उत्तराखंड में आज कैसा रहेगा मौसम: उत्तराखंड (Uttarakhand) में मानसूनी बारिश का कहर लगातार जारी है. भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 11 जुलाई को राज्य के सात प्रमुख जिलों के लिए भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है.

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पिछले दो दिनों के मुकाबले बारिश की रफ्तार में कुछ कमी जरूर देखी गई है, लेकिन संवेदनशील इलाकों में खतरा कम नहीं हुआ है.मौसम विभाग ने गरज-चमक के साथ तेज आकाशीय बिजली गिरने और तीव्र बौछारें पड़ने की आशंका जताई है.

अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर, उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी उत्तराखंड

इन 7 जिलों में अलर्ट, एहतियातन स्कूल बंद

मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार, शनिवार 11 जुलाई को मुख्य रूप से सात जिलों में भारी बारिश की संभावना है. यह भी पढ़े: 

  • देहरादून
  • नैनीताल
  • पौड़ी
  • पिथौरागढ़
  • उधम सिंह नगर
  • चंपावत
  • बागेश्वर.

इसके अलावा हरिद्वार जिले में भी तेज बारिश का पूर्वानुमान है.भारी बारिश की चेतावनी को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा के लिहाज से देहरादून, चंपावत, हरिद्वार और नैनीताल जिलों के सभी स्कूलों और आंगनवाड़ी केंद्रों में आज (11 जुलाई) छुट्टी घोषित कर दी है.

देहरादून में 11 से अधिक सड़कें बंद

लगातार हो रही बारिश के कारण पहाड़ी और मैदानी दोनों क्षेत्रों में जनजीवन प्रभावित हुआ है. राजधानी देहरादून के चकराता और कालसी क्षेत्र में मलबे के कारण स्थिति ज्यादा खराब है. अकेले देहरादून जिले में वर्तमान में 11 सड़कें पूरी तरह बंद पड़ी हैं. इनमें एक राष्ट्रीय राजमार्ग (National Highway), एक राज्य मार्ग (State Highway), एक मुख्य जिला मार्ग और 8 ग्रामीण सड़कें शामिल हैं. ग्रामीण इलाकों में सड़कें बंद होने से संपर्क कट गया है और आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति में दिक्कत आ रही है.

यमुनोत्री हाईवे ठप, स्यानाचट्टी में झील बनने का खतरा

चारधाम यात्रा मार्गों पर भी भूस्खलन और नदियों के उफान का सीधा असर पड़ा है.उत्तरकाशी जिले में यमुनोत्री धाम के प्रमुख पड़ाव ‘स्यानाचट्टी’ में यमुना नदी का जलस्तर अचानक बहुत बढ़ गया है. नदी का पानी सड़कों से होते हुए होटलों, होमस्टे और रिहायशी इमारतों के ग्राउंड फ्लोर तक पहुंच गया है, जिससे स्थानीय लोगों और तीर्थयात्रियों में डर का माहौल है.

इसके साथ ही, यमुनोत्री हाईवे का करीब 100 मीटर हिस्सा भूस्खलन के कारण पूरी तरह से ढह (वाशआउट) गया है, जिसके चलते इस मार्ग पर वाहनों की आवाजाही पूरी तरह से ठप है.दूसरी तरफ, पिथौरागढ़ में भारत-चीन सीमा को जोड़ने वाला महत्वपूर्ण तवाघाट-लिपुलेख मार्ग भी भारी मलबे के कारण अवरुद्ध हो गया है.

नदियों का जलस्तर बढ़ा, तापमान में भारी गिरावट

पहाड़ों पर हो रही मूसलाधार बारिश की वजह से अलकनंदा, मंदाकिनी, पिंडर और यमुना समेत तमाम छोटी-बड़ी नदियों का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है. हालांकि, इस बारिश से लोगों को उमस भरी गर्मी से बड़ी राहत मिली है. पिछले 24 घंटों में देहरादून के अधिकतम तापमान में करीब 4 डिग्री सेल्सियस की गिरावट आई है, जिससे यहां का अधिकतम तापमान 26.8 डिग्री और न्यूनतम तापमान 22.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया है. पर्वतीय क्षेत्रों में तापमान सामान्य से 5 डिग्री तक नीचे चला गया है.

यात्रियों और स्थानीय लोगों के लिए सरकारी गाइडलाइन

राज्य आपदा प्रबंधन विभाग (SEOC) और सचिव विनोद कुमार सुमन ने स्थिति को देखते हुए जनता के लिए विशेष अपील जारी की है.

  1. अनावश्यक यात्रा से बचें:जब तक बहुत जरूरी न हो, पहाड़ी रास्तों पर सफर करने से पूरी तरह परहेज करें.
  2. चारधाम यात्री रखें ध्यान: केदारनाथ, बद्रीनाथ, यमुनोत्री और गंगोत्री जाने वाले श्रद्धालु मौसम और सड़कों की ताजा स्थिति की जानकारी लेने के बाद ही अपनी यात्रा आगे बढ़ाएं.
  3. सुरक्षित स्थानों पर रहें: यदि आप यात्रा के बीच में हैं और मौसम बिगड़ता है, तो तुरंत किसी सुरक्षित पक्के भवन में शरण लें और नदी-नालों के किनारे जाने की गलती न करें.

प्रशासन ने एनडीआरएफ (NDRF), एसडीआरएफ (SDRF) और स्थानीय पुलिस को किसी भी आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए चौबीसों घंटे अलर्ट पर रहने के निर्देश दिए हैं.


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