हरियाणा में 657 करोड़ रुपये के बड़े बैंक घोटाले में कई आईएएस अधिकारियों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। इस मामले में सीबीआई ने अब तक दो वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि एक सस्पेंड आईएएस अधिकारी फरार है।

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इसके अलावा, पांच अन्य आईएएस अधिकारी भी जांच एजेंसी के रडार पर हैं और उन पर भी गिरफ्तारी की तलवार लटक रही है।

अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर, उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी उत्तराखंड

कैसे रची गई 657 करोड़ के घोटाले की साजिश?

इस महाघोटाले में आईडीएफसी फर्स्ट बैंक और एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक के अधिकारियों ने कथित तौर पर हरियाणा सरकार के कर्मचारियों और आईएएस अधिकारियों के साथ मिलीभगत की। इस गठजोड़ ने राज्य के आठ विभागों और चंडीगढ़ प्रशासन के दो विभागों से फंड की हेराफेरी करके 657 करोड़ रुपये का घोटाला किया।

169 करोड़ के गबन में IAS प्रदीप कुमार की तलाश

ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक, इस मामले में सस्पेंड किए गए 2011 बैच के आईएएस अधिकारी प्रदीप कुमार फरार चल रहे हैं। सीबीआई सूत्रों के मुताबिक, वे अपने गुरुग्राम स्थित घर से गायब हैं और उनका मोबाइल फोन भी लगातार ‘स्विच ऑफ’ आ रहा है।

प्रदीप कुमार पर आरोप है कि उन्होंने हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (HSPCB) के मेंबर सेक्रेटरी (31 अगस्त 2022 से 10 दिसंबर 2025 तक) रहते हुए आईडीएफसी बैंक में खोले गए एक खाते से 169 करोड़ रुपये का गबन किया।

गिरफ्तारी से बचने के लिए प्रदीप कुमार ने पंचकूला की अदालत में अग्रिम जमानत याचिका दायर की है। अदालत ने शुक्रवार को सीबीआई के वरिष्ठ लोक अभियोजक को निर्देश दिया है कि अगली सुनवाई (2 जुलाई) पर आरोपी की अन्य लंबित जमानत याचिकाओं का विवरण पेश किया जाए।

प्रदीप कुमार ने अपने करियर की शुरुआत 1999 में करनाल में सिटी मजिस्ट्रेट के तौर पर की थी और बाद में उन्हें एचसीएस (HCS) से आईएएस में प्रमोट किया गया था। उन्हें राम कुमार के साथ 8 अप्रैल को सस्पेंड कर दिया गया था।

फर्जी कंपनियों में डायवर्ट किया गया पैसा

एचएसपीसीबी से जुड़े गबन के मामले में सीबीआई ने 23 जून को बोर्ड के डेटा एंट्री ऑपरेटर सौरव शर्मा को भी गिरफ्तार किया था। उस पर नियमों का उल्लंघन करते हुए निजी बैंकों में निवेश कराने और बोर्ड को 169.36 करोड़ रुपये का नुकसान पहुंचाने का आरोप है। आरोप है कि इस फंड को फर्जी (शेल) कंपनियों में डायवर्ट किया गया:

  • स्वास्तिक देश प्रोजेक्ट्स: 70 करोड़ रुपये भेजे गए।
  • कैपसीपी फिनटेक सर्विसेज: 53 करोड़ रुपये से ज्यादा की रकम भेजी गई।
  • अन्य शेल कंपनियां: दिशा ट्रेडर्स, मन्नत कॉन्ट्रैक्टर, एसआरआर प्लानिंग गुरुज प्राइवेट लिमिटेड और विटामेड सॉल्यूशंस के खातों में भी पैसे ट्रांसफर किए गए।

दो IAS जेल में, 5 अन्य पर लटकी तलवार

इस बैंक घोटाले में कुल 8 आईएएस अधिकारी जांच के घेरे में हैं। राज्य सरकार ने पहले ही भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17A के तहत इन आठ अधिकारियों की जांच के लिए सीबीआई को अनुमति दे दी है।

सीबीआई पहले ही 2000 बैच के पंकज अग्रवाल और 2012 बैच के राम कुमार सिंह को गिरफ्तार कर चुकी है। फिलहाल दोनों न्यायिक हिरासत में हैं।

इन 5 अधिकारियों पर लटकी तलवार

बचे हुए पांच आईएएस अधिकारियों- साकेत कुमार, विनीत गर्ग, मोहम्मद शाईन, मणि राम शर्मा और डीके बेहरा पर भी गिरफ्तारी की तलवार लटक रही है। बता दें कि विनीत गर्ग एचएसपीसीबी के चेयरमैन रह चुके हैं और वे प्रदीप कुमार के सीनियर थे।


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