देहरादून/रुड़की। आगामी विधानसभा चुनाव की आहट के बीच कांग्रेस में घर वापसी की राजनीतिक …….
कांग्रेस में यशपाल राणा की वापसी पर ब्रेक, टिकट दावेदार बने बड़ी बाधा
घर वापसी के दरवाजे पर ठिठके यशपाल राणा, कांग्रेस में बढ़ा विरोध
रुड़की में कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति में फंसे यशपाल राणा
संजय नेगी के बाद अब यशपाल राणा की बारी? कांग्रेस में उठे सवाल
कांग्रेस में घर वापसी की राह आसान नहीं, यशपाल राणा के सामने चुनौती
रुड़की सीट पर बढ़ी दावेदारी, यशपाल राणा की एंट्री पर खींचतान
कांग्रेस के भीतर ही घिरे यशपाल राणा, वापसी पर संशय बरकरार
टिकट की राजनीति में उलझी यशपाल राणा की घर वापसी
रुड़की में कांग्रेस का सियासी गणित, यशपाल राणा की राह में रोड़े
घर वापसी से पहले ही घिरे यशपाल राणा, कांग्रेस में मचा घमासान
सबसे ज्यादा अखबारी और आकर्षक शीर्षक हो सकता है:
“संजय नेगी वाला पेंच अब यशपाल राणा की राह में!”
…….. तेज होती दिखाई दे रही है, लेकिन पार्टी के भीतर बढ़ती टिकट की दावेदारी कई नेताओं की राह में रोड़ा बन रही है। इसी कड़ी में रुड़की के पूर्व मेयर यशपाल राणा की कांग्रेस में वापसी को लेकर चल रही चर्चाओं पर फिलहाल विराम लगता नजर आ रहा है।
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि कांग्रेस में वापसी के लिए प्रयासरत यशपाल राणा को पार्टी के भीतर ही विरोध का सामना करना पड़ रहा है। हाल ही में प्रदेश प्रभारी के देहरादून दौरे के दौरान उनकी घर वापसी की संभावना जताई जा रही थी, लेकिन अंतिम समय में मामला आगे नहीं बढ़ सका। इससे राजनीतिक हलकों में यह सवाल उठने लगा है कि कहीं यशपाल राणा का भी वही हाल न हो जाए जो पहले रामनगर के संजय नेगी के साथ हुआ था।
जानकारों का कहना है कि रुड़की विधानसभा सीट पर कांग्रेस टिकट के कई दावेदार पहले से सक्रिय हैं। पूर्व मेयर गौरव गोयल समेत अन्य नेता विधानसभा चुनाव लड़ने की तैयारी में हैं और ऐसे में किसी नए दावेदार की एंट्री को लेकर असहजता स्वाभाविक मानी जा रही है। बताया जा रहा है कि पार्टी के कुछ नेताओं ने यशपाल राणा की वापसी से होने वाले राजनीतिक नुकसान का तर्क देकर शीर्ष नेतृत्व को प्रभावित करने की कोशिश की, जिसके चलते उनकी घर वापसी का मामला फिलहाल अधर में लटक गया।
सूत्रों के अनुसार, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह यशपाल राणा की वापसी के पक्ष में सक्रिय बताए जा रहे हैं। हालांकि पार्टी के भीतर विरोधी खेमे की सक्रियता के चलते अभी तक कोई सकारात्मक निर्णय सामने नहीं आ पाया है।
रुड़की की राजनीति में यशपाल राणा की अपनी पकड़ मानी जाती है। पिछले नगर निगम चुनाव में उनकी पत्नी श्रेष्ठा राणा निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में मैदान में उतरी थीं और मामूली अंतर से चुनाव हारकर दूसरे स्थान पर रही थीं। इसी प्रदर्शन के आधार पर राणा खुद को विधानसभा टिकट का मजबूत दावेदार मानते हैं।
वहीं दूसरी ओर, वर्तमान विधायक एवं कैबिनेट मंत्री प्रदीप बत्रा के मंत्री बनने के बाद राजनीतिक समीकरणों में कुछ बदलाव जरूर आया है, लेकिन कांग्रेस अभी भी सत्ता विरोधी माहौल की उम्मीद में चुनावी रणनीति बना रही है। ऐसे में टिकट की दावेदारी बढ़ना और नए नेताओं की घर वापसी को लेकर विवाद खड़ा होना स्वाभाविक माना जा रहा है।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यशपाल राणा कांग्रेस में वापसी का रास्ता बना पाएंगे या फिर पार्टी के अंदरूनी समीकरण उनके राजनीतिक भविष्य पर भी वही विराम लगा देंगे, जैसा कभी संजय नेगी के मामले में देखने को मिला था। आने वाले दिनों में कांग्रेस का रुख इस राजनीतिक चर्चा को नई दिशा दे सकता है।
