खटीमा शहीद स्मारक पर  दर्जा मंत्री बनने के बाद हुकम सिंह कुंवर और मोहन पाठक ने शहीद राज्य आंदोलनकारियों को दी श्रद्धांजलि

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खटीमा। उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलन के इतिहास में खटीमा का नाम स्वर्ण अक्षरों में दर्ज है। राज्य आंदोलन के दौरान खटीमा गोलीकांड में अपने प्राणों की आहुति देने वाले शहीदों की स्मृति में स्थापित शहीद स्मारक आज एक बार फिर श्रद्धा, सम्मान और संकल्प का केंद्र बना, जब राज्य निर्माण आंदोलनकारी सम्मान परिषद के अध्यक्ष एवं राज्य मंत्री दर्जा प्राप्त हुकम सिंह कुंवर तथा राज्य आंदोलनकारी खेल परिषद के उपाध्यक्ष एवं राज्य मंत्री दर्जा प्राप्त मोहन पाठक ने शहीद स्मारक पहुंचकर राज्य आंदोलन के अमर शहीदों को विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की।
दर्जा मंत्री का दायित्व मिलने के बाद दोनों नेता पहली बार खटीमा शहीद स्मारक पहुंचे। इस अवसर पर उन्होंने शहीदों की प्रतिमाओं और स्मारक स्थल पर पुष्प अर्पित कर उन्हें नमन किया तथा उनके बलिदान को याद करते हुए कहा कि उत्तराखंड राज्य का निर्माण किसी राजनीतिक प्रक्रिया का परिणाम मात्र नहीं था, बल्कि यह हजारों आंदोलनकारियों के संघर्ष, त्याग, समर्पण और अनेक शहीदों के सर्वोच्च बलिदान का प्रतिफल है।

अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( अध्यक्ष:उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी परिषद उत्तराखंड।


हुकम सिंह कुंवर ने कहा कि उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलन के दौरान जिन वीर आंदोलनकारियों ने अपने प्राणों का बलिदान दिया, उनके सपनों को साकार करना हम सभी की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि राज्य आंदोलन के शहीदों ने अलग उत्तराखंड राज्य के लिए जो संघर्ष किया, वह आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उन्होंने कहा कि आज जब उन्हें राज्य निर्माण आंदोलनकारी सम्मान परिषद का अध्यक्ष बनने का अवसर मिला है, तो उनकी प्राथमिकता राज्य आंदोलनकारियों के सम्मान, उनकी समस्याओं के समाधान और उनके योगदान को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की होगी।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्य आंदोलनकारियों के सम्मान को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए आंदोलन से जुड़े लोगों को विभिन्न जिम्मेदारियां सौंपी हैं। इसके लिए उन्होंने मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार राज्य आंदोलनकारियों के योगदान को सम्मान देने की दिशा में लगातार कार्य कर रही है।
इस अवसर पर राज्य आंदोलनकारी खेल परिषद के उपाध्यक्ष एवं दर्जा मंत्री मोहन पाठक ने भी शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलन केवल कुछ नेताओं का आंदोलन नहीं था, बल्कि यह जन-जन का आंदोलन था, जिसमें युवाओं, महिलाओं, कर्मचारियों, किसानों और आम नागरिकों ने बढ़-चढ़कर भागीदारी निभाई थी। उन्होंने कहा कि राज्य आंदोलन में उनकी स्वयं की भी सक्रिय और महत्वपूर्ण भूमिका रही है। एक राज्य आंदोलनकारी के रूप में उन्होंने आंदोलन के विभिन्न चरणों में भाग लिया और अलग राज्य की मांग को लेकर जनजागरण, धरना-प्रदर्शन तथा संगठनात्मक गतिविधियों में योगदान दिया।
मोहन पाठक ने कहा कि राज्य आंदोलन के दिनों की स्मृतियां आज भी उनके मन में ताजा हैं। उन्होंने कहा कि अलग राज्य की मांग को लेकर पूरे पर्वतीय क्षेत्र के साथ-साथ तराई और सीमांत क्षेत्रों में भी लोगों ने अभूतपूर्व एकजुटता दिखाई थी। खटीमा, मसूरी और रामपुर तिराहा जैसी घटनाओं ने आंदोलन को नई दिशा दी और अंततः राज्य निर्माण का मार्ग प्रशस्त हुआ। उन्होंने कहा कि राज्य आंदोलन के शहीदों का बलिदान कभी भुलाया नहीं जा सकता और राज्य की जनता हमेशा उनकी ऋणी रहेगी।
उन्होंने कहा कि शहीद स्मारक पर आकर उन्हें गर्व के साथ-साथ भावुकता का भी अनुभव होता है, क्योंकि यह स्थान उन अमर बलिदानियों की याद दिलाता है जिन्होंने आने वाली पीढ़ियों के बेहतर भविष्य के लिए अपने प्राण न्यौछावर कर दिए। उन्होंने कहा कि राज्य आंदोलनकारियों को सम्मान और पहचान दिलाने के लिए सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयास सराहनीय हैं और आगे भी आंदोलनकारियों के हितों की रक्षा के लिए निरंतर कार्य किया जाएगा।
दोनों नेताओं ने कहा कि उत्तराखंड का अस्तित्व और पहचान राज्य आंदोलनकारियों तथा शहीदों के संघर्ष की देन है। यदि उन वीरों ने अपने अधिकारों और क्षेत्रीय अस्मिता की रक्षा के लिए संघर्ष नहीं किया होता, तो आज उत्तराखंड अलग राज्य के रूप में स्थापित नहीं हो पाता। उन्होंने कहा कि राज्य के विकास और जनकल्याण की दिशा में आगे बढ़ते हुए शहीदों के सपनों को साकार करना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
श्रद्धांजलि कार्यक्रम के दौरान उपस्थित राज्य आंदोलनकारियों ने भी आंदोलन के दिनों को याद करते हुए शहीदों को नमन किया। वक्ताओं ने कहा कि उत्तराखंड आंदोलन देश के लोकतांत्रिक आंदोलनों में एक महत्वपूर्ण अध्याय है, जिसने शांतिपूर्ण जनसंघर्ष की शक्ति को प्रदर्शित किया। उन्होंने युवाओं से राज्य निर्माण आंदोलन के इतिहास को जानने और शहीदों के आदर्शों से प्रेरणा लेने का आह्वान किया।
कार्यक्रम के दौरान शहीदों की स्मृति में दो मिनट का मौन रखकर उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किए गए। उपस्थित लोगों ने संकल्प लिया कि राज्य आंदोलनकारियों के सम्मान और शहीदों के सपनों को साकार करने के लिए समाज और सरकार मिलकर कार्य करेंगे।
इस अवसर पर मौजूद राज्य आंदोलनकारियों ने हुकम सिंह कुंवर और मोहन पाठक को नई जिम्मेदारियों के लिए शुभकामनाएं भी दीं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि दोनों नेता अपने अनुभव और आंदोलनकारी पृष्ठभूमि के बल पर राज्य आंदोलनकारियों की आवाज को मजबूती से उठाएंगे और उनके हितों के लिए प्रभावी कार्य करेंगे।
खटीमा शहीद स्मारक पर आयोजित यह कार्यक्रम केवल श्रद्धांजलि का आयोजन नहीं था, बल्कि राज्य निर्माण आंदोलन की गौरवशाली विरासत को याद करने और शहीदों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर भी था। शहीदों के बलिदान को याद करते हुए उपस्थित लोगों ने एक स्वर में कहा कि उत्तराखंड राज्य की नींव उन अमर शहीदों के रक्त और संघर्ष से बनी है, जिनका योगदान सदैव अविस्मरणीय रहेगा। उनके आदर्श और त्याग आने वाली पीढ़ियों को सदैव प्रेरित करते रहेंगे।


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