मुनाफे वाली संस्थाओं का विनिवेश: आखिर किसके हित में?

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रामनगर के समीप मोहान स्थित आयुर्वेदिक दवा कंपनी आईएमपीसीएल का विनिवेश केवल एक औद्योगिक फैसले तक सीमित मामला नहीं है, बल्कि यह उत्तराखंड की स्थानीय अर्थव्यवस्था, रोजगार और सार्वजनिक उपक्रमों के भविष्य से जुड़ा गंभीर प्रश्न बन गया है। वर्ष 1978 में स्थापित यह संस्थान दशकों से क्षेत्र की पहचान रहा है। यहां नियमित, संविदा और ठेका मिलाकर सैकड़ों लोग रोजगार से जुड़े हैं। ऐसे में कंपनी के निजीकरण की खबर ने स्वाभाविक रूप से कर्मचारियों और स्थानीय जनता में असंतोष पैदा किया है।

अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( अध्यक्ष:उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी परिषद उत्तराखंड


सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि कोई सरकारी या अर्द्ध सरकारी संस्थान मुनाफे में चल रहा है, तो उसे बेचने की आवश्यकता क्यों पड़ रही है? विरोध कर रहे लोगों का कहना है कि कंपनी की वास्तविक संपत्ति और बाजार मूल्य कहीं अधिक है, जबकि इसे अपेक्षाकृत कम कीमत पर निजी हाथों में सौंप दिया गया। यदि यह आरोप सही हैं, तो सरकार को पारदर्शिता के साथ जनता के सामने पूरा पक्ष रखना चाहिए।
विनिवेश के समर्थक इसे आर्थिक सुधार और दक्षता बढ़ाने की प्रक्रिया बताते हैं, लेकिन पहाड़ जैसे सीमित रोजगार वाले क्षेत्रों में ऐसे फैसलों का सामाजिक प्रभाव भी समझना जरूरी है। सरकारी संस्थान केवल लाभ कमाने का माध्यम नहीं होते, वे स्थानीय रोजगार, सामाजिक स्थिरता और क्षेत्रीय विकास के आधार भी होते हैं। निजीकरण के बाद कर्मचारियों की नौकरी सुरक्षा, वेतन संरचना और स्थानीय युवाओं के भविष्य पर संकट खड़ा होना स्वाभाविक चिंता है।
यह भी चिंताजनक है कि 2017 में कर्मचारियों के विरोध के बाद जिस प्रक्रिया को रोका गया था, वही अब दोबारा लागू कर दी गई। इससे यह संदेश जाता है कि सरकार संवाद की बजाय निर्णय थोपने की नीति पर आगे बढ़ रही है। लोकतांत्रिक व्यवस्था में ऐसे बड़े आर्थिक फैसलों से पहले कर्मचारियों, स्थानीय जनप्रतिनिधियों और जनता का विश्वास लेना आवश्यक है।
सरकार को चाहिए कि वह आईएमपीसीएल विनिवेश से जुड़े सभी तथ्यों को सार्वजनिक करे, कर्मचारियों के हितों की कानूनी सुरक्षा सुनिश्चित करे और यह स्पष्ट करे कि इस निर्णय से क्षेत्र और देश को वास्तविक लाभ क्या होगा। विकास केवल परिसंपत्तियां बेचने से नहीं, बल्कि रोजगार और जनविश्वास बचाने से भी होता है।


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