रुद्रपुर। शहर के नैनीताल रोड स्थित एसजीएडी कॉम्प्लेक्स के सामने सोमवार देर रात एक दर्दनाक सड़क हादसे में 29 वर्षीय महिला की जान चली गई। यह दुर्घटना उस लंबे समय से चली आ रही समस्या को भी उजागर करती है, जिसके बारे में स्थानीय लोग लगातार चिंता जताते रहे हैं। वर्षों से क्षेत्र के लोगों द्वारा सड़क पार करने की सुरक्षित व्यवस्था की मांग की जाती रही, लेकिन पर्याप्त कदम नहीं उठाए जाने के कारण आखिरकार वही हुआ, जिसका डर लंबे समय से लोगों के मन में बना हुआ था।
अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( अध्यक्ष:उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी परिषद उत्तराखंड।
हादसे में जान गंवाने वाली महिला की पहचान मूल रूप से भिकियासैंण निवासी तथा वर्तमान में रुद्रपुर के रविन्द्रनगर क्षेत्र में रहने वाली विमला (29 वर्ष) के रूप में हुई है। विमला सिडकुल की एक औद्योगिक इकाई में कार्यरत थीं और अपने परिवार का भरण-पोषण करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही थीं। घटना के समय उनके साथ उनकी छह वर्षीय पुत्री भी मौजूद थी, जो सौभाग्यवश इस हादसे में बच गई, लेकिन उसने अपनी मां को अपनी आंखों के सामने तड़पते हुए दम तोड़ते देखा। यह दृश्य न केवल परिवार बल्कि पूरे क्षेत्र को झकझोर देने वाला है।
चार वर्ष पहले बने डिवाइडर के बाद बढ़ी परेशानी
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि नैनीताल रोड पर एसजीएडी कॉम्प्लेक्स के सामने का क्षेत्र लंबे समय से लोगों की आवाजाही का प्रमुख मार्ग रहा है। वर्षों तक यहां दोनों ओर के क्षेत्रों के बीच निर्बाध आवागमन होता रहा। लोग आसानी से सड़क पार कर अपने घरों, बाजारों, कार्यालयों और अन्य आवश्यक स्थानों तक पहुंचते थे।
करीब चार वर्ष पूर्व सड़क के बीच में डिवाइडर का निर्माण किया गया। प्रशासन का उद्देश्य यातायात को नियंत्रित करना और दुर्घटनाओं को कम करना बताया गया था, लेकिन स्थानीय लोगों का आरोप है कि डिवाइडर बनाने के साथ-साथ वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई। न तो पर्याप्त दूरी पर यू-टर्न उपलब्ध कराए गए और न ही पैदल यात्रियों के लिए सुरक्षित क्रॉसिंग की व्यवस्था की गई।
परिणामस्वरूप लोगों को मजबूरी में डिवाइडर पार कर सड़क के दूसरी ओर जाना पड़ता है। रोजाना सैकड़ों लोग इस स्थान पर जोखिम उठाकर सड़क पार करते हैं। क्षेत्र के निवासियों का कहना है कि कई बार जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों और यातायात विभाग के समक्ष इस समस्या को उठाया गया, लेकिन कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला गया।
हादसे की रात क्या हुआ?
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार विमला अपनी छह वर्षीय बेटी के साथ सड़क पार कर रही थीं। इसी दौरान तेज गति से आ रही एक जेसीबी मशीन की चपेट में वे आ गईं। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि विमला गंभीर रूप से घायल हो गईं। आसपास मौजूद लोगों ने तत्काल उन्हें बचाने का प्रयास किया, लेकिन उन्होंने घटनास्थल पर ही दम तोड़ दिया।
घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। लोगों की भीड़ जमा हो गई और कुछ समय के लिए यातायात भी प्रभावित रहा। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित किया। बाद में शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया।
सबसे मार्मिक पहलू यह रहा कि विमला की छह वर्षीय बेटी पूरी घटना की प्रत्यक्षदर्शी बनी। उसने अपनी मां को आखिरी सांस लेते देखा। इस दृश्य ने वहां मौजूद लोगों को भी भावुक कर दिया। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यह बच्ची जीवन भर इस दर्दनाक घटना को नहीं भूल पाएगी।
परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
विमला की मृत्यु से उनके परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। परिवार के सदस्यों का रो-रोकर बुरा हाल है। परिजनों ने बताया कि विमला मेहनतकश महिला थीं और परिवार की आर्थिक जिम्मेदारियों में महत्वपूर्ण योगदान देती थीं।
उनकी असमय मृत्यु ने परिवार को न केवल भावनात्मक बल्कि आर्थिक संकट में भी डाल दिया है। पड़ोसियों और परिचितों के अनुसार विमला अपने व्यवहार और मेहनत के लिए जानी जाती थीं। उनकी मौत की खबर फैलते ही क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई।
पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे समाजसेवी सुशील गाबा
घटना की जानकारी मिलने पर रुद्रपुर के प्रमुख समाजसेवी सुशील गाबा पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे और मृतका के परिजनों से मुलाकात की। उन्होंने शोकाकुल परिवार को सांत्वना देते हुए हर संभव सहयोग का आश्वासन दिया।
सुशील गाबा ने इस घटना को अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि यह केवल एक परिवार की त्रासदी नहीं है, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही और अव्यवस्थित यातायात व्यवस्था का परिणाम भी है। उन्होंने कहा कि वर्षों से लोग इस स्थान पर सुरक्षित क्रॉसिंग की मांग कर रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार विभागों ने समस्या की गंभीरता को समझने का प्रयास नहीं किया।
उन्होंने कहा कि यदि समय रहते उचित कदम उठाए गए होते तो शायद आज एक मासूम बच्ची अपनी मां को नहीं खोती और एक परिवार उजड़ने से बच जाता।
सरकार और सिस्टम को दिखाया आईना
सुशील गाबा ने इस हादसे के बहाने सरकार और प्रशासन को भी आईना दिखाया। उन्होंने कहा कि विकास कार्य केवल सड़कें चौड़ी करने और डिवाइडर बनाने तक सीमित नहीं होने चाहिए। किसी भी सड़क परियोजना का मुख्य उद्देश्य लोगों की सुरक्षा होना चाहिए।
उन्होंने सवाल उठाया कि जब किसी स्थान पर बड़ी संख्या में लोग नियमित रूप से सड़क पार करते हैं, तब वहां पैदल यात्रियों की सुरक्षा के लिए आवश्यक इंतजाम क्यों नहीं किए गए। उन्होंने कहा कि केवल यातायात के प्रवाह को ध्यान में रखकर योजनाएं बनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि आम नागरिकों की वास्तविक जरूरतों को भी समझना आवश्यक है।
गाबा ने कहा कि प्रशासन को इस घटना से सबक लेते हुए पूरे क्षेत्र की यातायात व्यवस्था की समीक्षा करनी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
उठाई महत्वपूर्ण मांगें
समाजसेवी सुशील गाबा ने इस हादसे के बाद कई महत्वपूर्ण मांगें उठाईं। उन्होंने कहा कि एसजीएडी कॉम्प्लेक्स के सामने जहां वर्षों से लोग सड़क पार करते रहे हैं, वहां तत्काल प्रभाव से उचित व्यवस्था की जानी चाहिए।
उन्होंने मांग की कि—
डिवाइडर में सुरक्षित कट बनाया जाए अथवा पूर्व की व्यवस्था बहाल की जाए।
पैदल यात्रियों के लिए स्पष्ट और सुरक्षित जेब्रा क्रॉसिंग बनाई जाए।
स्थायी रूप से ट्रैफिक सिग्नल (रेड लाइट) लगाया जाए।
आवश्यकता पड़ने पर यातायात पुलिस की नियमित तैनाती की जाए।
सड़क पार करने वाले लोगों के लिए चेतावनी संकेतक लगाए जाएं।
पूरे नैनीताल रोड और राष्ट्रीय राजमार्ग क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्थाओं की समीक्षा की जाए।
दुर्घटना संभावित क्षेत्रों को चिन्हित कर वहां विशेष सुरक्षा उपाय किए जाएं।
स्थानीय लोगों में आक्रोश
घटना के बाद स्थानीय नागरिकों में गहरा आक्रोश देखने को मिला। लोगों का कहना है कि प्रशासन तब जागता है जब किसी की जान चली जाती है। क्षेत्रवासियों ने आरोप लगाया कि कई बार शिकायतों और सुझावों के बावजूद जिम्मेदार विभागों ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की।
नागरिकों का कहना है कि यदि सुरक्षित क्रॉसिंग, अंडरपास, फुटओवर ब्रिज या ट्रैफिक सिग्नल जैसी सुविधाएं उपलब्ध होतीं तो यह हादसा टाला जा सकता था। लोगों ने प्रशासन से मांग की कि केवल जांच के आश्वासन देने के बजाय जमीन पर ठोस कदम उठाए जाएं।
विशेषज्ञों की राय
यातायात विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी व्यस्त मार्ग पर डिवाइडर बनाने के साथ-साथ पैदल यात्रियों की आवाजाही का वैज्ञानिक अध्ययन किया जाना चाहिए। जहां बड़ी संख्या में लोग सड़क पार करते हों, वहां उचित अंतराल पर नियंत्रित क्रॉसिंग, सिग्नल और सुरक्षा प्रबंध अनिवार्य हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार जब लोगों की आवश्यकता और सड़क डिजाइन में सामंजस्य नहीं होता, तब नागरिक मजबूरी में नियमों का उल्लंघन करते हैं और दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है।
मासूम बच्ची के भविष्य की चिंता
इस घटना का सबसे संवेदनशील पहलू वह छह वर्षीय बच्ची है जिसने अपनी मां को खो दिया। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन और समाज को इस बच्ची के भविष्य को लेकर भी गंभीरता से विचार करना चाहिए।
सामाजिक संगठनों ने मांग की है कि पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता प्रदान की जाए तथा बच्ची की शिक्षा और पालन-पोषण के लिए विशेष सहायता योजना बनाई जाए।
एक हादसा, कई सवाल
विमला की मौत ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या विकास योजनाओं में आम नागरिकों की सुरक्षा को पर्याप्त महत्व दिया जा रहा है? क्या स्थानीय लोगों की शिकायतों को समय रहते सुना जाता है? क्या सड़क निर्माण और यातायात प्रबंधन में मानवीय जरूरतों का ध्यान रखा जाता है?
इन सवालों के जवाब तलाशना अब प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी है।
रुद्रपुर के नैनीताल रोड स्थित एसजीएडी कॉम्प्लेक्स के सामने हुई यह दर्दनाक दुर्घटना केवल एक महिला की मौत की खबर नहीं है, बल्कि एक ऐसी चेतावनी है जिसे अब नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। 29 वर्षीय विमला की असमय मौत ने एक परिवार को गहरे दुख में डुबो दिया है और एक मासूम बच्ची को जीवन भर का दर्द दे दिया है।
समाजसेवी सुशील गाबा ने जहां मृतका के परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की, वहीं सरकार और प्रशासन को आईना दिखाते हुए यातायात व्यवस्था में व्यापक सुधार की मांग भी उठाई है। अब देखने वाली बात यह होगी कि क्या यह हादसा जिम्मेदार विभागों को जगाने में सफल होगा या फिर किसी अगली दुर्घटना के बाद एक बार फिर वही सवाल उठेंगे।
फिलहाल रुद्रपुर की जनता यही उम्मीद कर रही है कि विमला की मौत व्यर्थ न जाए और इस घटना के बाद ऐसे ठोस कदम उठाए जाएं, जिससे भविष्य में किसी अन्य परिवार को इस तरह का असहनीय दुख न झेलना पड़े।
