नैनीताल ;देहरादून की पहाड़ियों की तलहटी और भूस्खलन संभावित क्षेत्रों में लगातार हो रहे निर्माण कार्यों को लेकर उत्तराखंड हाईकोर्ट (Uttarakhand High Court) ने कड़ा रुख अपनाया है. मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (MDDA), उत्तराखंड जैव विविधता बोर्ड और अन्य संबंधित पक्षों को एक सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है.

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मामला वर्ष 2021 में दायर एक जनहित याचिका से जुड़ा है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि देहरादून-मसूरी फुटहिल क्षेत्र में पर्यावरणीय मानकों की अनदेखी कर बड़े पैमाने पर निर्माण किया जा रहा है. याचिका में विशेष रूप से उन इलाकों का उल्लेख किया गया है, जहां ढलान 30 डिग्री या उससे अधिक है और जिन्हें भूस्खलन की दृष्टि से संवेदनशील माना जाता है.

अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर, उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी उत्तराखंड

क्या है पूरा मामला?

देहरादून निवासी रेनू पॉल ने 2021 में हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर मांग की थी कि देहरादून की पहाड़ियों की तलहटी में अनियंत्रित निर्माण पर रोक लगाई जाए. उनका कहना है कि संवेदनशील ढलानों पर बड़े पैमाने पर निर्माण होने से पर्यावरणीय संतुलन बिगड़ रहा है और भविष्य में भूस्खलन जैसी आपदाओं का खतरा बढ़ सकता है.

कोर्ट ने जताई देरी पर नाराजगी

याचिका में यह भी मांग की गई थी कि ऐसे क्षेत्रों का नियमित निरीक्षण कराया जाए और बिना वैज्ञानिक परीक्षण तथा आवश्यक अनुमति के किसी भी निर्माण की अनुमति न दी जाए. सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से अदालत को बताया गया कि याचिका दायर हुए करीब छह वर्ष बीत चुके हैं, लेकिन कई बार समय दिए जाने के बावजूद संबंधित विभागों ने अब तक अपना विस्तृत जवाब दाखिल नहीं किया. हाईकोर्ट ने संबंधित विभागों को एक सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया.

2021 के आदेश का भी नहीं हुआ पालन

याचिकाकर्ता की ओर से अदालत को यह भी बताया गया कि 2 मई 2021 को हाईकोर्ट ने एमडीडीए और देहरादून नगर निगम आयुक्त को संबंधित क्षेत्रों का स्थलीय निरीक्षण कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए थे. याचिका के अनुसार, आज तक उस आदेश का प्रभावी अनुपालन नहीं हुआ. इस दौरान पहाड़ियों की तलहटी में निर्माण गतिविधियां जारी रहीं और संवेदनशील क्षेत्रों की स्थिति पहले की तुलना में और अधिक खराब हो गई.

पर्यावरणीय सुरक्षा का भी उठाया गया मुद्दा

याचिका में कहा गया है कि देहरादून-मसूरी फुटहिल क्षेत्र जैव विविधता और प्राकृतिक जल निकासी की दृष्टि से बेहद संवेदनशील है. अनियोजित निर्माण से न केवल भूस्खलन का खतरा बढ़ सकता है बल्कि वर्षाजल निकासी, भूजल संरक्षण और वन्य जैव विविधता पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है.

एक सप्ताह बाद फिर होगी सुनवाई

हाईकोर्ट ने सभी पक्षों को एक सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है. इसके बाद अदालत मामले की अगली सुनवाई में यह तय करेगी कि संवेदनशील क्षेत्रों में निर्माण को लेकर आगे क्या निर्देश दिए जाएं.


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