सबसे बड़ा सवाल?
सीसीटीवी फुटेज में यदि आरोपी मोबाइल के नीचे नोटों के बंडल छिपाकर ले जाता दिखाई दे रहा है, तो वे रकम आखिर कहां गई? अब तक नकदी की बरामदगी क्यों नहीं हो सकी? क्या पूरा पैसा बरामद होगा और क्या इस मामले में अन्य लोगों की भूमिका भी सामने आएगी?
देहरादून/बद्रीनाथ। उत्तराखंड के विश्व प्रसिद्ध बद्रीनाथ धाम में श्रद्धालुओं के चढ़ावे में कथित हेराफेरी का मामला लगातार गंभीर होता जा रहा है। इस प्रकरण की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) ने अपनी कार्रवाई तेज करते हुए मुख्य आरोपी और बद्री-केदार मंदिर समिति (BKTC) अध्यक्ष के निजी सचिव प्रमोद नौटियाल को गिरफ्तार किया था। अब विभागीय जांच टीम ने अपनी 18 पन्नों की प्रारंभिक रिपोर्ट मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) को सौंप दी है, जिसमें संकेत मिले हैं कि चढ़ावे में कथित हेराफेरी किसी एक दिन की घटना तक सीमित नहीं थी, बल्कि कई दिनों तक लगातार होती रही।
मामले में अदालत ने आरोपी प्रमोद नौटियाल को 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है। दूसरी ओर, आरोपी ने स्वयं को निर्दोष बताते हुए उत्तराखंड हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। उसकी याचिका पर 16 जुलाई 2026 को सुनवाई प्रस्तावित है।
3 जुलाई को सामने आया मामला
पूरे घटनाक्रम का खुलासा 3 जुलाई को हुआ, जब बद्रीनाथ मंदिर में श्रद्धालुओं के चढ़ावे की गिनती के दौरान अनियमितताओं की शिकायत सामने आई। शिकायत के बाद मंदिर समिति और प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू कराई। प्रारंभिक जांच में सीसीटीवी फुटेज की पड़ताल की गई, जिसमें कथित रूप से चढ़ावे की नकदी और सोने-चांदी के सिक्कों के साथ हेराफेरी के दृश्य सामने आए।
जांच एजेंसियों का दावा है कि आरोपी दान गिनने की प्रक्रिया के दौरान चढ़ावे में से सामग्री अलग करता दिखाई दिया। इसी आधार पर एसआईटी ने आगे की कार्रवाई शुरू की।
बद्रीनाथ मंदिर चढ़ावा प्रकरण को लेकर प्रदेश में तरह-तरह की चर्चाएं और सवाल उठ रहे हैं। सोशल मीडिया से लेकर जनचर्चाओं तक यह दावा किया जा रहा है कि गिरफ्तार किया गया कर्मचारी केवल एक छोटी कड़ी हो सकता है, जबकि पूरे मामले की सच्चाई सामने आना अभी बाकी है। कई लोग सवाल उठा रहे हैं कि यदि सीसीटीवी में कथित रूप से नकदी और अन्य बहुमूल्य चढ़ावे की हेराफेरी दिखाई दी है, तो वह सामग्री आखिर कहां गई और उससे जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
जनचर्चाओं में यह भी कहा जा रहा है कि केवल एक व्यक्ति की गिरफ्तारी से पूरे मामले का खुलासा नहीं माना जा सकता। लोग मांग कर रहे हैं कि एसआईटी मंदिर के वित्तीय रिकॉर्ड, बैंक खातों, सीसीटीवी फुटेज और संबंधित सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों की भूमिका की गहन जांच करे, ताकि किसी भी स्तर पर दोषी व्यक्ति बच न सके।
देहरादून से हुई गिरफ्तारी
साक्ष्यों के आधार पर एसआईटी ने मुख्य आरोपी प्रमोद नौटियाल को देहरादून से गिरफ्तार किया। गिरफ्तारी के बाद उससे लंबी पूछताछ की गई। पूछताछ के दौरान कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आने का दावा किया गया है।
जांच के दौरान आरोपी के कब्जे से मंदिर से जुड़ी एक शालिग्राम शिला और बद्री-केदार मंदिर समिति का आधिकारिक लैपटॉप भी बरामद किया गया। हालांकि, अब तक कथित रूप से गायब नकदी की बरामदगी नहीं हो सकी है। इसी कारण जांच एजेंसियां आरोपी के वित्तीय लेनदेन और बैंक खातों की गहराई से जांच कर रही हैं।
18 पन्नों की रिपोर्ट में कई अहम खुलासे
विभागीय जांच टीम की 18 पन्नों की प्रारंभिक रिपोर्ट में कई महत्वपूर्ण बिंदुओं का उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, चढ़ावे में कथित हेराफेरी लगातार कई दिनों तक की गई। जांच अधिकारियों का मानना है कि पूरे घटनाक्रम को समझने के लिए केवल एक दिन के रिकॉर्ड पर्याप्त नहीं होंगे।
इसी वजह से एसआईटी ने अब मंदिर के पिछले तीन वर्षों के वित्तीय रिकॉर्ड, दान रजिस्टर, बैंक खातों, जमा राशि और लेखा-जोखा की विस्तृत जांच शुरू कर दी है। जांच टीम यह भी पता लगा रही है कि कहीं चढ़ावे के प्रबंधन में लंबे समय से कोई संगठित गड़बड़ी तो नहीं चल रही थी।
चार अन्य कर्मचारी भी जांच के दायरे में
एसआईटी के साथ शासन द्वारा गठित उच्च स्तरीय समिति भी समानांतर रूप से जांच कर रही है। सूत्रों के अनुसार मंदिर समिति के चार अन्य कर्मचारियों और अधिकारियों से लगातार पूछताछ की जा रही है।
जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि कथित हेराफेरी में किसी और की भूमिका थी या पूरी कार्रवाई अकेले आरोपी द्वारा की गई। अधिकारियों के बयान, ड्यूटी रिकॉर्ड, सीसीटीवी फुटेज और दस्तावेजों का मिलान किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने बनाई उच्च स्तरीय समिति
मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने तीन सदस्यीय उच्च स्तरीय जांच समिति का गठन किया है। समिति को पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदारी तय करने के निर्देश दिए गए हैं।
सरकार का कहना है कि धार्मिक आस्था से जुड़े किसी भी संस्थान में पारदर्शिता सर्वोच्च प्राथमिकता है और दोषी पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति के विरुद्ध कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।
हाईकोर्ट पहुंचा आरोपी
मुख्य आरोपी प्रमोद नौटियाल ने अपनी गिरफ्तारी और जांच प्रक्रिया को चुनौती देते हुए उत्तराखंड हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। उसने स्वयं को निर्दोष बताते हुए न्यायालय से राहत की मांग की है। इस याचिका पर 16 जुलाई 2026 को सुनवाई निर्धारित है। मामले की अगली कानूनी दिशा अदालत की कार्यवाही के बाद स्पष्ट होगी।
BKTC ने बदले नियम
घटना के बाद बद्री-केदार मंदिर समिति ने दान व्यवस्था में कई महत्वपूर्ण बदलाव लागू किए हैं। सबसे प्रमुख निर्णय यह है कि अब चढ़ावे की गिनती करने वाले सभी कर्मचारियों के लिए बिना जेब वाली ड्रेस पहनना अनिवार्य होगा।
बद्रीनाथ चढ़ावा प्रकरण के बाद जनचर्चाओं में यह मांग लगातार उठ रही है कि मामले से जुड़े सभी अधिकारियों, कर्मचारियों और पदाधिकारियों की संपत्ति की निष्पक्ष जांच कराई जाए। लोगों का मानना है कि यदि आय के स्रोत, संपत्ति और वित्तीय लेनदेन की स्वतंत्र जांच हो जाए, तो पूरे मामले में “दूध का दूध और पानी का पानी” हो सकता है।
इसके साथ ही दान गिनती प्रक्रिया की निगरानी और अधिक सख्त करने, सीसीटीवी व्यवस्था को मजबूत बनाने तथा कर्मचारियों की जवाबदेही बढ़ाने की दिशा में भी कदम उठाए जा रहे हैं। समिति का उद्देश्य भविष्य में ऐसी किसी भी घटना की संभावना को समाप्त करना है।
श्रद्धालुओं का भरोसा बनाए रखना बड़ी चुनौती
बद्रीनाथ धाम देश के सबसे पवित्र तीर्थस्थलों में गिना जाता है, जहां हर वर्ष लाखों श्रद्धालु श्रद्धा और विश्वास के साथ दान अर्पित करते हैं। ऐसे में चढ़ावे में कथित हेराफेरी का मामला सामने आने से श्रद्धालुओं के बीच चिंता का माहौल बना है।
प्रशासन और मंदिर समिति का कहना है कि जांच पूरी पारदर्शिता के साथ की जा रही है तथा दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। साथ ही दान प्रबंधन प्रणाली को अधिक सुरक्षित, जवाबदेह और आधुनिक बनाने के प्रयास भी तेज कर दिए गए हैं।
फिलहाल एसआईटी की जांच जारी है। पिछले तीन वर्षों के वित्तीय रिकॉर्ड, बैंक खातों, सीसीटीवी फुटेज और कर्मचारियों से पूछताछ के आधार पर आगे और महत्वपूर्ण खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है। जांच पूरी होने के बाद यह स्पष्ट होगा कि कथित हेराफेरी का वास्तविक दायरा कितना बड़ा था और इसमें किन-किन लोगों की भूमिका रही।
