1,850 किलोमीटर की अचूक रेंज और 75 किमी/घंटा की तूफानी रफ्तार से दौड़ने वाला यह मानवरहित आत्मघाती युद्धपोत (Kamikaze USV) समुद्र में मंडराती साक्षात मौत है. ईरान के सबसे सुरक्षित माने जाने वाले बंदर अब्बास नेवल बेस के परखच्चे उड़ाकर इस सी-ड्रोन ने साबित कर दिया है कि अब दुश्मन के बड़े से बड़े युद्धपोत और सबमरीन (पनडुब्बी) इसके निशाने पर हैं.
अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर, उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी उत्तराखंड
मुख्य फीचर्स और विशेषताएं खामोश शिकारी: यह ड्रोन आकार में बेहद छोटा है और इसका ढांचा समुद्र की सतह से बिल्कुल सटकर चलता है. कम ऊंचाई और विशेष बनावट के कारण दुश्मन के पारंपरिक एयर डिफेंस सिस्टम और तटीय रडार इसे पकड़ने में नाकाम रहते हैं. वन-वे कामिकेज अटैक: यह कोई जासूसी ड्रोन नहीं है बल्कि एक आत्मघाती हथियार है. इसके फ्रंट वेपन बे में भारी मात्रा में उच्च क्षमता वाले विस्फोटक लोड होते हैं, और यह सीधे दुश्मन के ठिकाने या जहाज से टकराकर खुद को उड़ा लेता है. इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर से सुरक्षित: कोर्सेर ड्रोन में एडवांस्ड जीपीएस एंटी-जैमिंग तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल किया गया है. दुश्मन अगर इसके सिग्नल ब्लॉक करने की कोशिश भी करे तो भी यह अपने एआई कैमरों की मदद से सटीक निशाना लगाने में सक्षम है.
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विशेषताविवरणरेंज1,850 किलोमीटररफ्तार75 किमी/घंटापेलोड453 किलोग्राम विस्फोटकउपयोगआत्मघाती समुद्री हमला
शिप और सबमरीन का काल
अमेरिकी नौसेना की टास्क फोर्स 59 द्वारा संचालित इस सी-ड्रोन का ईरान के सबमरीन बेस पर हमला करना वैश्विक नौसैनिक इतिहास में एक बड़ा टर्निंग पॉइंट है. अब तक नौसैनिक जंग में करोड़ों डॉलर के गाइडेड मिसाइल डिस्ट्रॉयर या फाइटर जेट्स का इस्तेमाल होता था, जिसमें पायलटों की जान का जोखिम भी रहता था. लेकिन अमेरिका ने यूक्रेन युद्ध से सीख लेते हुए इस रणनीति को बदला है. मात्र 35 से 50 हजार डॉलर की लागत वाले इस सी-ड्रोन ने बिना किसी अमेरिकी सैनिक को खतरे में डाले ईरान की करोड़ों डॉलर की सबमरीन मेंटेनेंस फैसिलिटी को पंगु बना दिया. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे संकरे समुद्री रास्तों में जहां बड़े जहाजों को मोड़ना मुश्किल होता है, यह ड्रोन दुश्मन की नौसेना का काल साबित हो रहा है.
सवाल-जवाब
[q]क्या यह सी-ड्रोन बिना इंसानी मदद के खुद ही हमला कर सकता है?[/q]
[ans]यह ड्रोन बेस से लॉन्च होने के बाद समुद्र में सैकड़ों मील का रास्ता खुद तय कर सकता है और लहरों के बीच अपनी लोकेशन बनाए रखता है. हालांकि, ‘ह्यूमन-इन-द-लूप’ प्रोटोकॉल के तहत दुश्मन के टारगेट से टकराने और अंतिम ब्लास्ट करने का अंतिम अप्रूवल सैटेलाइट लिंक के जरिए अमेरिकी नौसेना का रिमोट ऑपरेटर ही देता है.[/ans]
[q]ईरान के पास इस अमेरिकी सी-ड्रोन का क्या तोड़ है?[/q]
[ans]ईरान ऐसे हमलों से बचने के लिए अपने प्रमुख बंदरगाहों के चारों ओर एंटी-ड्रोन नेट (लोहे के जाल) बिछाने और रिमोट-कंट्रोल गन सिस्टम तैनात करने की कोशिश कर रहा है. इसके अलावा, समुद्र की सतह पर नजर रखने के लिए ईरान अपने खुद के छोटे टोही ड्रोनों का जाल बढ़ा रहा है.[/ans]
[q]इस ड्रोन की 1,850 किमी की रेंज का युद्ध में क्या फायदा है?[/q]
[ans]इस लंबी रेंज का मतलब है कि अमेरिकी नौसेना को अपने बड़े और कीमती विमानवाहक पोतों (Aircraft Carriers) को दुश्मन की तटीय मिसाइलों की जद में लाने की जरूरत नहीं है. अमेरिकी जहाज सुरक्षित अंतरराष्ट्रीय पानी में बहुत दूर खड़े रहकर भी इन ड्रोनों को दुश्मन के नेवल बेस पर हमला करने के लिए लॉन्च कर सकते हैं.[/ans]
