अफरा-तफरी मच जाएगी. ऐसा ही कुछ हुआ गाजियाबाद में. गिरधर सिंह बिष्ट के कथित शव की अंत्येष्टि कर दी गई. अंतिम संस्कार शुरू हो गए. तेरहवीं का दिन आ गया. मृत्युभोज की तैयारियों के बीच वो अचानक अपने घर के पास देखे गए. उन्हें देख पड़ोसी-मेहमान और परिजनों की घिघ्घी बंध गई. किसी ने सोच तक नहीं था कि ऐसा होगा. फिर असली कहानी सामने आई.
अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर, उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी उत्तराखंड
असल बात पता चलने के बाद परिवार के चेहरे पर खुशी की लहर दौड़ गई. जहां पूरे परिवार का रो-रोकर बुरा हाल था आज वो गिरधर सिंह बिष्ट को पाकर अब फूले नहीं समा रहा. सवाल ये है कि परिजनों ने जिस शव को चिता पर रखकर जलाया था वो किसका था? आखिर इतनी बड़ी गफलत कैसे हुई? 39 दिन बाद जिंदा कैसे लौट आया गिरधर? इस कहानी को समझने के लिए चलते हैं 16 की घटना की तरफ.
एक विवाद, जेल और फिर गायब हो गया गिरधर
मानसिक रूप से कमजोर 38 साल का गिरधर अपने परिजनों के साथ कौशांबी थाना क्षेत्र के वैशाली इलाके में स्थित कल्पना अपार्टमेंट में रहता है. 16 मई को गिरधर का स्थानीय दुकानदारों से विवाद हो गया. सूचना पर पुलिस पहुंची और शांति भंग के आरोप में धारा 151 में चालान करते हुए गिरधर को डासना जेल भेज दिया. फिर 21 मई को गिरधर को जेल से रिहा कर दिया गया.
रिहाई के बाद घर नहीं पहुंचा गिरधर, परिजन हुए परेशान
21 मई को पुलिस ने जेल से रिहा तो कर दिया पर गिरधर घर नहीं पहुंचे. इधर परिजन काफी परेशान हो गए. गिरधर की तलाश शुरू हुई पर परिजनों को सफलता नहीं मिली. 13 जून को मसूरी थाना क्षेत्र में एक अज्ञात शव बरामद हुआ. परिजनों को बुलाकर पहचान कराई गई. परिजनों ने उस शव को गिरधर के रूप में शिनाख्त किया. शव को पोस्टमार्टम के बाद परिजनों को सौंप दिया गया. परिजनों ने इसका दाह संस्कार कर दिया.
पुलिस की कार्रवाई से भड़के परिजन, थाने को घेरा
इधर गिरधर की संदिग्ध मौत के बाद परिजन कौशांबी पुलिस पर भड़क गए. उन्होंने पुलिस पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कौशांबी थाने में हंगामा कर दिया. जिसके बाद गाजियाबाद के मसूरी थाने में कुछ ज्ञात और कुछ अज्ञात आरोपियों पर हत्या का मुकदमा भी दर्ज किया गया.
13वीं की तैयारियों के बीच लौटे गिरधर
इधर गिरधर के घर पर 13वीं की तैयारियों के बीच पड़ोसी और रिश्तेदार जुटे थे. तभी गिरधर को अपने सामने खड़ा देख सभी अवाक रह गए. कुछ तो डर भी गए. फिर हिम्मत जुटाकर जब परिजन ने पूछा तो पता चला कि गिरधर तो परिवार वालों पर नाराज थे और जेल से छूटने के बाद पंजाब चले गए. वहां एक सत्संग में रह रहे थे.
गिरधर के जीवित लौटने के बाद कई गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं. सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस शव का अंतिम संस्कार किया गया, वह शव आखिर किसका था? शव की पहचान किस आधार पर की गई? क्या पहचान प्रक्रिया में कोई बड़ी चूक हुई? क्या वैज्ञानिक जांच, डीएनए परीक्षण या अन्य आवश्यक प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया गया?
गिरधर की कथित हत्या में जिनपर FIR वो भी सामने आए
उधर, गिरधर की कथित हत्या के आरोप में जिन लोगों को संदेह के दायरे में लाया गया था, उनके परिजन भी अब सामने आ गए हैं. उनका कहना है कि गलत पहचान के आधार पर उनके परिवार के लोगों को हत्यारोपी बना दिया गया और पुलिस पूछताछ का सामना करना पड़ा. उनका कहना है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और जो भी दोषी पाया जाए, उसके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए.
गिरधर के घर लौटने की खबर फैलते ही सोसायटी में लोगों की भीड़ जुट गई. जो लोग कुछ दिन पहले उसके लिए शोकसभा में शामिल हुए थे, वही अब उसे अपने सामने जीवित देखकर आश्चर्य व्यक्त कर रहे हैं. घर के बाहर दिनभर लोगों का जमावड़ा लगा रहा.
यह मामला जितना सनसनीखेज है, उतना ही संवेदनशील भी. एक ओर एक परिवार ने जिस व्यक्ति का अंतिम संस्कार किया, वह जीवित लौट आया, वहीं दूसरी ओर एक अज्ञात शव आज भी अपनी पहचान का इंतजार कर रहा है. अब सबकी निगाहें वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों पर टिकी हैं कि इस पूरे घटनाक्रम में हुई चूक की जिम्मेदारी किसकी तय होती है और उस अज्ञात शव की असली पहचान कब सामने आती है.
