उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारियों के लिए सकारात्मक पहल, लंबित मांगों के समाधान की दिशा में तेज़ी

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उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी सम्मान परिषद के अध्यक्ष हुकुम सिंह कुंवर तथा उपाध्यक्ष सुभाष बड़थ्वाल के साथ एक महिला उपाध्यक्ष की भी नियुक्ति की गई है। वर्तमान समय को राज्य आंदोलनकारियों के लिए एक महत्वपूर्ण और सकारात्मक दौर माना जा रहा है।

अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( अध्यक्ष:उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी परिषद उत्तराखंड।


मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी तथा राज्य सरकार के मंत्रियों द्वारा राज्य आंदोलनकारियों की प्रमुख मांगों के समाधान के लिए गंभीर प्रयास किए जा रहे हैं। विशेष रूप से राज्य आंदोलनकारियों के चिन्हीकरण की प्रक्रिया को गति दी गई है। उत्तराखंड में लगभग 2,000 लोगों के चिन्हीकरण का कार्य किया जाना है और संबंधित फाइलों का निस्तारण तेज़ी से किया जा रहा है।
इसके अतिरिक्त, पीडब्ल्यूडी, सिंचाई विभाग, मंडी समिति तथा राज्य संपत्ति विभाग के विभिन्न गेस्ट हाउसों में राज्य आंदोलनकारियों को सुविधा उपलब्ध कराने की दिशा में भी कार्य चल रहा है। उम्मीद की जा रही है कि यह व्यवस्था शीघ्र ही धरातल पर दिखाई देगी।
राज्य आंदोलनकारियों के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण के विषय में सरकार ने उच्च न्यायालय में प्रभावी पैरवी शुरू कर दी है तथा अनुभवी अधिवक्ताओं के माध्यम से अपना पक्ष मजबूती से रखा जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार राज्य स्थापना दिवस, 9 नवंबर के अवसर पर राज्य आंदोलनकारियों के हित में 10,000 रुपये से अधिक पेंशन संबंधी घोषणा किए जाने की संभावना भी व्यक्त की जा रही है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी तथा राज्य सरकार मिशन 2027 की तैयारियों में राज्य आंदोलनकारियों की महत्वपूर्ण भूमिका को ध्यान में रखते हुए उनकी विभिन्न मांगों पर लगातार कार्य कर रहे हैं। वर्ष 2017 के बाद बनी सकारात्मक सरकारी पहल के क्रम में आंदोलनकारियों की अनेक मांगों पर प्रगति हुई है, जबकि शेष लंबित मांगों के समाधान के लिए भी सरकार सक्रिय रूप से प्रयासरत है।

आंदोलनकारियों) के संदर्भ में प्रसारित करना है, तो निम्न प्रस्तावों पर मुहर लगने या राहत मिलने की संभावना सबसे अधिक मानी जा सकती है:
1. राज्य आंदोलनकारियों के आरक्षण संबंधी प्रावधान
लंबे समय से राज्य आंदोलनकारी संगठनों की मांग रही है कि उनके आश्रितों को सरकारी नौकरियों में आरक्षण या क्षैतिज आरक्षण का लाभ मिले। यदि कैबिनेट ने आरक्षण संबंधी प्रस्ताव स्वीकृत किया है, तो इसमें आंदोलनकारियों और उनके आश्रितों के अधिकारों को मजबूत करने के प्रावधान शामिल हो सकते हैं।
2. आंदोलनकारियों के आश्रितों को सरकारी सेवाओं में अवसर
राज्य निर्माण आंदोलन में भाग लेने वाले चिन्हित आंदोलनकारियों के पुत्र-पुत्रियों को रोजगार में प्राथमिकता, आयु सीमा में छूट अथवा विशेष अवसर देने की मांग वर्षों से उठती रही है। ऐसे किसी प्रस्ताव को राहतकारी कदम माना जाएगा।
3. स्वास्थ्य सुविधा (फटाफट इलाज योजना)
यदि कर्मचारियों के लिए कैशलेस या त्वरित चिकित्सा सुविधा का विस्तार किया गया है, तो इसकी परिधि में चिन्हित राज्य आंदोलनकारियों और उनके परिवारों को भी शामिल किए जाने की संभावना हो सकती है। इससे गंभीर बीमारी के समय आर्थिक बोझ कम होगा।
4. पेंशन एवं सम्मान निधि में सुधार
राज्य आंदोलनकारी लगातार सम्मान राशि/पेंशन बढ़ाने की मांग करते रहे हैं। कैबिनेट की राहत संबंधी घोषणाओं में सम्मान निधि बढ़ाने, भुगतान प्रक्रिया सरल करने या नए पात्रों को शामिल करने का निर्णय हो सकता है।
5. चिन्हीकरण (Verification) प्रक्रिया को सरल बनाना
कई आंदोलनकारी अभी भी आधिकारिक रूप से चिन्हित नहीं हो पाए हैं। ऐसे में कैबिनेट द्वारा लंबित मामलों के निस्तारण, नई समिति गठन या दस्तावेजी प्रक्रिया को सरल बनाने पर निर्णय लिया जा सकता है।
6. आश्रितों को शिक्षा एवं छात्रवृत्ति लाभ
राज्य आंदोलनकारियों के बच्चों को उच्च शिक्षा, छात्रवृत्ति, व्यावसायिक प्रशिक्षण तथा कौशल विकास योजनाओं में विशेष लाभ देने का प्रस्ताव भी संभावित राहतकारी कदम हो सकता है।
7. चिकित्सा प्रतिपूर्ति एवं कैशलेस सुविधा
आंदोलनकारियों को सरकारी कर्मचारियों की तरह चिकित्सा प्रतिपूर्ति या स्वास्थ्य कार्ड उपलब्ध कराने की मांग समय-समय पर उठती रही है। “फटाफट इलाज” व्यवस्था के साथ यह विषय जुड़ सकता है।
8. सरकारी योजनाओं में प्राथमिकता
आवास, स्वरोजगार, सामाजिक सुरक्षा तथा अन्य कल्याणकारी योजनाओं में राज्य आंदोलनकारियों को प्राथमिक श्रेणी में रखने का प्रावधान भी कैबिनेट स्तर पर विचार का विषय हो सकता है।
9. समान वेतन के फैसले का अप्रत्यक्ष लाभ
हालांकि “समान कार्य-समान वेतन” का मुद्दा मुख्यतः उपनल और संविदा कर्मियों से जुड़ा माना जा रहा है, लेकिन अनेक राज्य आंदोलनकारी या उनके आश्रित ऐसे पदों पर कार्यरत हैं। इसलिए इस फैसले का अप्रत्यक्ष लाभ उन्हें भी मिल सकता है।
10. आंदोलनकारियों के लंबित मामलों का निस्तारण
सरकार विशेष प्रकोष्ठ या समिति बनाकर आंदोलनकारियों की शिकायतों, प्रमाणन, पेंशन और अन्य लंबित मामलों का समयबद्ध समाधान सुनिश्चित कर सकती है।

धामी सरकार की कैबिनेट द्वारा स्वीकृत प्रस्तावों में राज्य आंदोलनकारियों के लिए आरक्षण, सम्मान, स्वास्थ्य सुविधा, आश्रितों को रोजगार एवं शिक्षा लाभ तथा लंबित मांगों के समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण कदम शामिल होने की संभावना है। हालांकि अंतिम और प्रमाणिक जानकारी तभी मानी जाएगी जब सरकार की आधिकारिक कैबिनेट ब्रीफिंग या शासनादेश जारी होगा।


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