रिश्वत की मांग करना और उसे स्वीकार करना शामिल है।

हवाला के जरिए पहुंचनी थी 50 लाख की रकम!

इस मामले की जांच में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं, जिन्हें सीबीआई ने एफआईआर में दर्ज किया है।

पार्क स्ट्रीट में हुई थी सीक्रेट मीटिंग: जांच में सामने आया है कि 22 अप्रैल को कर्नल हिमांशु बाली ने कोलकाता के पार्क स्ट्रीट इलाके में कंपनी के प्रतिनिधियों से मुलाकात की थी।

मीटिंग के 48 घंटे में मिला टेंडर: इस मुलाकात के महज दो दिन बाद ही, यानी 24 अप्रैल को कानपुर की इस कंपनी को टेंडर अलॉट कर दिया गया।

बाकी रकम की डिमांड: सीबीआई के मुताबिक, 16 मई को कर्नल बाली ने रिश्वत की बाकी बची 50 लाख रुपये की रकम की मांग की थी।

हवाला रूट का इस्तेमाल: आरोप है कि घूस की यह मोटी रकम हवाला नेटवर्क के जरिए कर्नल तक पहुंचाई जानी थी।

घटिया सैंपल्स और फर्जी बिल भी किए पास

कर्नल हिमांशु बाली पर सिर्फ टेंडर दिलाने में हेरफेर करने के ही आरोप नहीं हैं। जांच एजेंसी के मुताबिक, उन्होंने टेंडर नियमों को ताक पर रखते हुए कंपनी के घटिया क्वालिटी (सब-स्टैंडर्ड) वाले सैंपल्स को भी पास किया था। इसके अलावा, उन्होंने कथित तौर पर कंपनी के पेंडिंग पड़े बिलों और बढ़ाकर बनाए गए फर्जी बिलों को भी क्लियर करवाया था।

ठेकेदार समेत कई अन्य लोग भी रडार पर

सीबीआई ने इस कथित रिश्वत मामले में कर्नल और प्राइवेट ठेकेदार के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के बाद कर्नल की गिरफ्तारी की है। इस पूरे भ्रष्टाचार के सिंडिकेट में कई अन्य अज्ञात लोगों को भी आरोपी बनाया गया है, जिनकी भूमिका की जांच की जा रही है।


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