मुख्य संचालक नीलम कांडपाल ने बांटे सफलता के सूत्र, हल्द्वानी के प्रशिक्षुओं ने रुद्रपुर में सीखे स्वरोजगार के गुर

रुद्रपुर। बैंक ऑफ बड़ौदा ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान (आरसेटी), हल्द्वानी के छह माह के सिलाई एवं महिला परिधान निर्माण प्रशिक्षण कार्यक्रम से जुड़े प्रशिक्षुओं ने रुद्रपुर स्थित जय बालाजी स्टिचिंग मैन्युफैक्चरिंग यूनिट का शैक्षणिक भ्रमण किया। इस दौरान प्रशिक्षुओं ने परिधान उद्योग की कार्यप्रणाली को करीब से देखा और स्वरोजगार के क्षेत्र में आगे बढ़ने की प्रेरणा प्राप्त की।

अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( अध्यक्ष:उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी परिषद उत्तराखंड


भारत सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय के संरक्षण में संचालित आरसेटी हल्द्वानी द्वारा आयोजित इस एक्सपोजर विजिट का उद्देश्य प्रशिक्षुओं को उद्योग जगत की वास्तविक परिस्थितियों से परिचित कराना था। भ्रमण के दौरान प्रशिक्षुओं ने जाना कि एक कपड़े के तैयार परिधान बनने तक कितनी प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता है और किस प्रकार एक छोटे व्यवसाय को बड़े उद्यम में बदला जा सकता है।
जय बालाजी स्टिचिंग मैन्युफैक्चरिंग यूनिट की मुख्य संचालक नीलम कांडपाल ने प्रशिक्षुओं का स्वागत करते हुए उन्हें अपने संघर्ष और सफलता की कहानी सुनाई। उन्होंने बताया कि किसी भी क्षेत्र में सफलता प्राप्त करने के लिए निरंतर मेहनत, लगन और सकारात्मक सोच सबसे महत्वपूर्ण होती है। उन्होंने कहा कि यदि व्यक्ति अपने कौशल पर भरोसा रखकर लगातार प्रयास करता रहे तो वह निश्चित रूप से अपने सपनों को साकार कर सकता है।
नीलम कांडपाल ने प्रशिक्षुओं को बताया कि उन्होंने भी सीमित संसाधनों के साथ अपने कार्य की शुरुआत की थी, लेकिन मेहनत, गुणवत्ता और ग्राहकों के विश्वास के बल पर आज उनकी यूनिट अनेक लोगों को रोजगार उपलब्ध करा रही है। उन्होंने महिलाओं को विशेष रूप से आत्मनिर्भर बनने और अपने हुनर को व्यवसाय का रूप देने के लिए प्रेरित किया।
भ्रमण के दौरान प्रशिक्षुओं ने कपड़ों की कटिंग, सिलाई, फिनिशिंग, पैकिंग और गुणवत्ता नियंत्रण की पूरी प्रक्रिया को देखा। आधुनिक मशीनों के संचालन और उत्पादन प्रबंधन की जानकारी भी उन्हें दी गई। प्रशिक्षुओं ने उद्योग में उपयोग होने वाली तकनीकों और बाजार की मांग के अनुसार उत्पाद तैयार करने के तरीकों को समझा।
आरसेटी के प्रशिक्षुओं ने बताया कि प्रशिक्षण केंद्र में उन्हें तकनीकी जानकारी मिली थी, लेकिन उद्योग का वास्तविक वातावरण देखकर उनके ज्ञान और अनुभव में काफी वृद्धि हुई है। इस भ्रमण ने उन्हें यह विश्वास दिलाया है कि वे भविष्य में अपना स्वयं का सिलाई केंद्र, बुटीक या रेडीमेड गारमेंट यूनिट स्थापित कर सकते हैं।
आरसेटी के निदेशक अतुल कुमार पांडेय ने कहा कि प्रशिक्षण कार्यक्रमों में एक्सपोजर विजिट का विशेष महत्व होता है। इससे प्रशिक्षुओं को वास्तविक कार्यस्थल का अनुभव मिलता है और वे स्वरोजगार की संभावनाओं को बेहतर ढंग से समझ पाते हैं। ऐसे भ्रमण युवाओं और महिलाओं में आत्मविश्वास बढ़ाने के साथ-साथ उन्हें उद्यमिता की दिशा में प्रेरित करते हैं।
मुख्य संचालक नीलम कांडपाल ने प्रशिक्षुओं को संबोधित करते हुए कहा कि सफलता पाने के लिए कभी हार नहीं माननी चाहिए। उन्होंने कहा कि चुनौतियां हर क्षेत्र में आती हैं, लेकिन जो व्यक्ति कठिनाइयों का सामना करते हुए आगे बढ़ता है, वही अपनी पहचान बनाता है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे नौकरी की तलाश तक सीमित न रहें, बल्कि अपने कौशल के दम पर स्वरोजगार अपनाकर दूसरों के लिए भी रोजगार के अवसर पैदा करें।
यह शैक्षणिक भ्रमण प्रशिक्षुओं के लिए प्रेरणादायक साबित हुआ। उन्होंने न केवल उद्योग की कार्यप्रणाली को समझा बल्कि यह भी सीखा कि दृढ़ इच्छाशक्ति, मेहनत और निरंतर प्रयास से किसी भी लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है। कार्यक्रम के अंत में सभी प्रशिक्षुओं ने मुख्य संचालक नीलम कांडपाल का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके अनुभव और मार्गदर्शन से उन्हें अपने भविष्य की दिशा तय करने में नई प्रेरणा मिली है।
इस अवसर पर एक बार फिर यह संदेश प्रमुखता से उभरकर सामने आया कि “कोशिश करते रहना चाहिए और कुछ करके दिखाना चाहिए”, क्योंकि सफलता उन्हीं को मिलती है जो अपने सपनों को पूरा करने के लिए लगातार प्रयास करते रहते हैं।